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हम बाध्यतावश जसपा से अलग हुए हैं : रेणु यादव

 

काठमान्डू 11मई

जसपा से अलग हुईं नेत्री रेणु यादव ने एक अन्तर्वार्ता में कहा है कि हम मजबूरी में जसपा नेपाल से अलग हुए हैं । किसी भी पार्टी में वह तभी जीवंत पार्टी बनती है जब उसके सभी विचारों, सिद्धांतों, नेतृत्व की ईमानदारी, कानून-कायदों को स्वीकार किया जाता है। तभी पार्टी आम सहमति से आगे बढ़ेगी. जसपा नेपाल बनाने के लिए सैकड़ों लोगों ने बलिदान दिया है, सैकड़ों लोगों का खून बहाया गया है। हमने भी अपनी जान की परवाह किये बिना संघर्ष कर मंच के माध्यम से जसपा नेपाल बनाया। उस पार्टी को बनाने में हमारा भी कम योगदान नहीं है. किसी के पास अधिक हो सकता है, किसी के पास कम हो सकता है, यह अलग बात है।

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लेकिन उपेन्द्र जी ने उस योगदान की सराहना नहीं की. वह ऐसा व्यवहार करते हैं मानो मैंने जो किया है, वह स्वयं किया है, अकेले किया है। एक पार्टी को विधान का पालन करना चाहिए और सामूहिक निर्णय लेना चाहिए। लेकिन उपेन्द्र जी अलग ढंग से आगे बढ़ते हैं।  किसी की नहीं सुनते हैं. जो भी इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, उसे हाशिए पर धकेल दिया जाता है। जरूरत पड़ी तो वह कार्रवाई करते हैं। आप खुद सोचिए, जो व्यक्ति लगातार 15 साल तक एक ही पार्टी में काम करता रहा हो, अगर उसका कोई मूल्यांकन न हो, पार्टी में उसे कोई जगह न मिले तो वह व्यक्ति कितना अपमानित महसूस करता होगा । कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति ऐसी स्थिति में अधिक दिनों तक नहीं रह सकता। इस विषय पर पार्टी में कई बार चर्चा हुई, लेकिन उन्होंने किसी बात की परवाह नहीं की. हमने यह कदम उठाया है क्योंकि हमें ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।’

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