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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मिथिलाक्षर का अलख जगा रहे चोरौत के युवा प्रभात कुमार

 


जनकपुरधाम/मिश्रीलाल मधुकर । कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, दिल्ली सरकार ने विभिन्न अकादमियों द्वारा स्कूली बच्चों के लिये ‘मस्ती की पाठशाला’ योजना के अंतर्गत अलग-अलग विधाओं के लिये विभिन्न सरकारी विद्यालयों में एक महीने के ‘ग्रीष्मकालीन कार्यशाला’ का आयोजन किया था। मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली ने भी 22 मई से 22 जून, 2023 तक दिल्ली में ‘मिथिलाक्षर कार्यशाला’ का आयोजन किया। इसके लिए मिथिला क्षेत्र की भाषा मैथिली की लगभग विलुप्त हो चुकी लिपि मिथिलाक्षर के ज्ञाताओं का साक्षात्कार अकादमी के सचिव सहित तीन सदस्यों की कमिटी द्वारा लिया गया था।

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जगत जननी माता जानकी की प्राकट्यस्थली सीतामढ़ी जिला के चोरौत निवासी प्रभात कुमार ने साक्षात्कार में भाग लेते हुए मेघा वरीयता सूची में प्रथम स्थान प्राप्त कर पूरी दिल्ली में मात्र एक जगह आयोजित ‘मिथिलाक्षर कार्यशाला’ में दर्जनों बच्चों को एक महीने तक मिथिलाक्षर का प्रशिक्षण देकर मातृभूमि व मातृभाषा की सेवा की है।

सामाजिक संस्थान ‘प्रभात नव चेतना समिति’ के संस्थापक व वतर्मान सचिव प्रभात कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ-साथ लेखक, कवि और मिथिलाक्षर अभियानी भी हैं। कला, संस्कृति व भाषा के संवर्द्धन व संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहने वाले प्रभात कुमार मिथिला व मैथिली के सतत विकास के लिये भी सदैव आगे रहते हैं।

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प्रभात कुमार बताते हैं कि मैथिली भाषा व उसकी लिपि मिथिलाक्षर का अपना एक समृद्ध इतिहास रहा है। रोजगार के कारण मिथिला क्षेत्र से भारी पैमाने पर हुये पलायन के बाद मिथिलाक्षर लिखने के व्यह्वार में कमी आई। कालांतर में यह विलुप्त होती चली गई। कई सक्रिय संगठनों व मैथिली प्रेमियों की मदद से धीरे-धीरे इसे संजीवनी दिये जाने का सफल प्रयास कर पुनः व्यह्वार में लाने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।

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