मानसखण्ड में टेम्पल इकोनमी –सुदूरपश्चिम के संबृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कड़ी
काठमांडू, ७ वैशाख –
अंग्रजी में एक शब्द है – टेम्पल–इकोनमी । इस शब्द को अगर सीधे अनुवाद करे तो बहुत कठीन है । लेकिन इसको मन्दिर के माध्यम से, अर्थतन्त्र को सबल बनाना के हिसाब से लिया जाए तो आने वाले समय में यह बहुत ही सार्थक साबित होगा दो देश के लिए अर्थात् नेपाल तथा भारत के लिए । इसी टेम्पल–इकोनमी के राह पर चलने की तैयारी कर रहा है – नेपाल का सुदूुर पश्चिम और भारत का उत्तराखण्ड प्रदेश ।
अपने ही देश में बेगाने बने नेपाल का सुदूर पश्चिम प्रदेश और भारत का उत्तराखण्ड अब आत्मनिर्भर बनने को आतुर है जिसका परिणाम है – मानसखण्ड सम्मेलन । नेपाल अध्ययन केन्द्र,नेपाल नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान एवं सुदूर पश्चिम विश्वविद्यालय द्वारा सुदूर पश्चिम प्रदेश के राजधानी धनगढ़ी में आयोजित तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में नेपाल और भारत के विद्वतवर्ग ने बड़ी गहन चर्चा की इस विषय पर । टेम्पल–इकोनमी योजना से मानसखण्ड में रहे धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृति धरोहर की संरक्षण एवं संबद्र्धन, इस क्षेत्र के लोगो में सांस्कृतिक जागरण के साथ दोनो देशों के संबन्ध और भी सुमधुर हो इस बात की अपेक्षा की गई है ।
वास्तव में नेपाल के सुदुर पश्चिम प्रदेश और भारत के उत्तराखण्ड प्राकृतिक स्रोत एवं सम्पदा का भण्डार है । भारत के उत्तराखण्ड सरकार ने अपनी जनता के लिए विकास का कुछ पूर्वधार तो निर्माण किया है लेकिन अगर नेपाल की बात की जाए तो स्थिति नाजुक है । सुदूर पश्चिम की सौन्दर्य हो या सम्पदा दोनों प्रयोग में असफल है, स्थानीय, प्रदेश और संघीय सरकार । जिसके कारण इस क्षेत्र में गरीबी, बेराजगारी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य सुविधा नाम मात्र की है । १९ हजार नौ सौ उन्चालिस वर्ग कि मी में फैले सुदूर पश्चिम में ९ जिला, ९ नगरपालिका हैं जहाँ की आबादी करीब २८ लाख है । इस प्रदेश के करीब ४५ प्रतिशत जनसंख्या गरीब रेखा के नीचे है । मानवविकास के सूंचकाक में सुदूर पश्चिम सबसे पिछड़े प्रदेश के रुप में है । रोजगारी के अभाव में इस क्षेत्र के जनता भारत, साउदी अरब, युएई, कतार और मलेसिया जाने को बाध्य हैंं । लेकिन सुदूर पश्चिम की जनता अब गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्या से उब चुके हैं और वह स्वयं ही कुछ करना चाहती है अपने जीवन स्तर सुधार के लिए ।
मंगलवार सम्पन्न कार्यक्रम के समापन समारोह में सुदूर पश्चिम से प्रतिनिधित्व करनेवाली सांसद आरजु राणा देउवा ने राजनीतिक हिसाब से नेपाल और भारत दो राष्ट्र होने के बाबजुद सांसकृतिक हिसाब से एक ही राष्ट्र होने के बात बताई । उन्होंने कहा– टेम्पल –इकोनमी सुदूर पश्चिम के विकास के लिए वरदान साबित हो सकती है । इससे युवा वर्ग में अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जागरुकता बढ़ाने के साथ –साथ सुदुर पश्चिम की अर्थतन्त्र में भी काफी सुधार ला सकती है ।
टेम्पल–इकोनमी सुनने में अच्छा लगता है लेकिन इसके लिए तैयारी भी पर्याप्त चाहिए । कहा जाता है कि सुदूर पश्चिम में लगभग ४० हजार देवी देवताओं के मन्दिर है । जहाँ प्रत्येक वर्ष बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु लोग आते हैं । इसी क्षेत्र से धरती के स्वर्ग कहलावाली खप्तड, रारा, शुक्लाफाट राष्ट्रीय निकुत्तज और त्रिपुरासुन्दरी, बड़ीमालिका, गोदावरी, घोड़ा घोड़ी जैसे पवित्र धार्मिक स्थल भी हैं । लेकिन कमजोर पूर्वाधार के कारण पर्यटकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पडता है, इस क्षेत्र में ।
मानखण्ड सम्मेलन के समापन कार्यक्रम में नेपाल के लिए भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भारत की ओर टेम्पल–इकोनमी अवधारणा को साकार करने के लिए हर सम्भव प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई । वही भारतीय जनता पार्टी के विदेश विभाग प्रमुख विजय चौथाइवाला ने भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का मुक्तिनाथ, जनकपुर और लुम्बिनी भ्रमण का स्मरण करते हुए कहा कि इन भ्रमणों से इस क्षेत्र के पर्यटन प्रवद्र्धन में सहयोग होगा । उन्होंने रामायण सर्किट, बुद्ध सर्किट और शिवशक्ति सर्किट पर दोनाें देश के बीच हो रही सहकार्य के संबन्ध में जानकारी देते हुए मानसखण्ड अवधारण की तारीफ की । उन्होंने भी मानसखण्ड में टेम्पल–इकोनमी अवधारण को सफल बनाने के लिए भारतीय सहयोग की भी प्रतिबद्धता जाहिर की ।
तीन दिवसीय कार्यक्रम में सुदूर पश्चिमप्रदेश के मुख्यमन्त्री कमल बहादुर शाह ने अपने प्रदेश के सर्वाङिण विकास के लिए अपने और से प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कहा कि टेम्पल –इकोनमी एक महत्वपूर्ण कदम होगा ।
खास कर सुदूर पश्चिम प्रदेश में भारत से आनेवाले हिन्दू पर्यटक की संख्या ज्यादा है । आराध्य देव शिव के निवास कैलाश मानसरोवर जाने का मुख्य रास्ता होने के कारण भी इस क्षेत्र का पर्यटकीय सम्भावना प्रचुर है । इसके साथ ही दोनो ही राष्ट्रों के जनता के बीच पारिवारिक संबन्ध होने के कारण उत्तराखण्ड और सुदुरपश्चिम के बीच एक तरह का जुड़ाव है । लेकिन इस जुडाव को अब आर्थिक संबृद्धि के लिए प्रयोग करने का अब वक्त आ गया है । जैसा कि सुदुर पश्चिम विश्वविद्यालय के उप कुलपति अमर राज जोशी ने कहा कि – दोनो राष्ट्रों का जुड़ाव एक है, और पौराणिक चिन्तन दोनों प्रदेशों के आर्थिक संबृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है ।
उत्तराखण्ड के नन्दादेवी सेनेपाल के कागगिरी पर्वत के बीच फैले हुए भारत के उत्तरखण्ड और नेपाल के सुदूर पश्चिम भू –भाग के मानसखण्ड भी कहा जाता है, जिसका उल्लेख स्कन्ध पुराण में भी किया गया है । इसे देव ऋषि भूमी और तपो भूमी भी कहा गया है । मान्यता है कि यहाँ कदम –कदम पर इश्वर का वास है, न सिर्फ हिन्दु बल्कि बौद्ध, सिख और जैनियो के लिए भी मानस खण्ड पुजनीय है । भारतीय विद्वान ड‘ा. रितेश राजशाह ने तो इस क्षेत्र में गुरु गोरखनाथ से जुडेÞ बहुत स्थान होने के कारण इस क्षेत्र को गुरु गोखनाथ सर्किट के रुप में भी विकास करने की अवधारण की बात भी कही । कहा जाता है कि इसी क्षेत्र में मानव की उत्पत्ति भी हुई । ऐसे में इस क्षेत्र में समुचित विकास से न सिर्फ इस क्षेत्र में आर्थिक सबृद्धि बढेÞगी, धार्मिक पर्यटकों की आवा जाही से दोनो राष्ट्रो के संबन्ध को और भी ज्यादा समधुर और सुदृढ बनायेगी ।
लेकिन पर्यटकों के लिए आने जाने को बढ़ावा देना इतना सरल नही है । इस क्षेत्र में सड़क की अवस्था दयनीय है । पर्यटकों के सुरक्षा के लिए पर्याप्त पूर्वाधार नहीं है साथ ही साथ मुद्रा, पर्यटकों के सुरक्षा जैसा अनेक सवाल है जिसके लिए दोनों देशों के सरकार को खुलकर आना होगा ।
कार्यक्रम में मानसखण्ड में टेम्पल– इकोनमी विषय पर भारतीय विद्वान डॉ. श्यामप्रान्द्रेय, डॉं बसुधा पाण्डे, ड‘ां हेमा उनीयाल अनसन्धानकर्ता डॉं निहार नायक, डा. रितेश राजशाह, डा. अनुराधागोस्वामी, डा. दीपा दुरास्वामी, नितिनशर्मा, श्याम पाण्डे ,सुदुरपश्चिम के पूर्व मुख्यमन्त्री एवं इतिहासकार डॉ. राजेन्द्र बहादुर रावल प्राज्ञ वासदेव पाण्डे, पदमराज जोसी, डॉ. दिवेश्वरी जोशी, डॉ. नारायणी भट्ट, आचार्य घनश्याम लेखक, भुवनेश्वर पनेरु भारतीय एसएसबी के पूर्व डीआइजी भगत सिंह पुलिया और सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल के पूर्व प्रमुख शैलेन्द्र खनाल ने विभिन्न विषय पर कार्यपत्र प्रस्तुत किया । कार्यक्रम में धनगढ़ी उपमहानगरपालिका के मेयर गोपाल हमाल ने भी इस क्षेत्र के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है ।

