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१७ अरब की पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजना अनुदान में



काठमांडू, वैशाख १८ – लगभग १७ अरब के दो नए प्रोजेक्ट प्राकृतिक गैस तथा खाना पकाने वाली एलपी गैस पाइप लाइन में भारतीय आयल कॉर्पोरेसन (आईओसी) सकारात्मक हुई है । गत मंगलवार आईओसी और नेपाल आयल निगम के उच्च अधिकारियों के बीच आईओसी के केन्द्रीय कार्यालय मुम्बई में हुई एक बैठक में यह सहमति हुई है ।
निगम के कार्यकारी निर्देशक चण्डिकाप्रसाद भट्ट के नेतृत्व में नायब कार्यकारी निर्देशक दीपक बराल, नायब कार्यकारी निर्देशक वीरेन्द्र गोइत, उपनिर्देशक मनोज कुमार ठाकुर सहित की टीम औपचारिक मुलाकात के लिए आईओसी पहुँची थी ।
पेट्रोलियम पाइपलाइन को मुख्य मुद्दा बनाने वाले निगम की टीम ने आईओसी की आपूर्ति के कार्यकारी कार्यकारी निर्देशक संजय परासर सहित उच्च अधिकारियो की टीम से मुलाकात की । इस मुलाकात में ही यह सहमति हुई कि दो पाइपलाइन और एक टर्मिनल अनुदान से बनाए जाए । ‘आईओसी के प्रतिनिधियों से हुई मुलाकात में हमने पेट्रोलियम पाइपलाइन अनुदान कर देने का प्रस्ताव किया था । दो पाइपलाइन और एक टर्मिनल बना देने के लिए आईओसी सकारात्मक है ।
निगम के प्रवक्ता मनोज ठाकुर ने कहा, ’’आईओसी ने तालुक मंत्रालय में भी सहायता प्रदान करने और पहल करने की प्रतिबद्धता दी है।’
पेट्रोलियम परियोजना के बारे में आईओसी और निगम की संयुक्त टीम अध्ययन कर चुकी है । इस अध्ययन अनुसार दो पाइपलाइन और एक ग्रिनफिल्ड टर्मिनल (भण्डारण गृह) बनाने में लगभग १७ अरब की लागत लगेगी । ठाकुर के अनुसार लागत खर्च अनुसार अमलेखगंज–चितवन पेट्रोलियम पाइपलाइन निर्माण में ४ अरब ३८ करोड़ (२७४ करोड भारु), सिलीगुड़ी–झापा पेट्रोलियम पाइपलाइन निर्माण में ४ अरब ६० करोड़ रुपये (२८८ करोड भारु) और चाराली स्थित ग्रिनफिल्ड टर्मिनल के निर्माण में ८ अरब ३ करोड रुपये (५०२ करोड़ भारु) लगने का उल्लेख किया गया है । इस तरह इन तीनों प्रोजेक्ट की लागत करीब १७ अरब १ करोड़ होगी ।
इसी तरह चितवन के लोथार के बारे में भी अध्ययन किया गया । जिसमें निष्कर्ष निकला कि ग्रीनफील्ड टर्मिनल बनाने में ९ अरब ८८ करोड़ (टज्ञड करोड़ भारु) की लागत लगेगी । लोथार में निगम को स्वयं ही निवेश करना होगा । पिछले साल मई में प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल की भारत यात्रा के दौरान इस परियोजना को लेकर एक समझौता भी हुआ था । भारतीय निवेश से दो पाइपलाइन और एक ग्रीनफील्ड टर्मिनल बनाने पर समझौता हुआ ।

इस परियोजना के विषय में गत जेठ में प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल के भारत भ्रमण के क्रम में भी समझौता हुआ । भारत की लगानी में दो पाइपलाइन और एक ग्रिनफिल्ड टर्मिनल बनाने पर समझौता हुआ था । इसके लिए प्रधानमन्त्री दाहाल और भारतीय समकक्षी नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में तत्कालीन उद्योग वाणिज्य तथा आपूर्तिमन्त्री रमेश रिजाल और भारतीय पेट्रोलियम मन्त्री हरदीप सिंह पुरी ने समझौता पत्र आदान प्रदान किया था ।
समझौता पत्र के अनुसार ६ महीने के भीतर सभी गृहकार्य करके निर्माण के काम शुरु किया जाएगा और ५४ महीने में तीनों ही परियोजना को सम्पन्न कर लिया जाएगा । लेकिन मोडालिटी के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका ।
निगम कार्यकारी निर्देशक भट्ट ने कहा कि चर्चा सकारात्मक रही और वे आईओसी अनुदान से परियोजना बनाने को तैयार हैं । उन्होंने कहा कि जल्दी ही दोनों देशों के बीच मन्त्रीस्तरीय बैठक करेंगे और इससे संबंधी सम्झौता भी करेंगे । इसके लिए मन्त्रालय में पहल भी कर रहे हैं ।
प्रवक्ता ठाकुर ने कहा, “आईओसी ने आईओसी से बिटुमिन खरीदने और इसे नेपाल में एक वितरक के माध्यम से बेचने के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बिटुमिन कारोबार करने से पहले उसका मापदण्ड बनाया जाएगा । इसके लिए भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मन्त्रालय के साथ सहकार्य कर मापदण्ड बनाया जाएगा ।
निगम के कार्यकारी निदेशक भट्ट ने कहा कि – आईओसी और निगम के बीच दो नए परियोजनाओं – प्राकृतिक गैस और खाना बनाने वाली एलपी गैस पाइपलाइनों पर भी सकारात्मक चर्चा हुई है । भट्ट ने कहा कि मोतिहारी–पथलैया–सर्लाही एलपी गैस पाइपलाइन का निर्माण भी प्रस्तावित है ।
उन्होंने बताया कि सर्लाही में निगम का ही १६ बिघा जमीन है वहाँ गैस पाइपाइन की सम्भावना है । निगम ने यह प्रस्ताव रखा । अभी रक्सौल से मुजफ्फरपुर तक १४० किमी दूर से गैस बुलेट से पहुंचायी जाती है । आईओसी पहले ही मोतिहारी तक गैस पाइपलाइन का विस्तार कर चुकी है ।
निगम के अधिकारी ने यह भी बताया कि – बुलेट से गैस ट्रांसपोर्ट करने में सालाना करीब ६ अरब रुपये खर्च हो रहे हैं । निगम के अधिकारियों के मुताबिक पाइप लाइन बनने से अरबों रुपये का नुकसान होने से बच जाएगा ।



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