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नकली भूटानी शरणार्थी प्रकरण… बंदियों को नहीं किया गया रिहा

 

काठमांडू, १८ मंंसिर – नकली भूटानी शरणार्थी प्रकरण में उच्च अदालत ने जेल में रह रहे लोगों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया था । लेकिन आदेश के बाबजूद बंदियों को रविवार तक नहीं छोड़ा गया । यह आदेश शुक्रवार को उच्च अदालत पाटन के न्यायाधीश जनक पाण्डे और प्रकाश खरेल के इजलास ने उक्त प्रकरण में संलग्नता का अभियोग लगे व्यक्तियों में कुछ को जमानत और कुछ को साधारण तारीख में छोड़ने का आदेश दिया था । लेकिन किसी को भी रविवार तक नहीं छोड़ा गया है । वे अभी भी जेल में ही हैं ।
पाण्डे और खरेल के इजलास ने जिला अदालत काठमांडू को असार १ के आदेश अनुसार पुर्पक्ष के लिए जेल में रहे पूर्वगृहमन्त्री टोपबहादुर रायमाझी तथा तत्कालीन गृह सचिव टेकनारायण पाण्डे के साथ ही अन्य प्रतिवादी इन्द्रजित राई, केशवप्रसाद दुलाल, सानू भण्डारी, सागर राई, विक्रम (गोविन्दकुमार चौधरी), सन्देश शर्मा और आङटावा शेर्पा को जमानत पर छोड़ने को अस्वीकार किया था ।
लेकिन जेल में रहे बाकी अभियुक्त मध्ये पूर्वगृहमन्त्री बालकृष्ण खाण के पीए नरेन्द्र केसी और शमशेर मियाँ को जनही १० लाख, टेकनाथ रिजाल, हरिभक्त महर्जन और रामशरण केसी को जनही १५ लाख और सन्दीप रायमाझी को ३० लाख धरौटी पर छोड़ने का उक्त इजलास ने आदेश दिया था । टंककुमार गुरुङ, केशव तुलाधर, आशिष बुढाथोकी तथा लक्ष्मी महर्जन को भी साधारण तारीख में छोड़ने का आदेश दिया था ।
आदेश अनुसार रविवार को नरेन्द्र केसी, हरिभक्त महर्जन और शमशेर मियाँ ने जिला अदालत में धरौटी दे दिया था लेकिन उन्हें जेल से मुक्त नहीं किया गया है । ये जानकारी कारागार प्रशासन ने दी है । उनका कहना था कि ‘धरौटी देने को जो पत्र दिया गया था वो समय से बाद पहुँचा था । शाम के ६ बजे चुके थे । कारगार प्रशासन का कहना कि अगर पत्र समय पर भी आ जाता तब भी कुछ नहीं किया जा सकता था क्योंकि इसमें बहुत कुछ कारवाई करनी होती है जिसमें समय लगता ही है । सोमवार को प्रहरी के जिम्मे में उन्हें लगाया जाएगा ।
इसी तरह नकली भूटानी शरणार्थी प्रकरण में पुर्पक्ष के लिए जेल में रह रहे पूर्वगृहमन्त्री खाण को जेल में ही रखा जाए या छोड़ दिया जाए यह निर्णय अभी तक नहीं हो पाया है । इसमें भी अभी कुछ दिन और लगेंगे ।

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