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लुम्बिनी में भारत–नेपाल सांस्कृतिक महोत्सव



काठमांडू, मंसिर २३ – काठमांडू स्थित भारतीय राजदूतावास ने लुम्बिनी विकास कोष और लुम्बिनी बौद्घ विश्वविद्यालय के सहकार्य में मंसीर २२ गते लुम्बिनी में भारत–नेपाल सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजना किया ।
महोत्सव में बौद्घ धर्म को केन्द्र में रखकर भारत और नेपाल के समृद्घ सांस्कृतिक सम्पदा तथा परम्परा को दिखाया गया । महोत्सव का मुख्य आकर्षण का केन्द्र भारत के लद्दाख स्थित हेमिस मठ के भिक्षु कलाकारों द्वारा तैयार किए गया ‘स्याण्ड मण्डला’ चित्रकला प्रदर्शनी, प्रख्यात फोटोग्राफर बेनोय बहल के तस्वीर में आधारित फोटो प्रदर्शनी, भारतीय और नेपाली परिकार सहित के स्ट्रिट फूड फेस्टिवल और साँस्कृतिक कार्यक्रम रहा ।


नेपाल के लिए भारतीय राजदूत श्री नवीन श्रीवास्तव, माननीय संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मन्त्री श्री सुदन किराती और लुम्बिनी प्रदेश के माननीय मुख्यमन्त्री श्री डिल्ली बहादुर चौधरी ने संयुक्त रुप में उक्त महोत्सव का उद्घाटन किया ।
महोत्सव के उद्घाटन समारोह में बौद्घ सम्पदा स्थल के आकर्षक तस्वीर को रखकर फोटो प्रदर्शनी को भी समावेश किया गया था । प्राचीन काल से अभी तक बौद्घ धर्म के साथ सम्बन्धित स्मारक और कला सम्पदा के बारे में विस्तृत जानकारी भी इस फोटो प्रदर्शनी में दिया गया था ।
राजदूत श्रीवास्तव, माननीय मन्त्री किराती और माननीय मुख्यमन्त्री चौधरी ने स्याण्ड मण्डला चित्रकला प्रदर्शनी का संयुक्त रुप में उद्घाटन किया था । स्याण्ड मण्डला चित्र एक परम्परागत बौद्घ कला है जिसमें रंगीन बालु का प्रयोग कर जटिल डिजाइनों की सिर्जना की जाती है । प्रदर्शनी में भारत के लद्दाख स्थित हेमिस मठ के भिक्षु कलाकारों ने सीप और शिल्पकारिता प्रस्तुत की थी ।


शाम को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था । जिसमें भारत और नेपाल के कलाकारों अपनी अपनी कला का प्रदर्शन किया था । भारत के लेहस्थित थिक्से मठ के कलाकारों ने चाम नृत्य, दूतावास स्थित स्वामी विवेकानन्द सांस्कृतिक केन्द्र के कलाकारों ने भरतनाट्यम, स्थानीय कलाकारों ने थारु नाच और नेपाल के सुकर्म ब्याण्ड ने प्रस्तुत किए तथा सितार वादन ने दर्शकों का मन जीत लिया
सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रस्तुति के बाद लुम्बिनी विश्व शान्ति तथा सद्भाव आगन्तुक केन्द्र में स्ट्रिट फुड फेस्टिवल का भी आयोजन किया गया था । उक्त फूड फेस्टिवल में पकोड़ा, थारु शैली का तरुवा, साबुदाना वडा, नेवारी परिकार बारा, जेरी और अन्य विभिन्न प्रकार के भारतीय और नेपाली पकवान भी रखा गया था ।


मंसीर २२ गते की सुबह लुम्बिनी बौद्घ विश्वविद्यालय में महोत्सव के ही एक हिस्से के रुप में “सामुदायिक विकास और विश्वव्यापी कल्याण में बौद्घ शिक्षा का प्रभाव अन्वेषण” शीर्षक के एक शैक्षिक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया था । बौद्घ दर्शन के बारे में जानकार भारत और नेपाल के प्रख्यात विद्वानों ने उक्त गोष्ठी में भाग लिया और आधुनिक संसार में बौद्ध शिक्षा की सान्दर्भिकता के बारे में अपनी अपने अपने विचारों को रखा था ।


यह महोत्सव अब हरेक वर्ष लुम्बिनी में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है । स्याण्ड मण्डला चित्रकला प्रदर्शनी तथा फोटो प्रदर्शनी आगन्तुकों के लिए महोत्सव के दूसरे दिन अर्थात मंसीर २३ गते को भी खुला रखा गया है ।



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