Tue. May 28th, 2024

नेपाल-चीन बीआरआई प्रोजेक्ट पर सात साल बाद भी हस्ताक्षर नहीं

काठमांडू मई



चीन और नेपाल के बीच बीआरआई प्रॉजेक्‍ट पर हस्‍ताक्षर होने के आज 7 साल पूरे हो गए हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में एक भी कदम नहीं उठाया गया है। चीन का दावा है कि नेपाल में चल रहे प्रॉजेक्‍ट बीआरआई के तहत बनाए जा रहे हैं, वहीं काठमांडू ने इसको खारिज किया है। नेपाल ने साफ कर दिया है कि उनके देश में कोई भी बीआरआई प्रॉजेक्‍ट शुरू नहीं हुआ है। दरअसल, नेपाल और चीन के बीच अभी भी व‍िवाद की सबसे बड़ी वजह चीन का लोन है। नेपाल चाहता है कि चीन उसे ग्रांट दे लेकिन बीजिंग लोन देने पर अड़ा हुआ है।

भारत और अमेरिका ने भी नेपाल को चीन के कर्जजाल से बचने के लिए आगाह किया है। इससे भी नेपाल बीआरआई से अभी भी दूरी बनाए हुए है। नेपाल और चीन के बीच में 12 मई 2017 को बीआरआई पर हस्‍ताक्षर हुआ था। किन्तु नेपाल अभी भी यह तय नहीं हो पा रहा है कि किस तरह से इस बीआरआई प्रॉजेक्‍ट को लागू करना है। इसको लेकर नेपाल के प्‍लानिंग कमीशन में अभी भी प्रक्रिया चल रही है। पिछले साल  पीएम पुष्‍प कमल दहल प्रचंड की चीन यात्रा के दौरान लगभग आम सहमत‍ि बन गई थी कि बीआरआई को कैसे लागू किया जाए लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई प्रगत‍ि नहीं हो पाई है। यही नहीं इस पर हस्‍ताक्षर भी टल गया।

उप प्रधानमंत्री पीएम नारायण काजी श्रेष्‍ठ ने कहा कि बीआरआई को लागू करने का ड्राफ्ट अभी भी तैयार नहीं है। कहा जा रहा है कि यह तैयार होने के अंत‍िम चरण में है। उन्‍होंने कहा कि मैंने चीनी पक्ष से इस बारे में बात की है लेकिन कोई प्रगत‍ि नहीं हुई है।  एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने कहा कि भारत में हो रहे आम चुनाव इसके पीछे प्रमुख कारण है और इसी वजह से चीन में यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई। प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात एक अधिकारी ने कहा कि भारत और चीन में चुनाव के दौरान कोई भी संवेदनशील फैसला नहीं लिया जाएगा ताकि दोनों पड़ोसी देशों के साथ रिश्‍तों में कोई नुकसान नहीं हो।

उम्मीद है कि बीआरआई के तहत प्रॉजेक्‍ट पर हस्ताक्षर चुनाव के  बाद ही होगा। चीनी राष्‍ट्रपत‍ि की नेपाल यात्रा के दौरान साल 2020 में कृषि, शिक्षा, कनेक्टिव‍िटी, व्‍यापार, निवेश, टूरिज्‍म, कल्‍चर, आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग करने पर सहमत‍ि बनी थी।  शेर बहादुर देउबा के प्रधानमंत्री बनने के बाद चीन के व‍िदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल की यात्रा की थी। इस दौरान देउबा ने उन्‍हें साफ कर दिया था कि नेपाल चीन से लोन को अफोर्ड नहीं कर सकता है। वर्तमान में भी सरकार ने कहा कि चीन उन्‍हें लोन नहीं बल्कि ग्रांट दे क्योंकि देश की आर्थिक हालत सुधरी नहीं है। नेपाल फिलहाल इस हालत में नहीं हैं कि चीन समेत किसी देश से लोन लें। इससे नेपाली अर्थव्‍यवस्‍था पर दबाव आ जाएगा।

नेपाल के कर्ज से मना कर देने के बाद अब चीन ने छोटे-छोटे प्रॉजेक्‍ट पर फोकस किया है ताकि नेपाल में अपने प्रभाव को बढ़ाया जा सके। इसको चीन ने ‘सिल्‍करोड रोडस्‍टर’ नाम दिया है।  व‍िपक्षी नेपाली कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि वह बीआरआई जैसे प्रॉजेक्‍ट को लागू करने से पहले राष्‍ट्रीय स्‍तर पर आम राय बनाए। लोन के अलावा नेपाल को बीआरआई को लेकर सुरक्षा चिंता भी है। बीआरआई के मसौदे में कहा गया है कि नेपाल को चीन के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाना होगा। इसके लिए संयुक्‍त अभ्‍यास, सूचनाओं को आदान-प्रदान और क्षमता व‍िस्‍तार करना होगा। चीन बीआरआई को शीर्ष प्राथम‍िकता देता है और हर बैठक में इसे उठाता रहता है।



About Author

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 25 मई 2024 शनिवार चंपारण मतदान दिवस शुभसंवत् 2081
आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: