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वल्र्ड ऑफ वंडर्स, बीरगंज : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

 

 

मुरलीमनोहर तिवारी, हिमालिन अंक मार्च । ‘नेपाल का प्रवेश द्वार’ बीरगंज, जो भारतीय राज्य बिहार की सीमा के पास स्थित है । यह भारतीय माल व्यापार के लिए प्रवेश का एक प्रमुख बिंदु है । बीरगंज, मधेश प्रदेश का सबसे बड़ा शहर और नेपाल का छठा सबसे अधिक आबादी वाला महानगर है ।

यह नेपाल की राजधानी काठमांडू से १३५ किलोमीटर दक्षिण में स्थित है, जो रक्सौल के उत्तर में स्थित है, हालांकि पर्यटक यात्रा कार्यक्रम पर अक्सर यह गंतव्य नहीं होता है, यह अक्सर नेपाल में अन्नपूर्णा बेस कैंप और नेपाल के आसपास के पहाड़ों को ट्रेक करने वाले लोगों के लिए एक लोकप्रिय पड़ाव है । बीरगंज में घूमने के स्थान के नाम पर घडि़यरवा पोखरी, परंपरा और पूजा के लिए गहवा माई, विन्ध्वासिनी माई, गढ़ी माई का मंदिर और भगवान बुद्ध का स्तूप प्रमुख है । देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले बिरगंज को प्रदेश की राजधानी नही बनाया गया जिसका बुरा असर बिरगंज पर पड़ा । यहाँ के होटल पर्यटकों के अभाव में खाली पड़े है, उद्योग–व्यापार मंदी की चपेट में है । इन समस्याओं से निपटने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार से कोई विशेष कÞदम तो नही उठाए गए, लेकिन बिरगंज के कुछ युवाओ द्वारा कुछ नवीन और सार्थक कदम उठाए गए ।

ऐसे ही एक युवा हेमंत बैद ने पर्यटन के बढ़ावे के लिए वल्र्ड ऑफ वंडर्स, एडवेंचर पार्क का निर्माण कराया । जहां आप अपना स्ट्रेस भुलाकर अच्छे से वीकेंड मना सकते हैं । यह एडवेंचर से भरा पड़ा है, जहां आपको एक से एक मजेदार राइड्स देखने को मिल जाएंगे । बच्चों से लेकर बड़ों तक हर उम्र के लोग इस जगह पर दिन अच्छे से बिताकर जाते हैं ।

हेमन्त बैद बताते है कि ‘पिछले कुछ वर्षों में, साहसिक खेलों की लोकप्रियता शहरी क्षेत्रों में काफी बढ़ी है, और इसे मनोरंजन से अधिक देखा जा रहा है । अगर आप साहसिक खेल खेलने का शौक रखते हैं तो वल्र्ड ऑफ वंडर्स के एडवेंचर पार्क आपके लिए ही है । यदि मनोरंजन के पारंपरिक और रूढि़वादी अनुभव को बदलना चाहते है, तो वल्र्ड ऑफ वंडर्स इस धारणा को फिर से परिभाषित करेगा ।’ वे कहते हैं, ‘वल्र्ड ऑफ वंडर्स का मकसद लोगों को प्रकृति और असली दुनिया के करीब ले जाना है यानी जब लोग यहां आएंगे तो उन्हें यह अनुभव ही नहीं होगा कि वे अपने शहर में हैं, बल्कि उन्हें एक खास जगह का अहसास होगा ।’ ‘यहां पर पर्यटकों के लिए एडवेंचर रिक्रिएट किया गया है, जिससे लोग ऐसे परिवेश का लुत्फ ले सकेंगे । बहुत सारे उपलब्ध पाक विकल्पों पर संतोषजनक लंच या डिनर की ओर जा सकते हैं ।’
बिरगंज और पर्यटन के बढ़ावे के लिए वल्र्ड ऑफ वंडर्स, एडवेंचर पार्क ही क्यों ? हेमंत वैद कहते है कि ‘वल्र्ड ऑफ वंडर्स का उद्देश्य सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देना मात्र नही है, इससे बच्चों के सम्पूर्ण विकास, पूरे परिवार के लिए स्वास्थ्यप्रद होने के साथ–साथ युवाओ के लिए रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है ।’

