माँ : तारा राखेचा
*मॉं*
मां है ममता त्याग बलिदान का नाम।
कर दे जो जिंदगी अपने बच्चों के नाम।
*मेरी मॉं*
हैरान हूं मैं, वह पढ़ी-लिखी नहीं थी।
फिर भी चेहरे के भाव देखकर समझ जाती थी।
अपने प्यार के मरहम से जख्म भर देती थी।
संबल थी मेरे मानस की, व्यक्तित्व निर्माण की निर्देशिका थी।
त्याग, समर्पण, स्वाभिमान, शिष्टाचार की उपदेशिका थी ।
आज इस दुनिया में नहीं है,फिर भी राह दिखाती हैं।
मेरे सपनों में आकर के मुझको दुलारती,समझाती है।
अपने दिए हुए संस्कारों को याद दिलाती है।
मां ????की जगह कोई नहीं ले सकता है।
आप ????जीवन की सबसे मजबूत डोर हैं।
आज जमीन पर नहीं है, फिर भी आप मेरे दिल में है।
ममता की सागर,करती हूं बारम्बार नमन, नमन????

वीरगंज ( नेपाल) ✍️


