ठहाका मौन **भावपूर्ण श्रद्धांजलि
ठहाका मौन

भुवेन्द्र त्यागी ● यकीन नहीं हो रहा कि वह बुलंद ठहाका मौन हो गया। अग्रज समान संजीव निगम ने साथ छोड़ दिया।
◆ 23 मई को ब्रेन स्ट्रोक के बाद संजीव निगम को कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहां उनके मस्तिष्क के दो ऑपेरशन हुए, लेकिन वह उबर नहीं पाए। आज दोपहर को उन्होंने संजीवनी अस्पताल में आख़िरी सांस ली। वह 63 साल के थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं।
◆ संजीव निगम देना बैंक में राजभाषा अधिकारी थे। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने टीवी धारावाहिकों में पटकथा लेखन का काम किया। उनकी कुछ कहानियों पर टेली फ़िल्में बनीं। पिछले कुछ साल से वह हिंदुस्तानी प्रचार सभा में मानद निदेशक और सभा की पत्रिका ‘हिंदुस्तानी ज़बान’ के संपादक थे। उन्होंने सभा की ओर से क़ैदियों के लिए देश भर में 100 पुस्तकालय शुरू कराए।
◆ संजीव निगम से मेरा परिचय एक सेमिनार में हुआ था। उनकी ऊर्जस्वी मुस्कान ने तभी मैत्री का पुल बना दिया था। कई कार्यक्रमों में उनके साथ रहा। फोन पर अक्सर बात होती रहती थी। किसी भी रचना पर वह कभी भी बेलाग राय दे सकते थे और उनकी हर राय भली लगती थी। वह हर बात पर ठहाका लगाते थे, लेकिन थे बेहज संजीदा शख्स। हंसी-मजाक खूब करते थे, लेकिन हमेशा मर्यादा-शालीनता की सीमा में रहते थे। पहली मुलाकात में ही सम्मान अर्जित करने का अद्भुत गुण था उनमें।
◆ मेरी उनसे ज्यादातर बातें खेलों पर होती थीं। उनके पिता पी.सी. निगम हिंदुस्तान टाइम्स के स्पोर्ट्स एडिटर थे और मेरे करियर की शुरुआत खेल पत्रकार के रूप में हुई थी। इसलिए हम दोंनों को खेलों में समान रुचि थी। इस बातचीत में भी वे व्यंग्य के मौके ढूंढ लेते थे। विराट कोहली के खराब फॉर्म पर चर्चा के दौरान एक बार उन्होंने कहा था- विराट टेस्ट मैचों में ही रन बना लेगा, तो आईपीएल में कौन बनाएगा!
◆ हास्य-व्यंग्य का उनका यह अंदाज अब नहीं दिखेगा। लेकिन वह जहां भी होंगे, अपनी इसी अदा से महफिल लूट लेंगे।भुवेन्द्र त्यागी।श्री संजीव निगम जी के निधन पर हिमालिनी परिवार हार्दिक श्रद्धांजलि व्यक्त करती है ।

