लम्बी प्रतीक्षा का अंत – नागरिकता विधेयक प्रमाणीकरण : कंचना झा
कंचना झा, काठमांडू। नागरिकता विधेयक को लेकर लंबी प्रतीक्षा समाप्त हुई । आगे यानी कल को क्या होगा नहीं कहा जा सकता है लेकिन एक रास्ता जरुर खुला है नेपाल की नागरिकता को लेकर । एक बहस का मुद्दा बन गया था यह विधेयक । पूर्व राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से नेपाली नागरिको को बहुत उम्मीदें थी कि वो एक महिला हैं और महिला को प्राथमिकता में रखेंगी । जब कोई विदेशी बेटी ब्याह कर हमारे देश में आएगी तो उसका भी देश में स्वागत उसी तरह से होगा जैसे उसके ससुराल में होता है । वह घर को अपनाती है । परिवार के सदस्यों को अपनाती है । घर परिवार के लोग उसे अपनाते है तो देश क्यों नहीं अपनाएगा ? इस भाव को अगर कोई बहुत बेहतर तरीके से सोच पाता तो वह महिला राष्ट्रपति सोच सकती थी । लेकिन वो एमाले की ही बनकर रह गई कभी उससे उपर उठकर सोचा ही नहीं । उन्होंने एमाले पार्टी जो सदैव इस विधेयक के विरोध में थी उसका खुलकर समर्थन किया और जोर शोर से आवाज उठाने के बाबजूद उन्होंने इस नागरिकता विधेयक को प्रमाणीकरण नहीं किया । उन्होंने अटका कर रख दिया । उन्हें दो दो बार इसे प्रमाणीकरण का अवसर दिया गया लेकिन उन्होंने नहीं किया । जिस नागरिकता विधेयक का सभी इंतजार कर रहे थे उसे आज राष्ट्रपति पौडेल ने प्रमाणीकरण कर दिया है ।
जन्मसिद्ध के सन्तान को वंशज की नागरिकता
विधेयक प्रमाणीकरण के साथ ही अब २०७२ के संविधान जारी होने से पहले जन्म के आधार में नागरिकता पाने वाले सन्तान को अब वंशज की नागरिकता पा सकते हैं । २०७२ के संविधान ने ही संविधान जारी होने से पहले जन्म के आधार में नागरिकता पाने वाले सन्तान को वंशज की नागरिकता देने की व्यवस्था की गई थी । लेकिन संविधान अनुसार, नागरिकता ऐन संशोधन नहीं होने की वजह से इस तरह के नागरिकों को नागरिकता नहीं मिल पा रही थी ।
माँ के नाम से नागरिकता
प्रमाणीकरण हुए विधेयक दूसरी व्यवस्था है, माँ के नाम से नागरिकता प्रदान करना । अब नेपाली माता से नेपाल में जन्में तथा यही के वासी ,अगर पिता की पहचान नहीं है तो ऐसे बच्चे को माँ के नाम से अब नागरिकता मिलेगी । वैसे ये भी २०७२ के संविधान की ही व्यवस्था है । लेकिन पिता विदेशी हुआ तो वंशज के आधार में पाई नागरिकता अंगीकृत में परिणत होगी ।
गैर आवासीय को नागरिकता
विधेयक प्रमाणीकरण ने गैरआवासीय नेपाली को नागरिकता लेने का रास्ता खोल दिया है । वें अब राजनीतिक और प्रशासनिक बाहेक के अधिकार का प्रयोग कर नागरिकता पा सकते हैं ।
विधेयक प्रमाणीकरण होने के बाद नेपाली पुरुष के साथ विवाह करके आने वाली विदेशी महिला तत्काल ही अंगीकृत नागरिकता पा सकती है ।
इस बारे में संसदीय समिति में भी लम्बी बहस हुई थी । नेकपा एमाले ने वैवाहिक अंगीकृत में सात वर्ष की लम्बी अवधि रखने का अड़ान लिया था । इस नागरिकता विधेयक का नेकपा एमाले शुरु से ही विरोध करती आ रही थी । जबकि जनता बार बार कह रही थी कि समय के अनुरुप इसमें बदलाव आना चाहिए । एक अच्छा और सफल कार्यकाल के रुप में याद की जाती पूर्वराष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी । लेकिन एक बार फिर राष्ट्रपति पौडेल ने आन नेपाली नागरिक के भावों का मान रख दिया है । इस प्रश्न पर सवाल उठा रही थी कि आखिर क्यों इस विधेयक को
हलांकी अभी भी बहुत सी लडाईयां बांकी है मगर जो मिला है उसकी प्रशंसा करनी होगी । इसके साथ ही नागरिकता में पुरुष और महिला के बाहेक लैंगिक पहिचान सहित की नागरिकता पाने की व्यवस्था भी की जाएं । इस तरह की मांग भी उठ रही थी । लेकिन अभी इसे संबोधित नहीं किया है ।
राजनीतिक दलों की अगर बात करें तो लोसपा के अध्यक्ष महन्थ ठाकुर ने इसे सकारात्मक कहा है ।
वहीं राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने ने नागरिकता विधेयक प्रमाणीकरण के प्रक्रिया प्रति अपनी आपत्ति जताई है ।


