नक्कली राष्ट्रवाद की वजह से नेपाल सयकड़ो बर्ष पिछे : अब्दुल खान

भारत को गाली देकर नेपाल मे राष्ट्रवाद नही आएगा अगर कोई यह सोच रह है कि पडोसी देशों को गाली देकर नेपाल मे राष्ट्रवाद आएगा नेपाल समृद्ध होगा यह दिवास्वप्न है ।
नेपाल मे अपने आप को राष्ट्रवादी दिखाने के लिए भारत की खलनायकी छबि गढ़ना एक प्रमुख अश्त्र बनालिया गया है । अपनी अकर्मण्यता छुपाने के लिए भारत को गाली देना खोखले राष्ट्रवाद का सहारा लेना देश को और पिछे के ओर लेजाएगा ।
अगर सचमे कहा जय तो नेपाल मे कुछ अमुख दल और उनके कुछ नेताओं ने भारत को गाली देना अपना चुनावी लोकप्रियताका एक प्रमुख अश्त्र बनालिया है, हर चुनाव के आगे भारत को गाली देनेवाला राष्ट्रवाद चरम सिमा पे होता है। अपने आन्तरिक मामलाओं को न सुल्झाने की वजह से बिधमान समस्याओं को बढावा देना हेतु पडोसी देशोंको दशको से निशाना बनाते आए हैं ।
देश के भित्र रहे रंगभेद,जातीभेद, भौगोलिकभेद, नश्लभेदी चिन्तन के वजह से एक सुइँ बनाने तक का औधोगीकरण नाकर पाना, कृषि मे आत्मनिर्भर न होना, युवाओं को रोजगार नदेना, जनहितकारी एवम् लोककल्याणकारी योजनाओं को लागु न करपाना, भ्रस्टचार को बढावा देकर अकुत सम्पत्ती आर्जन कर जनमानस का ध्यान भटकाने हेतु पडोसी देशों कों गाली देकर झुठा राष्ट्रवाद प्रदर्शित करना अपने ही लोकसभाको आवरोध कर देशको अनिर्णयका बन्दी बनाना बैदेशिक कर्ज और सहयोग लेकर आडम्बर वाजीकी राजनीति करना नेपाल हित मे कदाचित नही हो सकता ।
कभी भुमि की सौदेवाजी करना, कभी नदियों को बेचना, कभी भगवान गौतम बुद्ध पशुपति नाथ को भजाकर खानेका मोहरा बनाना यह नेताओं की परम्परा राजा राना काल से आजतक बनि हुई है ।
हमारा सुझाव विश्व का हर एक देश हमारा मित्र और सहयोगी है पारस्परिक सम्बन्ध दिर्घकालिन रणनीति देश हित हमारा मक्सद होना चाहिए। अन्तरराष्ट्रिय मूल्य और मन्याताओं के आधार पर एक देश दुसरे देश के कुटनीतिक सम्बंधों के अधार पर राजदुतावास और आन्तरिक संयत्र रखसकता है इसका मतलब यह नही है की आप के आन्तरिक मामलाओं मे हस्तक्षेप करेगा इनपे आरोप लागाना हमारा मक्सद नही बल्की परस्पर सहयोगकी अपेक्षा होना चाहिए इसी से हम अपनी मुल्क को समृद्ध बनासकते हैं ।
(लेखक पूर्वमन्त्री हैं ।)
इमेल : abdulkhanbardiya@gmail.com

