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रंग अबीर का त्योहार होली की हार्दिक शुभकामनाएं

 

काठमांडू, २२ फागुन

 

होली रंग अबीर का त्योहार , होली मस्ती का त्योहार , होली सबकुछ भूलाकर रंगों में मिल जाने का त्योहार और होली गिले शिकवों का भूलाकर गले मिलने का त्योहार । एक होली ही ऐसा त्योहार जहाँ जिसे क्या बच्चें क्या बुढ़े, क्या महिला और क्या पुरुष सभी मनाते हैं ।
होली यानी फागुन मास । फागुन मास मदमस्त मास कह ले । बहुतो का प्रिय मास । होली रंग अबीर का त्योहार , होली मस्ती का त्योहार , होली सबकुछ भूलाकर रंगों में मिल जाने का त्योहार और होली गिले शिकवों का भूलाकर गले मिलने का त्योहार । एक होली ही ऐसा त्योहार जहाँ जिसे क्या बच्चें क्या बुढ़े, क्या महिला और क्या पुरुष सभी मनाते हैं ।
होली एक ऐसा रंगबिरंगा त्योहार है, जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं । प्यार भरे रंगों से सजा यह पर्व हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन खोलकर भाई–चारे का संदेश देता है । इस दिन सारे लोग अपने पुराने गिले–शिकवे भूल कर गले लगते हैं और एक दूजे को गुलाल लगाते हैं। बच्चे और युवा रंगों से खेलते हैं। फाल्गुन मास के पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है । होली के साथ अनेक कथाएं जुड़ीं हैं । होली मनाने के एक रात पहले होली को जलाया जाता है । इसके पीछे एक लोकप्रिय पौराणिक कथा है।
कहते हैं हिरण्य कश्यप नाम के एक दुष्ट भाई की एक द्ष्ट बहन थी होलिका जो अपने भाई के पुत्र प्रह्लाद को अपने गोद में बिठा कर जलाना चाहती थी। प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे जिन्होंने होलिका के आग से प्रह्लाद को बचाया और उसी आग में होलिका को राख कर दिया। तभी से हिन्दू धर्म के लोग शैतानी शक्ति के खिलाफ अच्छाई के विजय के रुप में हर साल होली का त्योहार मनाते हैं । रंगों के इस उत्सव में सभी एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर दिन भर होली का जश्न मनाते है ।
लेकिन अब होली पहले की तरह नहीं होती है । समय के साथ उसमें भी परिवत्र्तन आया है । पहले लोग नाचते, जोगिरा गाते, बजाते, एक मोह्लले से दूसरे मोहल्ले जाते । बुरा न मानो होली कहकर रंग डालेते और सामने वाला निहाल हो जाता । मगर अब बहुत सी बातों पर पाबंदी । सबसे पहले तो अब रंग लोग नहीं खेलते हैं । पानी खेलते हैं । ये बड़े शहरों में होता है । जहाँ पानी को लेकर बहुत सी बातें सोचते हैं लोग । बहुत विकृति आ गई है । लोग शराब पी लेते हैं । अश्लील गीत बजाने लगते हैं । सच कहें तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है अब होली में । तो सरकार ने भी कुछ पाबंदियां लगा रखी है होली को लेकर । सरकार ने सख्त हिदायतें दी हैं कि लोग एक दूसरे पर रंग नहीं डाल सकते हैं । लोला का प्रयोग नहीं करेंगे । हलांकी जब करना होता तब लोग इक्का दुक्का लोला मार ही देते हैं ।
वैसे तो पीने पिलाने की बात अच्छी नहीं होती है इससे सभी परेशान हो जाते हैं । इसलिए अच्छे तरीके से होली का त्योहार मनाएं । काठमांडू में आज होली मनाई जा रही है तो तराई में कल । जनकपुर में हमेशा से परिक्रमा होती आई है । होली के १५ दिन पहले से परिक्रमा की जाती है जो इसबार मंगलवार को खत्म होगी तो वहाँ बुधवार को होली मनाई जाएगी । जैसे विविधताओं से भरा है रंग अबीर , गुलाल वैसे ही हमार देश भी ।

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हिमालिनी परिवार की ओर से आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

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