सस्ती लोकप्रियता की दौड़ में बालेन : कंचना झा
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कंचना झा, काठमांडू, २ असार । सस्ती लोकप्रियता – होड़ चल रही है नेपाल में । कभी कभी तो लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब नेपाल के नेतागण इसी होड़ में शामिल होंगे कि अब श्रीलंका से सवाल जबाब करें कि क्यों तुमने हमारे नेपाल की बेटी सीता का अपहरण किया ? खासकर काठमांडू के मेयर बालेन्द्र साह का कोई ठिकाना नहीं है कब वो आम नागरिकों के सुख सुविधा देने की वजाय इन बातों में लोगों का ध्यान खींचे । बात कर रही हूँ काठमांडू के मेयर बालेन्द्र साह उर्फ बालेन की ।
कहते हैं जब काम करने वालों को काम नहीं करने का मन करें तो वो कुछ ऐसे हथियारों का प्रयोग करते हैं जिसमें लोग उलझ जाए और उसके द्वारा नहीं किए गए काम की नहीं वरन वो जो कुछ भी बोले उसपर आम लोगों का ध्यान जाए । सच कहिए तो जब बालेन साह काठमांडू के मेयर बने तो आम लोगों को बड़ा सकुन सा लगा था कि चलो कुछ तो परिवर्तन लाएगा । नए उम्र का है, पढ़ा लिखा है, बातों को, समस्याओं को, जरुरतों को समझेगा । मगर मेयर साह ने भी नेपाल के लोगों की नब्ज को खूब अच्छी तरह से पकड़ लिया है और वही करने लगे जो सस्ती लोकप्रियता के लिए प्रायः यहाँ के लोग करते आए हैं ।
वो पहले भी काठमांडू को स्वच्छ, और सुन्दर बनाने के ही नाम पर बीच सड़क के ईधर–उधर जो छोटे–मोटे लोग ईमानदारी से अपना काम करते हैं । कम से कम चोरी नहीं करते हैं । मेहनत और ईमानदारी से अपना काम करते आए हैं उन्हें रास्ते से हटा दिया । लेकिन यह काम ६ महीने या सालभर में नहीं होता यह २ या ३ साल के बाद भी हो सकता था । सबके लिए एक जगह बना दिया जाता तब किया जाता तो लोग बालेन का भी साथ देते । मेयर बालेन ने भी अपने आप को चर्चा में रखने के लिए ओली की ही तरह बोलने को प्राथमिकता दी । जहाँ काम करना चाहिए वहाँ किसी का भी ध्यान नहीं है और जिन बातों में उलझ कर कुछ नहीं होने वाला है हम उसमें उलझ रहे हैं । सच्चाई तो यह है कि सब अपनी अपनी रोटी सेंक रहे हैं ।

अभी फिर एक बार बालेन चर्चा में हैं ‘आदिपुरुष’ चलचित्र को लेकर । इसके बारे में काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन साह का कहना है कि इस चलचित्र में सीता को भारत की बेटी कहा गया है । जबतक इस शब्द को ठीक नहीं किया जाएगा तबतक काठमांडू के सिनेमा हॉल में कोई हिन्दी सिनेमा नहीं चलने देने की घोषणा की है । उनके इस धोषणा की कुछ कलाकारों ने समर्थन भी किया है जिसमें दिपकराज गिरी भी एक हैं । गिरी ने समर्थन देते हुए कहा है कि ‘सम्पूर्ण हिन्दू जगत द्वारा मानी गई बात है कि सीता नेपाल की बेटी हैं । इस बात में कुछ भी छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए । ये गलत है, इसके विरुद्ध बालेन जो कदम उठाया है मैं उसका समर्थन करता हूँ ।
मेयर साह ने कहा है कि ‘जानकी भारतीय बेटी हैं’ इस शब्द पर मुझे आपत्ति है । ‘दक्षिण भारतीय फिल्म ‘आदिपुरुष’ में समावेश ‘जानकी भारत की बेटी हैं । जबतक नेपाल में ही नहीं भारत में भी ठीक नहीं किया जाएगा तबतक काठमांडू महानगरपालिका के भीतर किसी भी हिन्दी फिल्म को नहीं चलने दिया जाएगा । इसे ठीक करने के लिए मेयर साह ने तीन दिन का समय दिया था । सिनेमा तो सिनेमा है । यह एक व्यापार है तो वह तो व्यापार ही करेगा । इसलिए सिनेमा से उस सीन को निकाल दिया गया है और अब इस फिल्म को रिलीज कर दिया गया है । सिनेमा में और भी बहुत कुछ ऐसा है जिसमें भारतीय दर्शकों को भी बहुत आपत्ति है और इसके लिए भी बहुत सी बहस की जा रही है ।
नेपाल की बात करें तो कुछ दिन पहले उन्होंने एक और तमाशा किया । अपने कार्यकक्ष में उन्होंने ग्रेटर नेपाल का नक्शा लगा दिया । यहाँ ये सभी अपने आप को दिखाने में लगे हैं कि राष्ट्र से प्रेम ज्यादा कौन करता है ? और अपने आप को सबसे ज्यादा राष्ट्रीय साबित करने के लिए काम करना जरुरी नहीं है । इसी तरह से दो चार दिन पर कुछ न कुछ विचारों को लोगों के सामने रख देने से होगा । इस बात को हमारे यहाँ के नेताओं ने अच्छी तरह से समझ लिया है ।
वैसे ऐसी बात नहीं है कि कोई काम करता ही नहीं है । उदाहरण के लिए हर्क साम्पाङ्ग को लें । कुछ दिन पहले की ही बात है हर्क की आँखों से आँसू बह रहे थे और धरान के लोग खुशी से नाच रहे थे । अपने चुनाव के समय में ही उन्होंने कहा था कि वो धरान वासियों को पानी की समस्या से निजात दिलवाऐगे । सो उन्होंने कर दिखाया । जो काम करने का ठान ले तो फिर क्या कहने ?
लेकिन यहाँ खासकर काठमांडू में बैठे लोग आम नागरिक की समस्याओं को नहीं समझ उसे राजनीतिक रंग देने पर आतुर रहते हैं । वो आम नागरिक को उलझा कर रखते हैं कभी राम, कभी सीता तो कभी बुद्ध की बातों को लेकर । जबकि हम और आप सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि जो इतिहास में दर्ज है उसे कोई बदल नहीं सकता । वह चाहे भारत हो या फिर कोई और देश । जिस संबंध की हम बात कर रहे हैं वह पौराणिक संबंध है, कोई वहाँ से नहीं निकाल सकता है हमें । फिर चाहे नेपाल ग्रेटर नेपाल का नक्शा बनाएं या भारत अखंड भारत का ।
जो असली समस्या है हमारे यहाँ का जरुरत है उसे संभालने की । उससे निजात पाने की । अच्छा यह रहता कि उसके निराकरण की सोचते न कि इस तरह की राजनीतिक बातों में अटक कर अपनी प्राथमिकता को भूलते ।

कार्यकारी संपादक
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