भारतीय राजदूतावास द्वारा आषाढ़ पूर्णिमा पर कार्यक्रम आयोजित

काठमाडौं‘ .।आषाढ पूर्णिमा’ के पावन अवसर पर भारतीय राजदूतावास, काठमाडौं ने अन्तर्राष्ट्रिय बौद्ध परिसंघ के सहकार्य में मिति २०८० असार १८ गते दूतावास स्थित स्वामी विवेकानन्द साँस्कृतिक केन्द्र में संयुक्त रुप में एक कार्यक्रम का आयोजना किया। उक्त समारोह में नेपाल सरकार के माननीय संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन राज्यमन्त्री श्रीमती सुशीला सिर्पाली ठकुरी उपस्थित थीं। कार्यक्रम में नेपाल के विभिन्न बौद्ध सम्प्रदाय और गुम्बा के प्रतिनिधि के साथ लुम्बिनी विकास कोष के पदाधिकारी की सहभागिता थी। कार्यक्रम में अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के सचिव खेन्पो छिमेद परिसंघ प्रतिनिधि के रुप में उपस्थित थे।
बिहार के बोधगया में बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने उत्तर प्रदेश के सारनाथ में अपने पहले पाँच तपस्वी शिष्य को दिए गए उपदेश को आषाढ पूर्णिमा के दिन विशेष स्मरण किया जाता है। इसे धर्म चक्र के पहले रुप में जाना जाता है। इस उपदेश में भगवान बुद्ध ‘चार आर्य सत्य’ और ‘आर्य अष्टाङ्गिक मार्ग’ के विषय में बताया था।
कार्यक्रम में महायाना संघ और थेरावडा संघ ने भगवान बुद्ध की प्रार्थना की। तत्पश्चात चार बौद्ध सूत्र का प्रार्थना किया गया।
अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के सचिव खेन्पो छिमेद ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि का स्वागत किया साथ ही कार्यक्रम के महत्व के बारे में प्रकाश डाला । कार्यक्रम में माननीय संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन राज्यमन्त्री श्रीमती सुशीला सिर्पाली ठकुरी ने कहा कि बौद्ध धर्म भारत और नेपाल को सदियौं से जोड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि बाैद्ध और अन्य धार्मिक सर्किट के निर्माण से आधुनिक समय में भारत और नेपाल के बीच सभ्यतागत सम्बन्ध को सुदृढ बनाएगा। कार्यक्रम में बोलते हुए दूतावास के नियोग उप–प्रमुख श्री प्रसन्न श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान बुद्ध द्वारा दी गई शिक्षा भारत और नेपाल में स्थित बौद्ध धर्म के पवित्र स्थलों को दोनों देशों के बीच की साझी सांस्कृतिक सम्पदा को प्रतिबिम्बित करती है। कार्यक्रम में लुम्बिनी गुम्बाक्षेत्र मे निर्माण होने वाले भारत अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति तथा सम्पदा केन्द्र का डिजाइन तथा विशेषता के विषय में तैयार किए गए भिडियो को प्रस्तुत किया गया। सन् २०२२ के मई महीने में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की लुम्बिनी भ्रमण के क्रम में प्रधानमन्त्री मोदी और नेपाल के पूर्व प्रधानमन्त्री श्री शेर बहादुर देउवा ने संयुक्त रुप में इस केन्द्र का शिलान्यास किया था।