‘चाइल्ड इजÞ द फादर ऑफ मैन’ यानी एक बच्चे के मन के भीतर एक पूरा का पूरा इंसान छिपा होता है । यदि हम एक शांत व विकासशील समाज की चाह रखते हैं, तो बच्चों के मन को अशांत होने से बचाना भी हमारी जिÞम्मेदारी बन जाती है । बच्चों से जुड़ी कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं हैं, जैसे– एकेडैमिक मेंटल प्रॉब्लम, फिजिÞकल मेंटल प्रॉब्लम, शरीर में कोई कमी, एकाग्र न होना, चिड़चिड़ापन आदि । यदि मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें, तो आज बच्चों में मिक्स प्रॉब्लम्स यानी मेंटल, एकेडैमिक, सायकोलॉजिकल, फिजिÞकल– सभी का मिला–जुला रूप है ।

पढ़ाई को लेकर बच्चों को होनेवाली समस्याओं, जैसे– तनाव, डर, असफलता की ग्लानि÷आत्महत्या की प्रवृत्ति खÞासतौर पर अपने पैरेंट्स और टीचर्स की अपेक्षाओं को पूरा करने की कशमकश । १०% से २०% बच्चे कम्पटीशन के चलते इतना ज्यादा पढ़ते हैं कि उनकी सोशल लाइफ जÞीरो हो जाती है । इस तरह के बच्चे हमेशा टेंशन में रहते हैं । अपने परफॉर्मेंस को लेकर, खÞासकर जो बच्चा कई सालों से फस्र्ट आ रहा हो, तो उस पर इसे मेंटेन करने का दबाव बना रहता है ।

जो बच्चे पढ़ने में कमजÞोर होते हैं, उन्हें पैरेंट्स के ताने–उलाहने सुनने पड़ते हैं, जिससे वे तनाव और हीनभावना से भी ग्रस्त हो जाते हैं । हो सकता है बच्चे को लर्निंग डिसएबिलिटी की समस्या हो या फिर एडीएचडी (अटेंशन डिफिट हायपरएक्टविटी डिसऑर्डर) या एडीडी (अटेंशन डिफिट डिसऑर्डर) की समस्या हो । ऑटिजÞ्म बीमारी भी दिमागÞी तंत्र से जुड़ी है । इससे ग्रस्त बच्चे का संवेदी तंत्र अव्यवस्थित होता है, जिससे वो सामान्य बच्चों की तरह नहीं रहता । एसपर्जर, यह ऑटिजÞ्म का ही माइनर प्रॉब्लम है । इसमें बच्चा आई कॉन्टेक्ट कम रखता है, कम बोलता व सुनता है । केवल हां–ना में ही अधिक बात करता है ।

आज बच्चों के बीच बिहेवियर इश्यू सबसे बड़ी मनोवैज्ञानिक समस्या बन गई है । बच्चों के लिए आक्रामक व्यवहार उनकी इच्छापूर्ति का साधन होता है । उनमें धैर्य की कमी होती है । हाइपर चाइल्ड है, तो हर रोजÞ घर से बाहर, बगीचे या खेल के मैदान में ले जाएं । एडवेंचर पार्क में ले जाए जहां वह पूरी आजÞादी से खेल सके, भागदौड़ सके ।

