तमलोपा मे हलचल, जितेन्द्र सोनल नें किया पार्टी सुदृढिकरण की मांग
विनय कुमार, कात्तिक २६ । तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी अर्थात ‘तमलोपा’अपने स्थापनाकाल से ही पुरे मधेश में महत्वपुर्ण भुमिका निभाती आरही है । तमलोपा पहलीवार संविधानसभा के चुनाव में ९ सिट जित कर अपना नाम दर्ज कराई थी और आज भी मधेश का आवाज को बुलंद करने मे अग्रणी पक्ति मे है । अन्य पार्टीयों की तरह इसी पार्टी मे भी एकवार विभाजन हो चुका है । इसबीच पुर्व-सांसद जितेन्द्र सोनल का नाम काफी चर्चा पर है । कारण है कि पार्टी के अन्दर सोनल ने एक बहुत बडा समुह को लेकर पार्टी की वर्तमान सुस्त कार्यपध्दति को सुधारने का जेहाद छेड रखा है । पार्टी के अन्दर महामन्त्री सोनल का प्रभाव और पकड मजबुत मानी जा सकती है । हिमालिनी से बातचित करते हुए सोनल ने कहा कि पार्टी में ‘इगो सिस्टम’ अभी भी बरकरार है तथा ;इगो-म्यानेजमेन्ट’ नहीं हो पाया है । उन्होने कहा कि पार्टी कमजोर हो ये मैं नहीं देख सकता हुं ।’ सभासद बनने के चाल में मधेशी दल कमजोर बनता गया है । आप की असन्तुष्टी इस समय बाहर आने की कारण कांग्रेस–एमाले का कोई प्रलोभन तो नहीं ? हिमालिनी के इस सवाल का जवाव देते हुए सोनल नें कहा कि कांग्रेस और एमाले नितिगत आधार पर हमारा (मधेश) का जन्मजात दुश्मन है, उससे हमारी नजदिकी हो ही नही सकती । अगर कोई ऐसा सोंचता है तो वह बिलकुल गलत है ।
बिगत में असन्तुष्टो की आवाज नही सुनने के कारण ही पार्टी ‘तमलोपा’ मे एक बार विभाजन चुका है । हाल ही में एसे ही असन्तुष्टो का बडा जमात लेकर जितेन्द्र सोनल नें पार्टी सुदृढिकरण के लिए १३ सुत्रीय ज्ञापन पत्र पार्टी के अध्यक्ष महन्थ ठाकुर के समक्ष पेश किया है । तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी की स्थापनाकाल (२०६४ पुस १३) में जितनी तेज गति से संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं में जोश, राजनीतिक व्यक्तित्व, युवा, विद्यार्थी, बुद्धिजिवी, मजदुर, महिला, किसान लगायत मधेशी जनता का प्रवेश हुआ था उतनी ही तेजी से पार्टी कमजोर होने की जिकिर ज्ञापन पत्र में उल्लेख किया गया है । पहला निर्वाचन में मधेश की दुसरी पार्टी के रुप में स्थापित हुये तमलोपा मे दो वर्ष में ही विभाजन हो गया । उन्होने ज्ञापन पत्र में उल्लेख किया है कि ‘संविधान सभा के दूसरे निर्वाचन तक पार्टी की अवस्था इतनी नाजुक हो गई कि संख्या बचाना तो दूर मत-प्रतिशत भी बचाना भी मुशकिल हो गया । पार्टी में क्षमतावान कार्यकर्ता होते हुए भी शक्ति व्यवस्थापन की चुनौती रही है । काम की जिम्मेदारी चयन, राजनीतिक संस्कार, लोकतान्त्रिक विधि पंक्रिया, काम सम्पादन की पारदर्शी, टिम वर्क और टिम स्पिरीट स्थापना के लिए पार्टी में रहे चुनौती पर ध्यान आकृष्ट कीया गया है । उन्होनें ‘तमलोपा कार्यकर्ताओं पर आधारित मधेशी पार्टी होने का सन्देश दिया है । सोनल ने कहा है कि पार्टी की कार्यपद्धति में तुरन्त परिवर्तन की मांग किया है । समावेशीता का सिद्धान्त को अङ्गिकार कर के पार्टी मे पुर्नसंरचना पर उन्होने कोड दिया है । सोनल ने पार्टी में अब तक हुये क्रियाकलाप, उतारचढाव तथा कमीकमजोरी की समिक्षा करते हुए अपनी गल्तियों पर आत्मालोचित होकर नेतृत्व पंक्ति को ध्यान देने के लिये १३ सुत्रीय सुझाव सहित ज्ञापन पत्र पार्टी के अध्यक्ष महन्थ ठाकुर के समक्ष पेश किया है ः–
– केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक अबिलम्ब बुलाई जाए ।
– केन्द्रीय कार्यसम्पादन समिति की बैठक बुलाकर समिति को पुर्णता दें ।
– महाधिवेशन की तिथी एवं स्थान घोषणा करें ।
– क्षमता के आधार पर कार्यविभाजन एवं जिम्मेवारी चयन किया जाए ।
– केन्द्रीय कार्यालय के काम को व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाया जाय ।
– पार्टी तहत के विधान वा विधान तहत की पार्टी ? एक को चुनें ।
– पार्टी विधान को लोकतान्त्रिक कर के सभी पद में निर्वाचन करने का प्रावधान को ग्यारेन्टी किया जाए ।
– सामुहिक नेतृत्व के सिद्धान्त मे आधारित रह कर पार्टी के सभी निर्णय तथा गतिविधि सम्बन्धित समिति से किए जाने की परम्परा बनाएं ।
– आर्थिक अवस्था की पारदर्शीता तथा सुदृढीकरण किया जाए ।
– पार्टी के सभी विभागों में पुनर्गठन तथा व्यवस्थापन किया जाए ।
– वर्गीय संगठनों को चुस्तदुरुस्त बनाने के लिए प्रभावकारी संयन्त्र निर्माण कर के सक्रियता एवं जिवन्तता प्रदान करें ।
– जिला पार्टी में देखा गया विवादों को प्रभावकारी एवं परिणाममुखी तरिके से समाधान किया जाए ।
– सभी तह में प्रशिक्षण के कार्यक्रम संचालन किया जाए ।
( हिमालिनी आशा करती है कि उससे पहले की कोइ दुर्घटना हो मधेश के सबसे अधिक अनुभवी, वुजुर्ग तथा पिलर माने जानेवाले नेता पार्टी अध्यक्ष श्री महन्थ ठाकुर इसका समाधान जरुर निकाल लेगें । स.)

