गुलाब दिवस : इन्दु तोदी
गुलाब दिवस
आज है गुलाब दिवस,
तोडकर गुलाब नही जनाब, दे सको तो,
सभी को तुम्हारी गुलाब सी मासुमियत दे दो
बिखेर दो खुशबू इस कदर हवाओं में की हवाओं को भी सुहाना मौसम हमदम कर दो।
गिरकर बिखर जाओ गर कहीं तुम,
फिर भी न शिकवा करो,
उसी में अपना रंग और महक भर दो।
ऐ मेरे भाई, ऐ मेरे दोस्त,
गुलाब दिवस होगा सही में तब गुलाब दिवस
जब तोड़कर गुलाब नही,
बल्कि तुम खुद ही थोड़ा सा किसी के लिए गुलाब बन लो।
रोज डे
रगों में बसी प्रेम-धुन की आवाज हो
गुंजता हुआ सुर प्रेम का आगाज हो,
हो गर एक दुजे के लिए भाव समर्पण,
हर रोज ही “रोज डे” का आभास हो।

इन्दु तोदी, धरान



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