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नेपाल की शिक्षा के लिए भारत का सहयोग अद्वितीय हैः लाइबेरी प्रमुख सुवेदी

 

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काठमांडू, २८ जुन । त्रिभुवन विश्वविद्यालय स्थित केन्द्रीय पुस्तकालय के प्रमुख सागरराज सुवेदी ने कहा है कि नेपाल की शिक्षा के लिए भारत का सहयोग अद्वितीय है । भारतीय राजदूतावास काठमांडू द्वारा २७ जून (गुरुवार) के दिन त्रिभुवन विश्व विद्यालय परिसर स्थित त्रिवि केन्द्रीय पुस्तकाल में आयोजित ‘नेपाल–भारत साहित्य समारोह’ (के अन्तर्गत) ‘साहित्य संवाद’) कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उन्होंने ऐसा कहा है ।

भारत के आर्थिक सहयोग से नवनिर्मित केन्द्रीय पुस्तकालय भवन की चर्चा करते हुए पुस्तकालय प्रमुख सुवेदी ने कहा कि त्रिभुवन विश्वविद्यालय में ऐसी कई संरचना है, जो भारतीय सहयोग से निर्मित है । उन्होंने आगे कहा कि नेपाल और भारत वर्ष का एक अद्भुत रिश्ता है और नेपाल की शिक्षा के लिए भारतीय सहयोग अद्वितीय है ।
केन्द्रीय पुस्तकालय में निर्मित ‘इन्डियन कर्नर’ पर चर्चा करते हुए पुस्तकालय प्रमुख सुवेदी ने आगे कहा– ‘भारतीय सहयोग से निर्मित भवन में पहला कार्यक्रम भी भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित रहा । यह हमारे लिए एक सौभाग्य की बात है ।’ सुवेदी ने यह भी दावा किया है कि ८० प्रतिशत नेपाली जनता हिन्दी समझते हैं और सिर्फ हिन्दी बोलनेवाले भारतीय कों भी नेपाली समझने के लिए ज्यादा कठिनाई नहीं है ।

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पुस्तकालय प्रमुख सुवेदी के अनुसार पुस्तकालय में हिन्दी भाषा में लिखित पुस्तक प्रशस्त है । उन्होंने आगे कहा– ‘हम लोग नेपाली और हिन्दी को एक ही मानते हैं, इसीलिए अन्य भाषा की तरह हिन्दी को अभी तक अलग विभाग नहीं बनाया गया । नेपाली भाषा में लिखित पुस्तक को ‘एन’ समूह में और हिन्दी में लिखित पुस्तकों को ‘एच’ समूह में रखा गया ।’ उनका कहना है कि अन्य देशों के नाम में जब पुस्तकालय में ‘कर्नर’ बनने लगा तो ‘इन्डियन कॉर्नर ’ के नाम में भी चर्चा होने लगी, तब जाकर इन्डियन कॉर्नर निर्माण का पहल हुआ है । उन्होंने कहा कि नेपाल के लिए भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव की सुझाव अनुसार ही नव निर्मित भवन में ‘इन्डियन कॉर्नर ’ निर्माण किया गया है । उनका मानना है कि इन्डियन कॉर्नर पुस्तकालय का आकर्षण है।

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