जनकपुर मे मन्त्री निधि का विरोध और स्वागत
कैलास दास,जनकपुर, साउन २४ । भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मन्त्री विमलेन्द्र निधी कल्ह जब जनकपुर पहुँचे तो मन्त्री निधि के स्वागत के लिए करीब ५ सौ से भी ज्यादा मोटरसाइकल विमान स्थल पहुँचा था । विरोध कार्यक्रम को लेकर सैकडौं की संख्या में सुरक्षाकर्मी भी तैनात किया गया था ।
मन्त्री निधि ने शनिवार ही पार्टी कार्यालय में प्रेस कन्फ्रेनस करके कहा कि हम जनकपुर का विकास चाहते हैं । बहुत जल्द ही धनुषा मे विश्व विद्यालय बनेगा । यहाँ के विकास के लिए बजेट की भी व्यवस्था हो चुकी है । कुछ लोग वैसे ही बदनाम करने में लगे है । मुझे उसकी चिन्ता नही है । हम विकास किये है और करते रहेगें ।
उनके गृह जिला जनकपुर में ही ‘विकास विरोधी मन्त्री निधि मुर्दावाद’ के नारा के साथ काला झण्डा भी दिखाया गया ।
एशियाली विकास बैंक के सहयोग में जनकपुर के विकास के लिए करीब २ अर्व का एकीकृत शहरी विकास आयोजना मन्त्री निधि के कारण ही फिर्ता होने की सम्भावना बढ गया है रयही कहते हुए नगर स्तरीय संयन्त्र ने शनिवार को काला झण्डा दिखाया था ।
नेपाली काँग्रेस धनुषा द्वारा आयोजित विपीकी शतवार्षिकी कार्यक्रम मे जनकपुर आए मन्त्री निधि को विमान स्थल के मुख्यद्वार (श्याम चौक)में सर्वदलिय संयन्त्र सुबह ८ बजे कला झण्डा लेकर खडे थे । निधि ११ बजे के फ्लाईट से ही आने की सूचना मिली थी लेकिन वे २ बजे के फ्लाईट से जनकपुर आये ।
एकीकृत शहरी विकास आयोजना ने धनुषा के फुलगामा में लैण्डफिल के लिए जमीन का प्रस्ताव करके मिटी परीक्षण तथा बहुत सारे काम आगे बढ चूका है । लेकिन निधि का कहना है कि यह जमीन राजर्षि जनक विश्वविद्यालय के लिए २० वर्ष पहले ही लिज पर ले लिया गया है । इस स्थान पर किसी भी हालत में ल्याण्डफिल नही होना चाहीये । जीसकी वजह से आयोजना जनकपुर से अन्यत्र जाने की सम्भावना बढ गयी है ।
संयन्त्र ओरोप भी लगाया है कि कोई भी नेता विकास चाहता है लेकिन मन्त्री निधि शक्ति के बल पर धनुषा के विकास मे अवरोध बने हुए है । मधेशी जनअधिकार फोरम लोकतान्त्रिक के नेता संजय चौधरी के अनुसार जनकपुर के विकास के लिए करीब २ करोड रुपैया अगर जनकपुर से चला गया तो इसका जिम्मेवार निधि ही होगें । उन्होने अपील भी कीया है कि निधि किसी हालत में यह योजना जनकपुर से नही जाने दे ।
स्मरण रहे कि एडिबी स्टेरिङ्ग कमिटी कुछ दिन पहले जनकपुर नगरपालिका के नाम मे एक पत्र भी काट चुका है कि अगर ल्याण्डफिल साइट विवाद समाधान नही हुआ तो यह आयोजना दुसरी जगह भी जा सकता है । इसलिए जितनी जल्द हो यह परियोजना के लिए ल्याण्डफिल साइट उपलब्ध कराया जाय ।

