महोत्तरी के पिपरा में फूटा आक्रोश: संघीयता और प्रांतीय व्यवस्था के पक्ष में ‘जन जागरण अभियान’ का शंखनाद
महोत्तरी, पिपरा।, ५जुलाई ।
माना घना अंधेरा घना है, पर दिया जलाना कहां मना है।
इसी जज्बे और बुलंद हौसले के साथ महोत्तरी जिले के पिपरा गाउँपालिका में युवाओं के नेतृत्व वाले ‘जन जागरण अभियान’ ने कल शनिवार को सरकार और प्रशासन की तमाम बंदिशों को धता बताते हुए एक विशाल और ऐतिहासिक खुला सभा का सफल आयोजन किया।
मधेशी शहीदों के बलिदान को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस सभा का मुख्य उद्देश्य संघीयता (Federalism) को कमजोर करने और प्रदेश सभा (प्रांतीय संसद) को भंग करने की राजनीतिक साजिशों के खिलाफ आवाज बुलंद करना था।
प्रशासनिक धमकी और निगरानी के बीच युवाओं का शौर्य
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस सभा को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से धमकियां दी जा रही थीं और कार्यक्रम स्थल पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। इसके बावजूद, भारी संख्या में स्थानीय नागरिकों और युवाओं की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि वे अपने अधिकारों और संघीयता की रक्षा के लिए किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
इस ऐतिहासिक सभा का नेतृत्व Gen Z (नई पीढ़ी) के प्रखर अगुवा **एमडी नयीम रैन (MD Nayim Rain)**, प्रख्यात अभियंता **देवेंद्र कापर (Devendra Kapar)** और कानूनविद् **अधिवक्ता अमृत मिश्रा (Adv Amrit Mishra)** जैसे प्रबुद्ध युवाओं ने किया। इन युवा नेताओं की भागीदारी ने कार्यक्रम में एक नई ऊर्जा और दिशा फूंक दी है।
रास्वपा और बालेन सरकार पर वादाखिलाफ़ी का आरोप
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर तीखा प्रहार किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि:
बालेन सरकार ने संघीयता के पक्ष में बड़े-बड़े भाषण देकर जनता का वोट बटोरा था। लेकिन आज उन्हीं की पार्टी, राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा), पर्दे के पीछे से प्रदेश सभा को हटाने और संघीयता को कमजोर करने का खेल खेल रही है। यह मधेश और देश की जनता के साथ सरासर विश्वासघात है।”
प्रवुद्ध वक्ता श्री राकेश मिश्र ने सीधे शब्दों में सरकार को चेतावनी दी कि प्रांतीय व्यवस्था और संघीयता मधेशी शहीदों के खून और लंबे संघर्ष की बदौलत मिली है, इससे किसी भी प्रकार की छेड़खानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मधेशी राजनीति को ‘ट्रैक’ पर लाने का आह्वान
सभा में शामिल बुद्धिजीवियों और युवाओं ने एकजुट होकर संदेश दिया कि अब समय आ गया है जब मधेशी राजनीति को सही रास्ते (ट्रैक) पर लाया जाए। इसके लिए नेताओं ने अपील की है कि पिपरा की तरह ही देश के हर टोल, हर गाँव और हर बस्ती में ऐसी सांकेतिक विरोध सभाएं आयोजित की जाएं ताकि सोई हुई सरकार को जगाया जा सके।
देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
पिपरा पालिका से शुरू हुआ यह विरोध अब थमने वाला नहीं है। आयोजकों ने स्पष्ट कर दिया है कि पिपरा से सरकार को जो जबरदस्त चेतावनी दी गई है, वह महज एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में संघीयता और प्रांतीय अधिकारों की रक्षा के लिए इस विरोध सभा के स्वरूप को और बड़ा किया जाएगा तथा पूरे देश में इस तरह के जन जागरण अभियानों का आयोजन कर एक व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
इस सफल आयोजन के बाद क्षेत्र के युवाओं और आम जनता में अपने अधिकारों के प्रति एक नया गर्व और आत्मविश्वास देखा जा रहा है।