जिÞद करना, झूठ बोलना, डरपोक और दब्बू होना अक्सर पैरेंट्स द्वारा बचपन में बच्चों को भूत–अंधेरे आदि का डर दिखाया जाता है ये सभी बातें उनके अंतर्मन में कहीं न कहीं गहराई तक पैठ जाती हैं । वे नहीं जानते कि ऐसा करके जाने–अनजाने में वे अपने बच्चे का आत्मविश्वास कमजÞोर कर रहे हैं । पैरेंट्स बच्चों के साथ एडवेंचर्स से भरपूर गेम्स खेलें ।
चोरी करना या चीजÞों को बिना बताए उठाना, चीजÞों को बिना पूछे उठा लेना यानी अप्रत्यक्ष रूप से चोरी करना आदि । कई बच्चे अनजाने में ऐसा करते हैं । इसे क्लेटो मेनिया कहते हैं । इसमें जÞरूरी नहीं कि बच्चा कÞीमती चीजÞें ही उठाए, वो ढेर सारे पेन–पेंसिल आदि भी उठा सकता है ।

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आईएमसी लेडीजÞ विंग की प्रेसिडेंट लीना वैद्य का मानना है कि आज के दौर में बच्चे असुरक्षित माहौल, जिÞंदगी से अधिक महत्वाकाक्षांओं की उड़ान, थकान, तनाव आदि के साथ पल–बढ़ रहे हैं । नए–नए वीडियो गेम्स, प्ले स्टेशन ने उनकी आउटडोर एक्टिविटीÞजÞ, आउटडोर गेम्स आदि को भी कम कर दिया है । उस पर पढ़ाई व उनके पर्सनैलिटी से जुड़े अलग–अलग क्लासेस में भी वे उलझे रहते हैं । ऐसे में बच्चे सहजता से जीना नहीं सीख पाते, बल्कि हर समय प्रतिद्वंद्विता, पाने और आगे बढ़ने की होड़ के लिए ट्रेन्ड होते रहते हैं । इन सभी से बच्चे के अधिक दोस्त नहीं बन पाते और वे अकेलेपन से जूझते रहते हैं । इस तरह मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें, तो ऐसे बच्चे दूसरों के साथ सहनशील होना और सामंजस्य बैठाना नहीं सीख पाते हैं । यदि पैरेंट्स अपने एटिट्यूड में थोड़ा–सा बदलाव लाएं, तो इसमें कापÞmी मदद मिल सकती है । पैरेंट्स अपने बच्चे की अन्य बच्चे से तुलना करने की बजाय उसमें मौजूद गुणों को प्रोत्साहित करें, बिना शर्त अपना प्यार–स्नेह लुटाएं, तो यकÞीनन बच्चे आत्मविश्सी बनेंगे और जिÞंदगी की हर चुनौती का डटकर सामना करेंगे । साथ ही फिजिÞकली, मेंटली और इमोशनली खÞुशमिजÞाज इंसान भी बन सकेंगे ।

इसके अलावा स्मार्ट फÞोन के हानिकारक प्रभाव है जैसे आँखों में जलन, बाधित नींद पैटर्न, मानसिक स्वास्थ्य पर असर, डिप्रेशन । नए अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि स्मार्टफोन के साथ बिताया गया एक घंटा बच्चों में अवसाद और चिंता के बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । ब्रिटिश साइकोलॉजिकल सोसाइटी के अनुसार, सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले बच्चों और किशोरों में कम आत्मसम्मान, चिंता, अवसाद और खराब गुणवत्ता वाली नींद होती है ।

