बजट में इस बार भी मधेश हाशिए पर
श्वेता दीप्ति, काठमान्डू, २९, आसाढ । अन्ततः सभासदों द्वारा ५करोड की मांग की चर्चा और तानाकशी के बीच २०७१ और ७२ का बजट आ ही गया । आशाओं और उम्मीदों की जगह आलोचना और प्रतिक्रिया ने ले ली र्है । कुछ पक्ष को देखा गया तो कुछ को अनदेखा कर दिया गया । विश्लेषण बताता है कि विगत की तरह इस बार भी मधेश हाशिए पर ही है । कई मूलभूत विषयों को नजरअंदाज कर दिया गया है ऐसा मधेशी दलों के नेताओं का मानना है । कारण स्पष्ट है कि बजट प्रणाली और सार्वजनिक वित्तीय व्यवस्थापन में जिस बहस की आवश्यकता थी वह हो नहीं पाई । सारा ध्यान सभासद के ५ करोड पर अटका रह गया ।
बजट के बाद जो प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं उसमें एक बात समान है कि बजट में विशेष कुछ नया नहीं है । पुराने पर नई पौलिश लगाकर पेश किया गया है ।
बजट पर पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व अर्थमन्त्री बाबुराम भट्राई का मानना है कि,यह बजट यथास्थितिवादी और प्रतिगामी है । इससे कोई नवीनता आएगी या कोई उपलब्धिमूलक बात सामने आएगी ऐसा नहीं लगता । इसमें कुछ नया नहीं है । देश जिस परिवत्र्तन की ओर है और ऐसे में जितना बल आर्थिक विकास पर देना चाहिए था वैसा कुछ नहीं है । इससे विकास सम्भव नहीं है । राजस्व संकलन में भी वही बात है । यह बजट विदेशी कर्जा पर ज्यादा आधारित है । बजट में १८ प्रतिशत विकास के लिए रखा गया है और ६४ प्रतिशत साधारण खर्च केलिए इससे पता चलता है कि यह बजट आत्मनिर्भर, अर्थतन्त्रनिर्माण की ओर केन्द्रीत नहीं है ।
पूर्व अर्थमन्त्री सुरेन्द्रपाण्डे का मानना है कि बजट में कुछ विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया है । कृषि में जितना रकम दिया गया है उससे अधिक की अपेक्षा थी । पर्यटन पर ध्यान दिया गया है यह सराहनीय है । यह एक मिश्रित बजट है ।
अर्थविद् हरि रोक्का के अनुसार इस बजट में किसी पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया है अपितु हर ओर फैला दिया गया है । समस्या क्या है इस पर ध्यान नहीं दिया गया है । न ही युवाओं के पक्ष पर ध्यान दिया गया है । इस बजट से मंहगाई में और भी वृद्धि होगी ।
पूर्व अर्थ राज्यमंत्री ने माना कि इस बजट में निम्न वर्ग की उपेक्षा की गई है । पुँजीपतियों को ही इससे फायदा होगा ।
फोरम लोकतांत्रिक के उपाध्यक्ष रामेश्वर राय ने कहा कि यह बजट पूरी तरह हिमाल और पहाड पर केन्द्रित है ।
लालबाबू राउत फोरम नेपाल के उपाध्यक्ष ने कहा कि जनकपुर पर थोडा ध्यान देकर बाकी मधेश को नजरअंदाज कर दिया गया है । इस बजट ने मधेशी मनोविज्ञान को चिढाया है ।
गोविन्द चौधरी तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी ने आरोप लगाया कि यह बजट एमाले और काँग्रेस के चरित्र अनुसार ही है ।
एमाओवादी नेता रामकुमार शर्मा ने माना कि बजट में जनकपुर पर ध्यान दिया गया है पर सम्पूर्ण मधेश को नकारा गया है । देश की कुल जनसंख्या का ५० प्रतिशत मधेश में है और वहाँ २० प्रतिशत बजट है जबकि पहाड को ८० प्रतिशत दिया गया है ।
ये सारी प्रतिक्रियाएँ बजट की कमजोरियों को दिखाती हैं । किन्तु कुछ अच्छी बातें भी हैं मसलन क्रिकेट पर ध्यान दिया गया है, पिछडे वर्ग के बच्चों की शिक्षा को भी ध्यान में रखा गया है कुछ वृद्धाओं पर भी नजर डाली गई है । कल तक इंतजार था और अब आने वाले कल पर निगाहें हैं ।

