अब सवाल है कि मधेश क्या करता है ?
काठमाणडू, ८ अक्टूवर । सी.के.राउत की गिरफ्तारी अप्रत्यासित थी पर उन पर जो मुद्दा दायर किया गया वह अप्रत्यासित नही है । कमोबेश अन्दाजा यही था। सरकार जो चाह रही थी उसने वही किया। अब सवाल है कि मधेश क्या करता है। क्या वो न्याय के लिये खामोशी से इन्तजार करेगा ? क्योंकि न्यायव्यवस्था भी उन्ही के हाथ मे है जिन्होने राउत की गिरफ्तारी का तानाबाना बुना है। मधेश को न्याय मिलेगा इसमे शक है पर एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमे न्यायपालिका पर विश्वास रखना होगा भले ही वह व्यवस्था मधेश के हक में हो या न हो क्योंकि आज जिस व्यक्ति पर देश विखन्डन का मुकदमा चल रहा है उसकी निगाह में तो एक उपनिवेश का अपना कोई कानून प्रणाली ही नही है तो इस अवस्था में उसे न्याय मिलेगा इसमें शक ही लगता है । जो माँग राउत की थी वह नई नहीं थी । ये माँग होती रही है और होती रहनी चाहिये । क्योंकि ये शायद आवाज रोकने की शुरुआत है और आज अगर ये आवाज रुक गई तो फिर एक राऊत न जाने कब बनेगा । राज्य की नीयत तो साफ़ नजर आ रही है की वह इस एक घटना से यह जता देना चाह रही है कि अधिकार माँग की आवाज यूँ ही रोक दी जायेगी । अब देखना है कि हमारा अपना देश हमे क्या देता है ? श्वेता दीप्ति