कई शोधकर्ताओं ने पुष्टि की है कि स्मार्टफोन बच्चों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए हानिकारक हैं क्योंकि इसके इस्तेमाल से बच्चे का ध्यान भटक जाता है । अधिक विशिष्ट होने के लिए, स्मार्टफोन जैसे हाथ से पकड़े जाने वाले उपकरणों पर इंटरैक्टिव स्क्रीन टाइम का उपयोग भी बच्चों के शोध के निष्कर्षों के अनुसार गणित और विज्ञान सीखने के लिए आवश्यक कौशल के विकास को बाधित करता है ।
दूसरी ओर, स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग आपके बच्चे के संपूर्ण स्वास्थ्य और विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है । स्मार्टफोन से निकलने वाली नीली रोशनी और रेडिएशन बच्चों की आंखों और दिमाग दोनों के लिए हानिकारक है और इसमें उनकी आंखों को नुकसान पहुंचाने और उनकी विचार प्रक्रिया को भी बदलने की क्षमता होती है । जैसा कि कई अध्ययनों से पता चला है कि स्क्रीन टाइम की अत्यधिक मात्रा ग्रे मैटर एट्रोफी के कारण मस्तिष्क की संरचना को नुकसान पहुंचाती है, कॉर्टिकल मोटाई को कम करती है, सफेद पदार्थ की अखंडता से समझौता करती है, संज्ञानात्मक कार्य को बिगाड़ती है और डोपामाइन के कार्य को कमजोर करती है । बच्चों को मोबाइल से दूर रखने का सबसे अच्छउपाय है कि उन्हें आउटडोर गेम या एक्टिविटी में इंवॉल्व करें । आप उन्हें बाहर खेलने, साइकिल चलाने, गार्डनिंग, आदि के लिए भी मोटिवेट कर सकते हैं । वास्तव में, साहसिक खेलों से एड्रेनालाईन रश देने के अलावा कई फायदे हैं । यह फोबिया से लड़ने में मदद करता है । प्रत्येक मनुष्य के भीतर कुछ फÞोबिया होते हैं, ाहे वह ज्ञात हो या अज्ञात । ऊांई, पानी, गिरना आदि कुछ सबसे आम फÞोबिया हैं । साहसिक खेलों में भाग लेना इन आशंकाओं से निपटने और उन पर काबू पाने का एक बढि़या विकल्प है । स्वूप स्विंग, फ्लाइंग फॉक्स और स्काई साइकलिंग जैसी गतिविधियां एक्रोफोबिया को मात देने के लिए उपयुक्त हैं । अन्य साहसिक खेल जैसे रैपलिंग, हाई रोप ैलेंज, वॉटर जÞोरबिंग आदि विभिन्न अन्य आशंकाओं पर काबू पाने में मदद करते हैं ।

जब तक आप रम मार्ग नहीं अपनाते, तब तक आपको अपनी वास्तविक क्षमता का पता नहीं लेगा और साहसिक खेल इसी के बारे में हैं । सीमाओं की बाधाओं को तोड़ दें, और अपने आप को खोजने दें कि वास्तव में आपके भीतर क्या है । आप कितनी दूर जा सकते हैं, यह जानने के लिए सीमाओं को धक्का दें और किनारे पर रहें । डर्ट बाइक, एटीवी, रॉकेट इजेक्टर, लैंड जÞोरबिंग, कुछ सबसे रोमांकारी गतिविधियाँ हैं जो आपको मानसिक और शारीरिक रूप से अपनी वास्तविक क्षमता का पता लगाने में मदद करेंगी ।

साहसिक खेल आपके दिमाग पर सुखदायक प्रभाव के साथ तनाव दूर करने वाले सिद्ध होते हैं । हर बार जब आप रॉकेट इजेक्टर से हवा में उड़ते हैं, या उस डर्ट बाइक के थ्रोटल को बजाते हैं, या बस हवा में झूलते रहते हैं, तो एड्रेनालाईन की भीड़ बिल्कुल जगमगाती है और आपको अपनी छोटी या बड़ी सभी ंिताओं को भूल जाती है, और हर पल आनंद देती है । यह आपके सभी तनावों को दूर करता है, और जीवन नामक सबसे बड़े खेल से ुनौतियों का सामना करने के लिए आपके दिमाग को फिर से जीवंत करता है । शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है । साहसिक खेल आमतौर पर शारीरिक रूप से काफी मांग वाले होते हैं, उन लंबे जिम सत्रों की तुलना में अधिक कैलोरी खाते हैं । रॉक क्लाइम्बिंग, रैपलिंग, रोप ैलेंज आदि जैसी गतिविधियाँ नियमित रूप से करने से आपको एक स्वस्थ काया बनाए रखने में मदद मिलती है, जो बहुत सारी बीमारियों को रोकने में महत्वपूर्ण है । अछा स्वास्थ्य एक स्वस्थ जीवन शैली और समग्र कल्याण की कुंजी है । इसके अलावा, एक स्वस्थ शरीर पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है ।
लगभग हर साहसिक खेल के लिए शारीरिक जितनी मानसिक शक्ति की आवश्यकता होती है । प्रत्येक गतिविधि में प्रतिभागी को ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है, और बाधाओं से निपटने के लिए सहज रणनीति होती है । पेंटबॉल, उदाहरण के लिए, एक शुद्ध रणनीति आधारित खेल है जिसमें बहुत अधिक मानसिक उत्तेजना की आवश्यकता होती है । इसी तरह, राइफल शूटिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, तीरंदाजी, डर्ट बाइक जैसे खेल, जिनमें एड्रेनालाईन की मात्रा अधिक होती है, पर अत्यधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है । इसलिए नियमित रूप से साहसिक खेलों को करने से आपका मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है ।

