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क्या अभी १९५० की संधि संशोधन को विशेष मुद्दा बनाना उचित है ?

India-Nepal_Treaty_1950श्वेता दीप्ति, श्रावण ८ गते काठमान्डू । नेपाल भारत संयुक्त आयोग की द्विदिवसीय बैठक आगामी शनिवार को काठमान्डू में होने जा रहा है । नेपाल मे १९५० की संधि हमेशा से विवादों में रहा है । कुछ कट्टरपंथियो का दावा है कि शान्ति और मैत्री सम्बन्धी उक्त संधि असमानता के आधार पर  है । लकिन असमानता के कौन कौन सा मुद्दा पर संसोधन किया जाय यह अभी तक सामने नही आया है । यह माना जाता रहा है और इसमें समानता के आधार पर संशोधन की अपेक्षा  है । पूर्व में भी कई वार कोशिश की गई किन्तु कोई समाधान सामने नहीं आया है । यह केवल विरोध जताने तक ही सिमित रहा । आयोग की इस बैठक में समानता के आधार पर संशोधन का प्रस्ताव नेपाल के द्वारा रखा जाएगा । लेकिन यह संशोधन प्रस्ताव सार्वजनिक नही किया गया है । जनता को कुछ नही मालुम है इसके वारे मे । जिससे अधिकारियों की नियत पर शकां की जारही है । क्या भारतीय प्रधनमन्त्री मोदी के आने से पहले यह प्रस्ताव ले जाना उचित है ? यह ज्वलन्त प्रश्न बना हुआ है । साथ ही पंचेश्वर परियोजना और महाकाली संधि के विषयों को भी उठाया जाएगा । आखिर इतने वर्षों के बाद भी ये परियोजनाएँ क्यों नहीं कार्यान्वयन हुए हैं यह प्रश्न भारत के सामने रखा जाएगा और उनसे तत्काल इसपर अमल करने का अनुरोध भी किया जाएगा ।

पर राष्ट्रमंत्री महेन्द्र पाण्डे ने वक्तव्य दिया है कि नेपाल और भारत के बीच जितने भी समझौते हुए हैं, इस बैठक में उसकी समीक्षा की जाएगी । कार्यान्वयन, समस्या और समाधान पर ध्यान दिया जाएगा । स्रोत के अनुसार इन सारे मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी । इस बैठक में नेपाल विशेष रूप से उर्जा क्षेत्र में निवेश करने सम्बन्धी प्रस्ताव को रखने वाला था किन्तु विद्युत व्यापार समझौता सम्बन्धी प्रस्ताव विवादित होने के कारण फिलहाल यह अधर में लटकता दिखाई दे रहा है । अनुमान लगाया जा रहा है कि विवाद होने की वजह से भारत इस विषय से पीछे हट सकता है । इस विषय पर कैसे आगे बढ़ा जाय इस पर अभी भी प्रयास और बातचीत का सिलसिला जारी है । हालाँकि इस विषय पर भारतीय दूतावास लगातार स्पष्टीकरण देता आ रहा है ।
उक्त बैठक में व्यापार घाटा, पेट्रोल आयात आदि विषयों से भी सम्बन्धित ऐजेण्डा शामिल किया गया है । भारत के द्वारा बैठक में सुपुर्दगी संधि, पारस्परिक कानूनी सहायता समझौता और सीमा सुरक्षा सम्बन्धी विषयों को रखने का अनुमान किया जा रहा है । साथ ही यह कयास भी लगाया जा रहा है कि भारत संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद में सुधार करने हेतु प्रस्ताव में नेपाल से सहयोग के लिए विशेष आग्रह करेगा । भारत राष्ट्र स।घ के सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनने के लिए प्रयासरत है इसमें नेपाल का मत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा । अनुमान है कि भारत इस बैठक में सीमा में हुए धार्मिक अतिवादी समूह की गतिविधि, सीमा सुरक्षा संयन्त्र, सीमा में निषेधित पदार्थ की तस्करी आदि विषयों को भी रख सकता है ।
दूसरी ओर आयोग के इतने महत्वपूर्ण बैठक में कौन कौन से विषय रखने हैं इसके लिए सुझाव, सहमति के लिए परराष्ट्र मंत्रालय द्वारा आयोजित परामर्श बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं की उपस्थिति नग्णय रही । नेपाली काँग्रेस, प्रमुख प्रतिपक्षी एकीकृत माओवादी और नेकपा माओवादी के प्रमुख नेता बैठक में अनुपस्थित थे । परामर्श बैठक में एमाले के वरिष्ठ नेता झलनाथ खनाल की उपस्थिति थी । किन्तु काँग्रेस, एमाओवादी, और नेकपा माओवादी के एक भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे ।
बैठक में राप्रपा नेपाल के अध्यक्ष कमल थापा, राप्रपा अध्यक्ष पशुपति शमशेर राण, सूर्यबहादुर थापा, लोकेन्द्र बहादुर चन्द, नेकपा माले के महासचिव सी पी मैनाली, तमलोपा अध्यक्ष महन्त ठाकुर, मधेशी जनअधिकार फोरम लोकतान्त्रिक के अध्यक्ष विजय गच्छदार, मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव की उपस्थिति थी ।
देश संक्रमण काल से गुजर रहा हे इसलिए गम्भीर विषयों में सहमति अथवा समझौता नहीं किया जाएगा ऐसा स्रोत ने बताया है । परामर्श बैठक में उपस्थित नेताओं ने भी यही धारणा रखी है कि बहुत सारे विषयों को न उठाकर प्राथमिकता के आधार पर विषय चुनाव कर उन्हें मुख्यता के साथ रखा जाय और समाधान खोजा जाय । साथ ही पुरानी संधि जो कार्यान्वयन नहीं हो पाई है उस पर विशेष ध्यान दिया जाय ।



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