विश्व प्रसिद्ध मिथिला परिक्रमा से मिथिला क्षेत्र सियाराम मय : नवीन कुमार नवल
नवीन कुमार नवल, जलेश्वर । श्री सीता राम मिलान का ये मिथिला क्षेत्र लक्ष्मी नारायण के त्रेता युग में धरती पर अवतार के रूप में प्रसिद्ध है। उस समय दर्शन करने हेतु जनकपुर चारों कोन पर अवस्थित चार महादेव सहित सीता जी से संबंधित धार्मिक स्थल का भ्रमण के रूप मे स्थापित परिक्रमा सैकड़ों वर्षों से चल रहा है। इस में राम जी का डोला को मिथिला बिहारी का डोला एवम सीता जी को किशोरी का डोला को पालकी में रखकर हजारों लोगों एवम देश विदेश के सन्त के साथ भारत नेपाल के 15 विश्राम स्थल को परिक्रमा कर मनाया जाता है।
परिक्रमा चौथा दिन जलेश्वर महादेव के नगरी जलेश्वर का दर्शन कर पांचवां दिन मांडव ऋषि के आश्रम मड़ई में विषेस भंडारा के सातवा दिन ध्रुव कुंड पहुंचा। जलेश्वर में परशुराम साह परिक्रमा संस्था के सानिध्य मेयर सुरेश साह के अतिथि में भब्य स्वागत किया गया, वही मड़ई में महोतरी गा.पा. अध्यक्ष दिलीप कुमार पांडेय के सानिध्य में परिक्रमा सेवा समिति के पहल से विशेष सहयोग किया गया है अध्यक्ष पांडे जी के प्रयास से भंडारा के साथ जलावन वितरण, पुयाल (पोडा) वितरण कर हर पहलू पर ध्यान केंद्रित किया गया।
परिक्रमा में नेपाल भारत कई राज्य के मन्दिर मठ के खालसा के रूप मे भ्रमण करते हैं जिसमे जलेश्वर के धन के खजाना सोना गढ़ी सोनुखड़ा के सोनागढ़ि खालसा के संयोजक पूर्व अध्यक्ष सुनिल कुमार राय, अपनी खालसा को 12 साल में प्रवेश करते हुए कहा हम लोग इसे लगातार चलाते रहेंगे इस से गृहस्थ जीवन का आंनद प्राप्त होता साथ ही इस मिथिला क्षेत्र में धन धान्य समृद्धि भगवान सीता राम के कृपा प्राप्त होता रहेगा
मिथिला परिक्रमा भारत नेपाल के मैत्री सम्बन्ध के साथ साथ संत गृहस्थ आश्रम महिला पुरूष के सम्बन्ध को धार्मिक भावनाओं से जोड़कर आगे बढ़ा कर चल रहा है ,लेकिन परिक्रमा के इस ऐतिहासिक महत्व को दोनों देश को राष्ट्रीय महत्त्व के मानना चाहिए क्योंकि राम सीता का संबद्ध ही भारत नेपाल का संबद्ध से हैं जिसमे अभी अयोध्या के राम मन्दिर सीता जी का जानकी मंदिर में के साथ अयोध्या में नेपाल के गंडकी नदी से शालिग्राम शीला का मूर्ती बनने वाली हैं ,कुल मिलाके इस परिक्रमा का महत्त्व सदियों से चली आ रही परम्परा बढ़ गया है ,इस धार्मिक स्थल को पर्यटक के रूप मे मानने की आवश्यकता है।