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कई साहसिक खेल टीम वर्क और समन्वय के बारे में हैं । पेंटबॉल, लो रोप ैलेंज, डेला गायरो, बबल सॉकर आदि जैसी टीम गतिविधियां दोस्तों और परिवारों के बी एक बंधन विकसित करने के लिए बढÞिया विकल्प हैं । इसके अलावा, डर्ट बाइक, पेंटबॉल, बग्गी राइड्स, एटीवी आदि जैसे अत्यधिक साहसिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने से प्रतिभागियों के बी आपसी सम्मान और बंधन की भावना पैदा होती है ।
हो सकता है कि आपके बे को क्रिकेट, बैडमिंटन या बास्ेटबॉल जैसे पारंपरिक खेलों में बिल्ुल भी रूी ना हो । लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उसे खेल में ही रूची नहीं है । हो सकता है कि उसे साहसिक यानी की एडवेंचर खेलों में ज्यादा रूचि हो । रॉक क्लाइम्बिंग, ट्रैकिंग, बंजी जंपिंग, नदी पार और रैपलिंग जैसी साहसिक गतिविधियां आपका बच्चा कर सकता है क्योंकि यह सेफ होते हैं ।
ऐसे कई ऐसे संगठन हैं जो बचें के लिये ऐसे खेलों का आयोजन करते हैं । साथ ही यदि आपके बच्चों को पढाई से छुट्टी नहीं मिलती तो आप उसे गर्मियों की छुट्टियों में ऐसे खेल खिलवाने का मौका दे सकते हैं । यदि आपका बच्चा अकेले ना जाना चाहे तो उसके दोस्तों को भी ऐसे एडवेंचर खेलों में भाग लेने को प्रोत्साहित करें । आप चाहें तो आप भी बच्चों की सेफ्टी के लिये वहां पर जा सकते हैं । हर मां–बाप को यह समझना जरूरी है कि बच्चे का शारीरिक और दिमागी विकास तभी होगा जब वे बाहर जा कर खेल खेलेंगे ना कि घर में रह कर वीडियों गेम । कुछ ऐसे रोचक और साहसिक खेल जिसे खेल कर आपके बच्चे में कॉफिन्डेन्स पैदा होगा और वे साहसिक बनेंगे ।

एडल्ट राइड्स ः एडवेंचर राइड्स की रोमांचकारी सवारी और आकर्षण आपके पूरे परिवार का घंटों मनोरंजन करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे । ‘जेड–फोर्स’, घुमावदार ‘साइड विंडर’, और ‘स्काई राइडर्स’, आकाश को छू जाने वाली और दिल थाम देने वाली राइड्स हैं । ‘क्लाइम्बिंग वॉल’ और ‘वाइल्ड व्हील’ के साथ भी आप राइड्स का मजा ले सकते हैं ।

