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हिन्दी नेपाल का लिंगवा फ्रेंका है :उपेन्द्र यादव, कहा भाषा आयोग का औचित्य नहीं

 
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श्री सीताराम प्रकाश

जनकपुरधाम, हिमालिनी सवांददाता ।  मधेश प्रदेश की राजधानी जनकपुर में भाषा आयोग द्वारा सरकारी कामकाज की भाषा कार्यान्वयन के लिए अन्तरक्रिया कार्यक्रम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में जसपा अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने हिन्दी की वकालत करते हुए कहा कि – अभी का समय है या कहें कि इस ग्लोबल युग में केवल एक भाषा में सीमित रहकर हम नहीं रह सकते हैं । हिन्दी भाषा को सीखकर ही तो कुमार सानू , मनीषा कोइराला आज शिखर पर पहुँचे हैं । हिन्दी नेपाल का लिंगवा फ्रेंका है । मिथिला में मैथिली है लेकिन भैरहवा में आते आते हिन्दी में बात करनी पड़ती है । यदि आप जुम्ला जाते हैं तो नेपाली भाषा से काम नहीं चलेगा । वो एक दूसरी ही भाषा बोलते हैं लेकिन हिन्दी बोलते समझते हैं ।
राष्ट्र भाषा सिर्फ नेपाली ही हो इससे ज्यादा धूर्त, पाखंडी बात और क्या हो सकती है । नेपाल के संविधान में नेपाली भाषा के साथ ही अन्य भाषाओं को भी अनुसूचि में रखना चाहिए । एक भाषा की यह जो नीति है वह नहीं चलेगी या अब नहीं चल सकती है ।
प्रदेश में चार पाँच भाषाओं को सरकारी कामकाज की भाषा बनानी चाहिए । मानी हुई बात है कि सबसे ज्यादा प्रिय मातृभाषा होती है । मातृभाषा माँ के दूध के समान होती है ।
इसी तरह जनगणना मिथ्यांक है इसके आधार पर यदि भाषा आयोग चल रही है तो इसका भी कोई औचित्य नहीं है ।
इससे पहले मैथिली, भोजपुरी और बज्जिका को कामकाजी भाषा बनाए जाए इस बात पर जोड़ दिया जा रहा था और इसके लिए मधेस प्रदेश सरकार से सिफारिश भी की गई है । कार्यक्रम में सभासद ललिता विद्रोही ने हिन्दी की आवश्यकता पर जोड दिया । इसी तरह मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार सीताराम अग्रहरि ने जनकपुर में हाल ही महिला भजन मण्डली का हवाला देते कहा कि महिला भजन मंडली ने हिन्दी में भजन गाया फिर मैथिली में । मैथिली हिन्दी परस्पर विरोधी नहीं । हिन्दी मधेश का सम्पर्क सेतू है ।
इसी तरह मधेश प्रदेश सरकार के महान्यायाधिवक्ता वीरेन्द्र ठाकुर ने सुझाव दिया कि मधेश प्रदेश में मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका के साथ साथ हिन्दी और और अंग्रेजी भी ऑफिसियल ल्यांग्वेज होना चाहिए।
कार्यक्रम में शिक्षामंत्री मधेश यादब, मंत्री सुनीता यादब, माओवादी नेता भरत साह,नेपाली कांग्रेस के नेता फरमूला मंसुर, राज्य मंत्री सरोज यादब आदि ने बहुभाषिक आवश्यकता पर जोड़ दिया ।
अध्यक्षीय आसन से प्रदेश प्रमुख हरिशंकर मिश्र ने हिन्दी में बोलते हुए कहा कि २०४६ के परिवर्तन पश्चात हिन्दी के बारे में कृष्ण प्रसाद भट्टराई एवं गणेशमान सिंह जी का उदार रवैया रहा था । इस अवसर पर उन्होंने दोनों को याद किया ।
मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सरोज यादव का कार्यक्रम को अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि मनोभाव आदान–प्रदान का, संवाद का, सांस्कृतिक पहचान का, हमारे अस्मिता का एवं सम्प्रेषण का एक सशक्त माध्यम है । एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है । अब एक भाषा से काम नहीं चलने वाला है । नेपाल में बोली जाने वाली सभी भाषा नेपाल की भाषा है । विविधता हमारी शक्ति है । यही नये नेपाल का मर्म है ।
प्रदेश सभासद रामाशीष यादब एवं मधेश प्रज्ञा प्रतिष्ठान के उपकूलपति रामभरोस कापडि़ ने भी उक्त अवसर पर अपना विचार रखा । भाषा आयोग की ओर से आयोग के अध्यक्ष श्री गोपाल ठाकुर और सदस्य श्री गोपाल अश्क समेत की उपस्थिति थी । आयोग द्वारा भी केवल तीन भाषा की सिफारिश की गयी है जिसमे हिंदी नहीं है ।  हिंदी का नाम से परहेज रखने पर भाषा आयोग की सर्वत्र आलोचना हो रही है ।

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सभी साभार श्री सीताराम प्रकाश

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