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नवरात्रा का पहला दिन..घर और मंदिरों में कलश स्थापना

 


काठमांडू, २८ असोज – शारदीय नवरात्रा का पहला दिन अर्थांत् कलश स्थापना । माँ दुर्गा का आगमन । नौ दिनों तक माँ के अलग नौ रुपों की पूजा अर्चना की जाएगी । माँ के नौ स्वरुपों में शैलपुत्री, बह्मचारिणी,चंद्रघंटा,कुष्मांडा,स्कंन्दमाता, कात्यायनी,कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री की पूजा की जाती है । इस बार माँ हाथी पर सवार होकर पृथ्वी लोक पहुँची है । घर घर में उनकी पूजा हो रही है । आज उनके प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होगी. । आज के दिन घर तथा मंदिर मे विधिपूर्वक कलश को स्थापित किया जाएगा । ९ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ होगा । क्या बच्चे और क्या बड़े सभी माँ भवानी के रंग में रंगे हुए नजर आएंगे ।
पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा । मां शैलपुत्री का जन्म शैल या पत्थर से हुआ, इसलिए इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता आती है । मां शैलपुत्री की उपासना से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
मां को वृषारूढ़ा, उमा नाम से जाना जाता है । मां को हेमवती भी कहा गया है । नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए । नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना कर मां दुर्गा को आह्वान करे ं। मां शैलपुत्री आदिशक्ति माँ दुर्गा की प्रथम स्वरूप हैं । मां शैलपुत्री की कृपा से निडरता प्राप्त होती है और हर प्रकार का भय दूर हो जाता है। मां शांति, धन, विद्या, यश, कीर्ति और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल शोभायमान है। इनका वाहन वृषभ है। माता शैलपुत्री की उपासना से मूलाधार चक्र जागृत होता है ।

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