Sat. Jul 11th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

सारा आकाश समेटो अपनी मुठ्ठी में, जो भी हो लेकर उसको जीना सीखो : डा राणा

 

सारा आकाश

डा कृष्णजंग राणा

सारा आकाश समेटो
अपनी मुठ्ठी में जो भी हो,
लेकर उसको जीना सीखो
उन्मुक्त हँसी हँसकर जग में,
पाना सीखो, खोना सीखो ।।

शैशव की किलकल बीत गई,
जैसे झरनों की फुहारें ।
बचपन का भोलापन बीता,
कैसी चिंता कैसी हारें ।
बिन जाने खुशियाँ जग भर की,
हमने बटोर कर रख ली थी ।
तब किसने सोचा क्या होगा,
फिर क्या होगा अब मत सोचो ।।

यह भी पढें   सुकुम्बासी के विषय को लेकर सांसदों ने की सरकार की आलोचना

यौवन का जोश भरा जीवन,
जैसे बिजली की थी कड़कन ।
सारे दुनिया को जैसे कि,
झकझोर दिया हो रे जबरन ।
कैसा आगा कैसा पीछा
कैसी चिंता कैसा चिंतन ।
वो पर्वत जैसा हिम्मत अब,
तुम मत तोड़ो, तुम मत छोड़ो ।।

तेरे इस ढलते जीवन में,
शैशव की किलकन बाकी है ।
बचपन की खुशियां बाकी है,
यौवन का हिम्मत बाकी है ।
फिर ऐसे सुखमय जीवन में,
कैसी चिंता कैसी हारें ।
सारा आकाश समेटे तुम,
सारी खुशियाँ पाना सीखो ।।

यह भी पढें   इजिप्ट ने दर्ज की शिकायत

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *