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आइये जानें, कलश स्थापना में रखे नारियल का क्या करे?

 

नवरात्रि में पूरे 9 दिन पूजा-पाठ के साथ व्रत रखा जाता है. दरअसल, नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है ‘9 रातें’. इन 9 रातों और 10 दिनों के दौरान भक्त शक्ति की देवी मां जगदंबा के नौ रूपों की पूजा करते हैं. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना के साथ इसकी शुरुआत होती है. इस दौरान एक नारियल रखकर कलश स्थापना या घटस्थापना होती है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि के बाद इस नारियल का क्या होता है. हालांकि, इस तरह के सवाल कई लोगों के मन में होते हैं.
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जिस श्रद्धापूर्वक कलश स्थापना होती है, ठीक उसी तरह इसे हटाना भी जरूरी होता है. यदि आप गलत तरीके से नारियल को हटाते हैं या नारियल का प्रयोग करते हैं तो इससे इसका अपमान होता है और आपको नवरात्रि में किए गए पूजा-व्रत का फल नहीं मिलता है.

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पूजा स्थल पर रखें: नवरात्रि में स्थापित किए गए नारियल की अनदेखी नहीं करनी चाहिए. क्योंकि, कई लोग नवरात्रि समाप्त होने पर नारियल गलत तरह से हटाते या प्रयोग कर लेते हैं. ऐसा करने से उन्हें 9 दिन की पूजा का फल नहीं मिल पाता. बता दें कि, कलश पर रखे नारियल में माता रानी की विशेष कृपा होती है. ऐसे में नवरात्रि के बाद इस नारियल को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर पूजा स्थल पर रखें. ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

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प्रसाद के रूप में खाएं: नवरात्रि में स्थापित कलश के ऊपर रखे नारियल को 9 दिन बाद विधि-विधान से हटाना चाहिए. इसके बाद इसको आप नदी या बहते पानी में प्रवाहित कर सकते हैं. या फिर बेहतर होगा कि आप इसको प्रसाद के रूप में कन्याओं को बांटें और स्वयं भी खाएं. ऐसा करने से आप मां से सुख-समृद्धि पा सकते हैं.

चावल भी प्रवाहित करें: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के बाद पूजा की सामग्री को जल में प्रवाहित करना सबसे उत्तम माना जाता है. चाहें वह नारियल हो या फिर कलश के नीचे रखे चावल. नवरात्रि के बाद सभी को जल में प्रवाहित जरूर करना चाहिए. दरअसल, ऐसा करने से कोई दोष नहीं लगता और पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है.

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