*इश्क का महीना “फरवरी” : सुनीता राजगढ़िया
*_इश्क का महीना_ ” _फरवरी_ “*
मंद- मंद सी हवा चली ,
खिली-खिली सी धूप निकली ,
ठंडी हवाओं ने है रुख बदला,
आ गया इश्क वाला महीना |
रोज डे से वैलेंटाइन डे तक ,
इश्क मोहब्बत की है आंधी चली,
महाशिवरात्रि के उत्सव ने भी,
हैं, फिजाओं में महक भांग की घोली |
प्यार के इजहार में,
कली गुलाब की है तोड़ी,
दिल से निकले अनुराग को,
थमा गुलाब, अपनी चुप्पी तोड़ी|
इश्क वाले महीने में ,
बसंत ऋतु भी कमाल कर जाती है,
धड़कते दिलों को बसंती हवा,
बसंती कर जाती हैं|

सुनीता राजगढ़िया


