जनता में जो निराशा छाई है उसे आशा में बदलना है – ओली
काठमांडू, फागुन १६ – एमालेका अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने कहा है कि सरकार और सत्ता में लिप्त होने के कारण मन्त्री अपनी नैतिकता को खो रहे हैं साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोड़ दिया कि जनता में बहुत ज्यादा निराशा छाई है उसे आशा में बदलना है ।
विराटनगर में सञ्चारकर्मी से बातचीत करते हुए ओली ने नैतिकता को लेकर भी बातें की और कहा कि ये तो नैतिकता की बात है कि अगर स्वयं या अपने मन्त्रालय के विषय में विवाद सिर्जना होती है तो मंत्री को राजीनामा दे देना चाहिए । विवाद सिर्जना होने पर ही नैतिकता के आधार में राजीनामा देना चाहिए ।
ओली के कहा कि जनता के मृत्यु का कारण दिखाए जाने के बाद भी मन्त्री ने राजीनामा नहीं दिया । राजीनामा देकर नैतिकता का परिचय प्रस्तुत करना चाहिए । ‘मन्त्री के ही कारण जनता की मृत्यु हुई और इस घटना में फंसने के बाद ही सरकार के मन्त्री को तत्काल ही नैतिकता के आधार पर राजीनामा दे देना चाहिए था । लेकिन ऐसा नहीं हुआ है । ऐसा नहीं कर केवल झंडा हाथ में लेकर चलना मिलेगा क्या ?
अध्यक्ष ओली ने कहा कि –एमाले अभी मिसन ८४ में केन्द्रीत है । मिसन ८४ को लेकर आगे बढ़ रही एमाले गठबन्धन की सरकार के उलट फेर के खेल में शामिल नहीं है । ‘मिसन ८४ द्वारा राष्ट्रीय शक्ति को निर्णायक तह में विकास करना होगा । अभी के सरकार को बदलना, गठबन्धन बदलना इसतरह के खेल में एमाले नहीं है । गठबन्धन के कारण राष्ट्रीयता, सुशासन, विकास कमजोर होती जा रही है । जनता में जो निराशा छाई है उसे आशा में बदलना है ।’


