विश्व हिंदी सम्मेलन के प्रमुख सत्र फीजी व प्रशांत क्षेत्र में हिंदी का आयोजन
फीजी व प्रशांत क्षेत्रों में हिंदी -15 फ़रवरी को विश्व हिंदी सम्मेलन के प्रमुख सत्र फीजी व प्रशांत क्षेत्र में हिंदी का आयोजन किया गया ।
सत्र के अध्यक्ष के रूप में फीजी के पूर्व प्रधानमंत्री श्री महेन्द्र चौधरी तथा सह अध्यक्ष केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष श्री अनिल जोशी , श्री भुवन मोहन , आर्य समाज के प्रमुख ,श्रीमती सुभाषिणी लता ,फीजी नेशनल विश्वविद्यालय , श्रीमती इंदु चंद्रा पूर्व प्राध्यापक, यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ पैसिफ़िक , श्री मनहर , भारत सेवाश्रम संघ . श्री सेल्वा राजू , चैन्नई के प्रोफेसर जैसे वक्ता उपस्थित थे । गोष्ठी में प्रशांत और फीजी में हिंदी की स्थिति पर विशद चर्चा हुई । इस अवसर पर विश्व हिंदी सम्मेलन के अवसर पर प्रकाशित केंद्रीय हिंदी संस्थान की प्रमुख पत्रिकाओं गवेषणा और प्रवासी जगत का व मासिक समाचार पत्र संस्थान समाचार का श्री महेन्द्र चौधरी द्वारा लोकार्पण भी किया गया । विभिन्न वक्ताओं की बातचीत के आधार पर मुख्य निष्कर्ष निम्न है –
1. विश्व हिंदी सचिवालय की क्षेत्रीय प्रशांत ईकाई का गठन किया जाना चाहिए जिसका केंद्र फ़ीजी में हो और जो आस पास के 15 देशों में हिंदी के प्रचार प्रसार और विकास के लिए कार्य कर सके।
2. मानक हिंदी के स्वरूप की दसवीं कक्षा तक अनिवार्य रूप से पढ़ाई होनी चाहिए इससे इससे किसी कौशल से जैसे आज इत्यादि से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
3. देवनागरी लिपि के सीखने पर ज़ोर देना चाहिए ।
4. हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए शांतिदूत जैसा साप्ताहिक समाचार पत्र भारत सरकार के सहयोग से प्रकाशित किया जाए ।
5. फ़ीजी के लोगों को गिरमिट इतिहास से परिचित होना चाहिए।
6. मानक हिंदी और फ़ीजी हिन्दी में समन्वय का प्रयास करते हुए दोनों भाषाओं के माध्यम से एक दूसरे को मज़बूत बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए ।
7. फ़ीजी में हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाएँ जो विभिन्न अख़बारों इत्यादि में प्रकाशित हुई थी उन्होंने शोध कर उनकी पुस्तकों के प्रकाशन की व्यवस्था करनी चाहिए।
8. नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने के लिए समाज को जागरूक करना चाहिए जिससे वहाँ पर हिंदी के लिए माँग पैदा हो ।
9. हिंदी में अधिक से अधिक ई काटेंट विकसित करना चाहिए ।
10. प्रशांत क्षेत्रों में विभिन्न शिक्षण संस्थानों में समन्वय होना चाहिए ।
11. प्रशांत के विभिन्न संस्थानों में डिजीटलीकरण के प्रयास करना चाहिए ।



