राउत प्रकरण से ‘मधेश स्वराज’ एक आकर्षक विचार के रुप मे सामने आया है
काठमाडू, असोज १५ । यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा कि डा सी.के. राउत प्रकरण ने हमेशा के लिए मधेसी राजनीति को बदल दिया है । इसने मधेश की राजनीति को एक नई दिशा प्रदान किया है । इसने मधेशी को सम्मानजनक जीवन व्यतित करने के लिये ‘मधेश स्वराज’ एक आकर्षक विचार के रुप मे सामने लाकर रख दिया है । इससे यह भी पता चलता है कि मधेश की विचारधारा को कुछ नेताओं की पार्टी के अन्दर कैद करके नही रखा जा सकता है । पहले मौन वैठे नेतागण बाद मे खुलकर सी.के. राउत की रिहाई की माँग करने लगे । इनमे महंथ ठाकुर, विजय गच्छेदार और राजेन्द्र महतो प्रमुख नाम है । कल्ह प्रचण्ड ने सरकार को राउत की रिहाई के लिये कडा अल्टिमेटम ही दे दिया था । वहीं आज महंथ ठाकुर ने भी सरकार को चेतावनी भरा सब्द प्रयोग किया था । इसमे साथ देरहे थे विजय गच्छेदार और राजेन्द्र महतो । हाँ, उपेन्द्र यादव के लिये यह प्रकरण उतना उपयुक्त नही रहा । वे जबतक सभंलते-सभंलते तबतक अनशन ही टूट गया था । लेकिन कुछ लोगों की तारीफ जरुर करनी होगी जिन्होने इसके पीछे एक बहुत ही अच्छा रौल अदा किया है । इनमे से कुुछ नाम हैं — विनय पंजियार, दीपक कुमार साह , अधिवक्ता दीपेंद्र झा , मधेशी नागरिक समाज के अगुआ सीके लाल, प्रशांत झा ,विजय कांत कर्ण, तुला नारायण शाह हैं । मानवअधिकारवादी पद्म रत्न तुलाधर, दमननाथ ढुंगाना , वीरेन्द्र मिश्रा,खगेन्द्र सग्रौला, बिमल अर्याल, राजेन्द्र महर्जन,उज्जवल प्रसाइ, चीरण मानन्धर, कृष्णा हाथेचु ।
आज सरकार के आग्रह पर डा सी.के. राउत ने अनसन तोडा है। राउत को अनसन तोडाने के लिये सुचना तथा सञ्चारमन्त्री मिनेन्द्र रिजाल, कृषिमन्त्री हरिप्रसाद पराजुली और कांग्रेस नेता रामचन्द्र पौडेल शिक्षण अस्पताल गये थें।