वाटर राइड्स ः कुछ नर्वस रैंकिंग राइड्स के बाद, अपने परिवार और दोस्तों के साथ वाटर राइड्स की ये लिस्ट आपको जोश से भर देंगी । मस्ती करने के बाद आराम करने के लिए ‘स्पलैश पूल’ जा सकते हैं ।
रॉकिंग ः यह बहुत ही मजेदार स्ेट्स है जिसमें बच्चे का दिमागी और शारीरिक रूप से विकास होता है । लेकिन माता–पिता होने के नाते आपको बच्चे की सेफ्टी का भी ध्यान रखना होगा और यह भी देखना होगा कि ट्रेनिंग सेशन किसी बडेÞ द्वारा ही करवाया जा रहा हो । ट्रैकिंग आप चाहें तो अपने बच्चे को आधे दिन या फिर पूरी रात के लिये ट्रैकिंग कैंप पर भेज सकते हैं । ट्रैकिंग ना केवल घूमने के लिये ही होता है बल्कि इसमें बच्चे को प्रकृति के बारे में भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है । कई संगठन ऐसे भी होते हैं जो बच्ें को उनके पेरेंट्स के साथ बुलाती है ।

नदी पार ः यह एक फन गतिविधि है जिसे बच्चे खूब पसंद करते हैं । रस्सी को नदी के दोनों ओर बांध दिया जाता है और फिर उसे पकड़ कर नदी को पार करना होता है ।
रैपलिंग ः इस स्पोर्ट्स में रस्सी को किसी ऊंची चीज से बांध दिया जाता है और उसे पकड़ कर आपको ऊपर पहुंचना होता है । पर एडवेंचर क्लब बच्चों के लिये बाहर की जगह ना चुन कर अंदर ही इसका इंतजाम करवाते हैं । यदि आपके बच्चे को रॉक या वॉल क्लाइम्बिंग करना अच्छा लगता है तो उसे रैपलिंग भी अच्छा लगेगा ।

बंजी जम्पिंग ः यह बहुत ही साहसिक खेल है जो बच्चों को करना अच्छा लग सकता है । आपका बच्चा घर में भी इसे ट्रैम्पोलाइन पर कर सकता है ।
स्काई साइकिलिंग ः स्काई साइकिलिंग रोमांच से भर देने वाली एक बेहद शानदार एक्टिविटी है । लेकिन ऊंचाई पर एक रस्सी के सहारे साइकिलिंग करने के लिए मजबूत कलेजा चाहिए । यही कारण है कि ज्यादातर एडवेंचर एक्सप्लोरर इस एक्टविटी से दूर ही रहना पसंद करते हैं । लेकिन ये पूरी तरह सुरक्षित है ।
बंजी रन ः अब ये स्पोर्ट काफी फेमस हो गया है । यदि आपको ऊंचाइयों से डर लगता है तो बात कुछ और है, लेकिन अगर ऐसी कोई समस्या नहीं तो यकीनन बंजी रन कीजिए । ये किसी भी उम्र में की जा सकती है ।
व्हाइट वाटर राफ्टिंग ः पानी से डर हो या नहीं हो इसे कई लोग ट्राई करते हैं । आप भी इसे ट्राई कर सकती हैं । किसी भी उम्र में इसे ट्राई किया जा सकता है और यकीनन इसे आजमाते समय ये ध्यान रखें कि आपने किसी अच्छे स्पोर्ट सेंटर से ही करें जहां सुरक्षा से सारे इंतजाम हों ।
ट्रेकिंग ः भले ही घुटनों में दर्द हो, लेकिन थोड़ी हिम्मत कर किसी एक अच्छे ट्रेक पर जरूर जाएं । ये ताजगी का अनुभव देगा और साथ ही साथ नई चीजें एक्सप्लोर करने को देगा । जंगल से लेकर पहाड़ तक सभी जगह ट्रेकिंग की जा सकती है ।

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स्कूबा डाइविंग ः स्कूबा डाइविंग करने की कोई उम्र नहीं होती । भले ही आपको तैरना आता है या नहीं फिर भी आप स्कूबा डाइविंग कर सकते हैं । इसके लिए बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है । समुद्र में तैरती हुई मछलियों के साथ तैरना एक अलग ही अनुभव होगा

वल्र्ड ऑफ वंडर्स में प्रदान की जाने वाली सुविधाएं

यहां पर साहसिक गतिविधिया ः रॉक क्लाइम्बिंग वाल (च्इऋप् ऋीक्ष्ःद्यक्ष्ल्न् ध्ब्ीी), नेट क्लाइम्बिंग (ल्भ्त् ऋीक्ष्ःद्यक्ष्ल्न्), मैजिक वाल क्लाइम्बिंग (ःब्न्क्ष्ऋ ध्ब्ीी ऋीक्ष्ःद्यक्ष्ल्न्), टायर क्लाइम्बिंग (त्थ्च्भ् ऋीक्ष्ःद्यक्ष्ल्न्), रापेलिंग (च्ब्एएभ्ीीक्ष्ल्न्), सलिथेरिंग (क्ीक्ष्त्ज्भ्च्क्ष्ल्न्), पारा जम्प (एब्च्ब् व्ग्ःए), मल्टीलेवल रोप कोर्स (ःग्ीत्क्ष् ीभ्ख्भ्ी च्इएभ् ऋइग्च्क्भ्), स्काई साईकल सोलो (क्प्थ् ऋथ्ऋीभ् क्इीइ), स्काई साईकल टैंडेम (क्प्थ् ऋथ्ऋीभ् त्ब्ल्म्भ्ः), जिÞपलाइन (श्क्ष्एीक्ष्ल्भ्), सुपरमैन जिÞपलाइन (क्ग्एभ्च्ःब्ल् श्क्ष्एीक्ष्ल्भ्)
मनोरंजक गतिविधिया ः पेण्डुलम राइड (एभ्ल्म्ग्ीग्ः च्क्ष्म्भ्), पेडल बोट (एब्म्म्ीभ् द्यइब्त्), बुल राइड (द्यग्ीी च्क्ष्म्भ्), नॉकआउट (प्ल्इऋप् इग्त्), ह्यूमन गयरो (ज्ग्ःब्ल् न्थ्च्इ), बंजी रन (द्यग्ल्न्भ्भ् च्ग्ल्), कोलम्बस राइड (ऋइीग्ःद्यग्क् च्क्ष्म्भ्), सन एंड मून राइड (क्ग्ल् ब्ल्म् ःइइल् च्क्ष्म्भ्)
खेलकूद गतिविधियां ः पÞmुटसल ९ँग्त्क्ब्ी), वॉलीबॉल (ख्इीीभ्थ्द्यब्ीी), लॉन टेनिस (ीब्ध्ल् त्भ्ल्ल्क्ष्क्), क्रिकेट (ऋच्क्ष्ऋप्भ्त्), स्नूकर (क्ल्इइप्भ्च्), पुल (एइइी)

इसके साथ–साथ एक समूह में स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए विशेष पैकेज । विभिन्न अवसरों के लिए हरे लॉन की समूह बुकिंग की अनुमति है । ध्वनि, संगीत और अन्य सुविधाओं के साथ कॉर्पोरेट के लिए बुकिंग । जन्मदिन की पार्टी भी उपहार, सरप्राइज और मजेदार खेलों के साथ आयोजित की गई ।

सुरक्षा और रोजगार के सवाल पर हेमन्त बैद बताते है कि ‘इस क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स एक्सपर्ट या एडवेंचर स्पोर्ट्स ट्रेनर के तौर पर काफी संभावनाएं हैं, हमारे सारे लोग पूर्णतः प्रशिक्षित है और हमारे सारे सेटअप सुरक्षा के सारे मापदंड के अनुसार बने हुए है ।’

