आज रक्षाबंधन… बहन भाई के विश्वास और स्नेह का पर्व

रक्षाबंधन का त्योहार बहुत ही शुभ माना जाता है । यह भाई–बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व है । हिंदू पंचांग के अनुसार, यह त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है ।
रक्षा बंधन भाई–बहन के बीच के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है । आज रक्षा बंधन का पर्व बड़े ही उमंग और उत्साह से लोग मना रहे हैं । वैसे तो यह राखी यह साल आती है । इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र व खुशहाल जीवन की कामना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं । साथ ही जो भाई–बहन एक दूसरे से बहुत दूर रहते हैं वो भी इस पावन अवसर पर आशिर्वाद जरुर देते हैं । अब तो ऑनलाइन के द्वारा बहन अपने भाई को राखी भेज भी देती है । आजकल ये एक बहुत बड़ी सुविधा हो गई है ।
भाई–बहन के रिश्ते की पवित्रता और प्रेम को दर्शाने वाले रक्षाबंधन के पर्व को हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है । वैसे इसकी शुरुआत कब और कहाँ से हुई यह कहना थोड़ा मुश्किल है । क्योंकि बचपन से हमने बहुत सी कहानियां सुनी थी रक्षाबंधन को लेकर । इन कहानियों में सबसे ज्यादा प्रचलित कहानी थी भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की । ये समय महाभारत का था जहाँ एक बार भगवान कृष्ण की अंगुली में चोट लग गई थी और उसमें से खून बहने लगा था । ये देखकर द्रौपदी जो कृष्ण जी की सखी भी थी उन्होंने आंचल का पल्लू फाड़कर उनकी कटी अंगुली में बांध दिया । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन से रक्षासूत्र बांधने का चलन शुरु हुआ जो एक समय आते आते राखी के रुप में परिणत हो गया । द्रौपदी की कहानी तो सभी को मालूम ही है जहाँ चीरहरण के समय उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को याद किया और भगवान ने उनकी सहायता की । तभी से यह भी कहना शुरु हुआ कि आज के दिन भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देते हैं । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ अवसर पर भगवान को भी राखी बांधने का विधान है । कोई जरुरी नहीं है कि यह केवल भाई बहन का पर्व है । यह एक रक्षासूत्र है जो हर कोई हर किसी को बांध सकता है ।
पहले यूँ राखी बांधने का चलन नहीं था । हमारी दादी और माँ का कहना था कि ये तो अब लोग राखी बांधते हैं । पहले पंडित पुरोहित आते थे और सभी को रक्षासूत्र बांध देते थे । धीरे धीरे सिनेमा में राखी को दिखाया गया जहाँ बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं बाद में यही प्रचलन में आ गया । लेकिन रही बात पौराणिक कथा कहानी की तो वो शुरु से ही रही हैं । जैसे देवी लक्ष्मी और राजा बाली की कहानी, द्रौपदी कृष्ण की कहानी, युधिष्ठिर की कहानी, गणेश और मनसा देवी की कहानी , हुमायूँ और कर्णावती की कहानी ।
राखी के दिन रेशम के धागों का विशेष महत्व है । खासकर राखी इसी धागे से बनाई जाती है । इस दिन भाई के माथे पर तिलक,चंदन,रोली और अक्षत लगाने के बाद उसके दाएं हाथ में राखी को बांधना चाहिए ।

