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भारत का ७५वां गणतन्त्र दिवसः नेपाल-भारत संबंध को लेकर काठमांडू में विचार संगोष्ठी

काठमांडू, २८ जनवरी । भारत का ७५वां गणतन्त्र दिवस के अवसर पर नेपाल भारत मैत्री समाज ने कांठमांडू में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया है । परराष्ट्र मंत्री एनपी साउद की प्रमुख अतिथ्य में शनिबार सम्पन्न विचार संगोष्ठी में विभिन्न राजनीतिक पार्टी के नेता तथा सामाज के प्रबुद्ध वर्ग की उपस्थिति रही । समारोह नेवल भारत मैत्री समाज के अध्यक्ष प्रेम लश्करी की अध्यक्षता में हुई ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए परराष्ट्र मंत्री एनपी साउद ने कहा कि नेपाल भारत संबंध सरकार–सरकार बीच सिमित संबंध नहीं है, दो देशों के बीच नागरिक–नागरिक बीच का संबंध है । उनका मानना है कि अगर दो सरकार के बीच किसी विषय को लेकर वैमनस्यता होती है तो नागरिक स्तर से उसको अस्वीकार किया जाता है । मन्त्री साउद ने आगे कहा– ‘नेपाल–भारत संबंध को भुगोल ने साथ दिया है, सांस्कृतिक विरासत ने साथ दिया है । यह सकारात्मक है । ऐसे संबंध को दोनों देशों की समृद्धि, विकास, शान्ति और राजनीतिक स्थिरता के साथ जोड़ना चाहिए ।’
इसीतरह मन्त्री साउद ने कहा कि नेपाल–भारत बीच खुली सीमा है, इसको लेकर कभी कभार विवाद हो जाता है । उन्होंने कहा कि सुस्ता और कालापानी को लेकर जो विवाद है, उसको लेकर राजनीतिक ‘प्रपोगाण्ड’ नहीं होना चाहिए । मन्त्री साउद ने कहा कि इस विषय को लेकर उच्च राजनीतिक नेतृत्व में कुटनीतिक संवाद जारी है और कुटनीतिक पहल से ही समस्या का समाधान किया जाएगा । मन्त्री साउद ने यह भी कहा कि नेपाल भारत बीच व्यापार में जो असन्तुलन है, विद्युत व्यपार से उसमें सन्तुलन कायम हो सकता है । उन्होंने यह भी कहा है कि भारतीय दूतावास की ओर से नेपाल में जो आर्थिक सहयोग और विकास निर्माण संबंधी काम हो रहा है उसको और भी प्रभावकारी बनाना होगा । उनका कहना था कि विकास परियोजना भले ही कम हो, लेकिन प्रभावकारी हो । इसीतरह मन्त्री साउद ने कहा कि नेपाल भारत कृषि व्यापार में जो असन्तुलन है, उसको भी ठीक करना होगा । उन्होंने आगे कहा– ‘नेपाल से निर्यात होनेवाला कृषि उत्पादन अधिक कम है । आयात–निर्यात में समानता की दृष्टि से देखते हैं तो नेपाल पीछे पड़ जाएगी, हमारी संवेदनशीलता को देखनी होगी और नेपाल को विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिए ।’
पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झा ने कहा कि भारत की सहयोग बिना नेपाल की अस्तित्व संकट में पड़ सकता है । उनका मानना है कि दैनिक उपभोग्य सामाग्रियों में आज नेपाल भारत के साथ निर्भर है । पूर्व उपराष्ट्रपति झा ने यह भी कहा कि बिगत की तुलना में आज के दिन नेपाल–भारत बोर्डर में समस्या बढ़ती जा रही है । उनका कहना है कि बोर्डर पास करते वक्त दोनों देश कें सुरक्षाकर्मी नागरिकों को दुःख देती है, सवारी साधन लेकर बोर्डर के पास जाने से रोका जाता है । उनका मानना है कि बोर्डर के आसपास रहनेवालों को इस तरह की कठिनाइया नहीं होनी चाहिए ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए भारतीय दूतावास मिसन उप–प्रमुख प्रशन्न श्रीवास्तव ने कहा कि जिस देश में नागरिक–नागरिक बीच का संबंध मजबूत रहता है, उस देश की आपसी संबंध को कोई भी नहीं बिगाड सकता । उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल की विकास परियोजना, सूचना प्रविधि के क्षेत्र में भारतीय सहयोग सदैव जारी रहेगा । बाढ़, भू–स्खलन, भूकंप जैसे प्राकृतिक विपत्तियों में भारत की सहयोग पर चर्चा करते हुए मिसन उप–प्रमुख श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय सहयोग में आज भी नेपाल में कई पुननिर्माण का काम जारी है । उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल–भारत बीच नागरिक तह में जो संबंध है, उसको और भी मजबूत बनाने में नेपाल भारत मैत्री समाज जैसे संस्थाओं की गतिविधि सहयोगी बन जाती है ।
लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी के नेता तथा पूर्व मंत्री राजेन्द्र महतो ने कहा कि नेपाल–भारत बीच भौगोलिक, सामाजिक, भाषिक तथा सांस्कृतिक समानता तो है, लेकिन आर्थिक समानता नहीं है । उनका मानना है कि भारत आर्थिक दृष्टिकोण आज विश्व में ही तीसरे शक्तिशाली राष्ट्र बनने जा रही है, लेकिन पडोसी देश नेपाल आर्थिक रुप में कमजोर है, युवा नौकरी के तलास में विदेश जाने के लिए बाध्य है । नेता महतो ने कहा कि विकास और समृद्धि के लिए राजनीतिक तथा कानूनी स्थिरता होनी चाहिए, जो नेपाल में नहीं है । उन्होंने आगे कहा– ‘भारत में ७५वें साल से एक ही संविधान है, नागरिकों की चाहत अनुसार उसमे कई बार संशोधन होता आया है, लेकिन नेपाल ने ७० साल में ७ संविधान बनाया, तब भी नागरिकों अधिकार नहीं मिल रही है ।’ उनका मानना है कि नेपाल के शासकों ने नागरिकों की भावना अनुसार संविधान नहीं बनाया है । नेता महतो ने कहा कि प्राकृतिक साधन स्रोत से नेपाल धनी है, लेकिन उसका सदुपयोग नहीं हो रहा है । उन्होंने कहा कि प्राकृतिक साधनस्रोत को सदुपयोग करने के लिए भी नेपाल को मित्र राष्ट्र की सहयोग जरुरत है ।
इसीतरह नेकपा एमाले के नेता राजन भट्टराई ने कहा कि भारत आज विश्व जगत में उदयीमान शक्तिराष्ट्र है, उससे नेपाल को लाभ लेनी चाहिए । उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध ही नहीं, नेपाल की आर्थिक निर्भरता भी भारत के साथ जुड़ा हुआ है । उनका मानना है कि नेपाल की सफलता में भारत की सहयोग अनिवार्य है । नेता भट्टराई ने यह भी कहा कि भारत के साथ वैमनस्यता कर नेपाल आगे नहीं बढ़ पाएगी ।
नेकपा माओवादी के नेता तथा पूर्व मंत्री देवेन्द्र पौडेल ने कहा कि नेपाल–भारत साथ–साथ आगे बढ़ना होगा । उनका मानना है कि भारत की आर्थिक प्रगति, सूचना प्रविधि में हो रहे विकास से नेपाल को भी लाभ मिलनी चाहिए । इसीतरह नागरिक समाज के अगुवा डा. सुन्दरमणि दीक्षित का मानना है कि आज के दिन राजनीतिक नेतृत्व में रहे अधिकांश नेपाली नेता तथा प्रशासकों की गुरुकुल भारत है, इसीलिए गुरु और चेला की संबंध विशिष्ठ है । उन्होंने कहा कि इस संबंध से नेपाल को भी फायदा होनी चाहिए । डा. दीक्षित ने प्रश्न किया– ‘गुरुकुल हर क्षेत्र में आगे रहता है, लेकिन चेला क्यों पीछे है ?’ उनका मानना है कि नेपाल–भारत संबंध अन्य देशों की तरह नहीं है । उन्होंने यह भी प्रस्ताव किया है कि संवैधानिक और कानूनी रुप में ही नेपाल–भारत संबंध को परिभाषित करना होगा । डा. दीक्षित ने कहा– ‘भारत के लिए नेपाल को एक अलग ही विषेश नीति निर्माण करना होगा ।’ उनका मानना है कि भारत के साथ नेता और राजनीतिक पार्टी की अपनी–अपनी नीति है, जो समस्या का कारण भी बनता जा रहा है
नेपाल भारत मैत्री समाज के अध्यक्ष प्रेम लस्करी ने कहा कि नेपाल भारत बीच सिर्फ भाषा, संस्कृति और नागरिक के बीच का सम्बन्ध नहीं है, नदी और देवी देवताओं के साथ भी आपसी संबंध है । उनका मानना है कि भारतीय प्रधानमन्त्री की ओर से नेपाल के तीर्थस्थलों का भ्रमण होना इसका प्रमाण है । अध्यक्ष लस्करी ने कहा कि इसतरह की समानता से ही दो देशों की संबंध मजबूत बना है । उन्होंने यह भी कहा कि दो देशों के आपसी संबंध के लिए नेपाल भारत मैत्री समाज हरदम संवेदनशील है ।

प्रस्तुति: लिलानाथ गौतम



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