पिछले कुछ वर्षों में नेपाल दुनिया में टूरिस्ट हब के तौर पर उभर रहा है । इसकी वजह है नेपाल का विकसित देशों के मुकाबले सस्ता होना और यहां मौजूद प्राकृतिक विविधता । इसके अलावा नेपाल धार्मिक और स्वास्थ्य पर्यटन के लिए भी पसंदीदा जगह बनता जा रहा है । स्वास्थ्य लाभ के साथ लोग मानसिक शांति तलाशने के लिए भी नेपाल का रुख करते हैं । यहां के छोटे शहरों में खुलते मॉल, आसानी से उपलब्ध चीजें, शांतिप्रिय वातावरण और पश्चिम से अलग संस्कृति व जीवनशैली भी विदेशियों को आकर्षित करती है । स्पोर्ट्स एडवेंचर नेपाल की टूरिज्म इंडस्ट्री का अहम हिस्सा बन गए हैं ।
एडवेंचर स्पोर्ट्स में प्रशिक्षित व्यक्तियों के लिए कई क्षेत्रों में जाने के तमाम मौके होते हैं । इनके अलावा केंद्र और विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों में भी काम करने के अवसर मिलते हैं । ये संस्थान समय–समय पर अभियान आयोजित करते हैं । इनमें भी भाग लिया जा सकता है । नेपाल में कई छोटी–बड़ी गैर सरकारी संस्थाएं भी हैं, जो एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में काम कर रही हैं । ये ट्रेकिंग अभियानों, जंगल सफारी, पर्वतारोहण अभियानों आदि के लिए साल भर प्रोग्राम आयोजित करती रहती हैं । पर्यटन के लिए अलग–अलग समय मुफीद रहता है ।

इस वजह से साल भर काम मिलता रहता है । इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोग किसी हॉलीडे रिसोर्ट, कैंप, कमर्शियल रिक्रिएशन सेंटर, एथलेटिक क्लब आदि आदि से जुड़कर न सिर्फ इन स्पोर्ट्स का प्रचार कर सकते हैं, बल्कि लोगों को प्रशिक्षण देकर भी पैसे कमा सकते हैं ।

एक प्रोफेशनल एडवेंचर स्पेशलिस्ट बनने के लिए सबसे पहले आपके भीतर इस क्षेत्र के प्रति लगाव होना जरूरी है । इसके अलावा आपके मन में नई जगहों पर जाने, नई चीजें एक्सप्लोर करने, सूझ–बूझ और सीखने–सिखाने में रुचि होना जरूरी है । किसी अच्छे संस्थान में ट्रेनिंग लेना भी जरूरी है । यह ऐसा क्षेत्र है, जिसमें निपुण न होने पर आप अपने प्रोफेशन और दूसरों के साथ अन्याय तो करेंगे ही, उनके लिए खतरा भी पैदा कर सकते हैं । एक अच्छे एडवेंचर स्पोर्ट्स ट्रेनर को इलाके की अच्छी भौगोलिक जानकारी होनी चाहिए । साथ ही उसमें वेदर ऑब्जरवेशन स्किल्स भी होनी चाहिए, ताकि किसी भी विपरीत मौसम के प्रति वह समय रहते सचेत हो जाए । इन सबके साथ ही उसमें लीडरशिप का गुण भी होना जरूरी है । जरूरत पड़ने पर, किसी आपात स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है ।
भारत में इस कोर्स के लिए कम से कम १२वीं तक की पढ़ाई जरूरी है । आवेदक की उम्र १० से ४० साल के बीच होनी चाहिए । वॉटर स्पोर्ट्स के लिए तैराकी आना जरूरी है । किसी एक विदेशी भाषा का ज्ञान भी जरूरी है क्योंकि इससे इस क्षेत्र में काफी फायदा होता है । इसके प्रमुख संस्थान – नेहरू माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट उत्तरकाशी, हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट दार्जिलिंग, राष्ट्रीय जलक्रीड़ा संस्थान पणजी, जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग पहलगाम, हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट मसूरी, भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन नई दिल्ली, लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षण संस्थान ग्वालियर ।

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

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