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क्या मधेश को बंदूक की नोक पर रखकर सरकार शासन करना चाहती है ?

 

deathबारा, असोज २५ – अधिकार की बात करो तो मौत मिलेगी । आज की दुखद घटना यही बयान कर रही है । निरीह जनता पर गोली चलाकर आखिर सरकार क्या जताना चाहती है । क्या मधेश को बंदूक की नोक पर रखकर सरकार शासन करना चाहती है ? सिम्रौन्गढ की घटना ने जता दिया है की कानून और न्याय सरकार की जागीर हो गई है । क्या सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम जनता को और भी उग्र रूप धारण करने को नहीं उकसा रहा है ? दमन की यह नीति कब तक जनता को शान्त रख सकती है ? सरकार पहले आश्वासन का सजिश रचती है और इसी के आड़ में अपना असली रूप दिखा जाती है । सरकार इस नाजूक समय पर कुछ तो ऐसा करे कि मधेस को यह लगे की उसके भले की बात हो रही है । मधेस सुलग रहा है और सरकार इस आग में घी डाल रही है । हवन में समिधा डालो तो सिर्फ हवंकुन्ड की आग नहीं भरकती बल्कि समिधा डालने वाले के हाथ भी जलते हैं । मधेस को अगर हवनकुंड बनाया जा रहा है तो उसकी आग को भड़काने वाले भी उसकी तपिश से खुद को बचा नहीं पायेंगे ।

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बारा के सिम्रनगढ मे पुलिस ने गोली चलाकर एक एक व्यक्ति की जान ले ली । उसका कसुर केवल इतना था कि टूटे हुये सडक को मरम्मत कराने की वह मागँ कर रहा था ।  कलैया–सिम्रनगढ सडक जो कि जुलुस से अवरुद्ध था उसे खोलाने के विषय पर प्रहरी और स्थानीय बासि के बीच विवाद हो गया था जो कि बाद मे झडप का रुप ले लिया था । इसके पश्चात पुलिस ने गोली चला दी जिससे कि बारा हरिहरपुर के ४० वर्ष के जयनारायण पटेल की घटनटस्थल पर ही मृत्यु हो गई । प्रहरी की गोली से चार लोग सख्त घायल हो गयें हैं ।   खबर है कि सख्त घायल हुये साह मोहम्मद की हालात बहुत ही नाजुक है । इस घटना से यह साबित हो रहा है कि नेपाली पुलिस मधेशियों को आदमी नही उसे कोई चिडिया या जानवर समझकर भुंटता है । गोली चलते समय गृहमन्त्री बामदेव गौतम सिरहा भ्रमण कर रहे थे । हि. स.

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