*दिनकर जयंती समारोह*
राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जी के 115 वें जन्म दिवस पर दिनकर जयंती समारोह का आयोजन जानकी विद्या निकेतन रोजोपट्टी, सीतामढ़ी के सभागार में सीतामढ़ी जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के बैनर तले दिनांक 23. 9. 23 को किया गया. इस समारोह के आयोजक श्री दिनेशचन्द्र द्विवेदी तथा डा० सुभद्रा ठाकुर थी. सभा की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध उपन्यासकार रामबाबू नीरव ने की, वहीं मंच संचालन का दायित्व सम्मेलन के प्रधानमंत्री विमल कुमार परिमल ने निभाई. विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच की शोभा बढ़ा रही थी विख्यात कवयित्री सह प्राध्यापिका डा० पंकज वासनि. कार्यक्रम की शुरुआत दिया दिनकर जी के चित्र पर पुष्पांजलि देकर की गयी. तत्पश्चात् उनके छोटे पुत्र केदार सिंह के असामयिक निधन पर दो मिनट का रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी. कवि रामबाबू सिंह ने अपनी कविता के द्वारा राष्ट्रकवि को स्मरण किया वहीं कवि सह पत्रकार बाल्मीकि कुमार ने उनकी कृतियों पर चर्चा करते हुए उनके विशाल व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला. जहाँ समाजसेवी श्रीनिवास जी ने उनके खंडकाव्य हूंकार की समीक्षा की वहीं शिक्षाविद डा० शशिरंजन जी ने उनकी समस्त कृतियों पर तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया. रामकिशोर सिंह चकवा ने अपनी कविता के द्वारा राष्ट्रकवि के साहित्यिक अवदान को रेखांकित किया. वरिष्ठ साहित्यकार विमल कुमार परिमल जी ने दिनकर जी को ओज के साथ साथ शृंगार रस के कवि होने की बात कही, वहीं डा० पंकज वासनि ने उनकी काव्य कृतियों को अमर कृतियाँ बताते हुए कहा कि जब तक यह धरती रहेगी उनकी कृतियाँ जग को आलोकित करती रहेगी. डा० सुभद्रा ठाकुर के कवि के कई अनछुए प्रसंगों को उद्घाटित किया. सभाध्यक्ष रामबाबू नीरव ने दिनकर जी के ऐतिहासिक ग्रंथ “संस्कृति के चार अध्याय” पर प्रकाश डालते हुए इसकी तुलना देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक “भारत एक खोज” से की. अंत में दिनेशचन्द्र द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि दिनकर जी साहित्य के विभूति थे, जिन्होंने अपनी बहुमूल्य कृतियों द्वारा हिन्दी साहित्य के भंडार से भर दिया है. उपन्यासकार नीरव ने इसी मंच से घोषणा की कि उनके पांचवें उपन्यास “शंखनाद” का लोकार्पण इसी विद्यालय में दिनांक 8 अक्टूबर को एक भव्य साहित्यिक समारोह में किया जाएगा. उनकी इस घोषणा से जिला के साहित्यकारों में हर्ष की लहर दौड़ गयी.

