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कांग्रेस द्वारा सरकार को चेतावनी – ये तो कच्ची कूटनीति है, भारत और चीन के बीच में डाइनामाइट फिट करने का प्रयत्न नहीं करें



काठमांडू, असार १३ – प्रतिनिधिसभा की आज की बैठक में विशेष समय लेकर बोलते हुए पूर्व परराष्ट्रमन्त्री समेत रहे कांग्रेस सांसद एनपी साउद ने कहा कि सरकार कच्ची कूटनीति कर रही है ।
प्रमुख प्रतिपक्षी नेपाली कांग्रेस ने सरकार के विदेश नीति पर बहुत ही गम्भीर प्रश्न उठाया है । नेपाली कांग्रेस ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि दो बड़े पड़ोसी देश भारत और चीन के बीच डाइनामाइट (विस्फोटक पदार्थ) फिट करने का प्रयत्न नहीं करें ।
उन्होंने कहा कि जब संसार भर में द्वन्द्व हो रहा है ऐसे समय में सरकार ने प्रमुख ११ देशों से राजदूत को वापस बुला लिया । उनका कहना था कि इससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर में नेपाल की विश्वसनीयता घटी है । साथ ही चीनी उप–विदेशमन्त्री जब नेपाल भ्रमण में आए उस समय प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने जो अभिव्यक्ति दी थी उस पर भी साउद ने प्रश्न उठाया है । चीन के उपविदेशमन्त्री सुन वेइतोङ नेपाल में थे उस समय प्रधानमन्त्री प्रचण्ड ने संसद ही में बेल्ट एण्ड रोड इनिसिएटिभ (बीआरआई) को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्यान्वयन योजना दस्तावेज में हस्ताक्षर की तैयारी हो रही है कहा था । उन्होंने अपनी बातों को रखते हुए पृथ्वीनारायण शाह को याद करते हुए कहा कि – प्रथ्वीनाराण्या शाह ने नेपाल को दो पत्थरों के बीच का तरुल है । उन्हें याद करते हुए साउद ने कहा कि ‘दो मजबूत पत्थर, लेकिन निर्जिव थे । तरुल सजीव था, गतिशील था । लेकिन अभी की सरकार दो पत्थरों के बीच में डाइनामाइट फिट कर रखना चाहती है ।
‘डाइनामाइट यदि फूट गया तो यह चट्टान को भी क्षति पहुँचा सकता है । और डाइनामाइट भी बाकी नहीं रह सकता है । इसलिए उन्होंने सरकार को सचेत करते हुए कहा कि चीन को हम बीआरआई में जा रहे हैं कहकर संदेश दे रहे हैं और उसको सत्ता समीकरण में प्रयोग करने की बात कह रहे हैं , और देशों को हम बीआरआई में रोक कर रखे हुए हैं । ये तो कच्ची कूटनीति है । इससे मात्र पड़ोस में ही नहीं वरन अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय में भी नेपाल की विश्वसनीयता घटेगी ।
इसी तरह कांग्रेस के ही सांसद राजेन्द्र बजागाईं ने नेपाल और चीन के बीच हुए बीआरआई सम्झौता कीे समझदारी पत्र संसद में पेश करने की मांग की है ।
इसके साथ ही बजगाईं ने यह भी मांग की कि अमेरिकी सहयोग परियोजना (एमसीसी) सम्झौता के बारे में, और बीआरआई के डकुमेन्ट पर भी संसद में चर्चा होनी चाहिए । ‘एमसीसी ग्रान्ट थी, बीआरआई सफ्ट लोन है, इसमें २ से लेकर ४ प्रतिशत तक ब्याजदर तय किया गया है । उन्होंने कहा कि ‘चीन के ऋण को चुका ही नहीं सकते हैं , यदि यही ग्रान्ट है तो लिया जा सकता है लेकिन और ऋण का भारी बोझ हम नहीं सह सकते हैं ।
अंत में उन्होंने यह भी कहा कि यदि हमारा यही रवैया रहा तो बहुत बड़ी समस्या आ सकती है ।



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