नवनीत कौर की तीन कविताएं, 1 होली 2 चिड़िया रानी 3 हमारी धरती
“होली”
आया – आया, होली का त्योहार है आया,
अपने साथ ढेर सारी खुशियाँ है लाया |
आज सभी गिले- शिकवे भूल कर,
दुश्मन को भी गले से लगाएंगे,
इस त्योहार को आज हम प्यार से मनाएंगे।
हरा, गुलाबी, नीला, पीला,
हर रंग एक-दूसरे को लगाएंगे,
और तरह- तरह के पकवान भी खाएंगे,
इस त्योहार को आज हम प्यार से मनाएंगे।
पानी बरबाद नहीं करेंगे,
साफ- सफाई का ध्यान भी ज़रूर रखेंगे,
होली का महत्व स्वंय समझेंगे और दूसरों को भी समझाएंगें,
इस त्योहार को आज हम प्यार से मनाएंगे।
आया – आया, होली का त्योहार है आया,
अपने साथ ढेर सारी खुशियाँ है लाया |
“चिड़िया रानी”
आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ,
आज एक कहानी।
कहानी है यह चिड़िया की,
जिसका नाम था रानी।
सुबह – सवेरे उठकर रानी दाना चुगने जाती थी,
वापिस आकर अपने बच्चों को चोंच भर दाना वह खिलाती थी,
शाम होते ही वह उनकी अध्यापक बन जाती थी,
उनको ऊॅंची उड़ान भरने की सीख वह सिखाती थी,
तिनका – तिनका जोड़ – जोड़कर अपना आशियाना वह सजाती थी,
इसलिए वह मेहनत की रानी भी कहलाती थी,
चींं – चीं कर वह अपने मीठे बोल से सबके मन को बहलाती थी,
होठों पर एक मीठी – सी मुस्कुराहट वह ले आती थी |
“हमारी धरती”
क्यों तू इतना बेपरवाह हो गया, ऐ इंसान ?
जो पर्यावरण का कर रहा है आए दिन नुकसान |
पेड़ों को काटकर, चारों ओर गंदगी फैलाकर,
क्यों हमारी धरती माँ को कर रहा है परेशान ?
इस पर्यावरण ने हमें कितना कुछ दिया है,
साँस लेने के लिए हवा,
पीने के लिए जल,
खाने के लिए भोजन,
और रहने के लिए भूमि,
परन्तु बदले में हमसे कुछ नहीं लिया है।
तुझमें इतनी भी समझ नहीं ?
ये धरती भी तो तेरी ही है,
इसका थोड़ा-सा तो रख ले तू ध्यान,
क्यों हमारी धरती माँ को कर रहा है परेशान ?
बेवजह भूमि को बंजर न तू बना,
सड़कों के दोनों तरफ पेड़ तू लगा,
बागों को फूलों से तू महका,
कूड़ेदान का प्रयोग करने की आदत तू अपना,
अपनी धरती को हरा और स्वच्छ तू बना ।।

पता — Rz-605/21, B-3, Upper Ground Floor, Tughlakabad Extn; New Delhi -19
फोन नम्बर — 7836904330
नवनीत कौर
पता — Rz-605/21, B-3, Upper Ground Floor, Tughlakabad Extn; New Delhi -19
फोन नम्बर — 7836904330



