सिंहासन खाली करो कि जनता आती है : कंचना झा
कंचना झा, काठमांडू, भादव १५ । “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” रामधारी सिंह दिनकर की ये पंक्तियां बहुत सटिक बैठती है आजकल की राजनीति के लिए । देश की राजनीति जिस तरह से अपना रंग दिखा रही है या फिर जनता जिस तरह से अपनी बात को किसी भी कार्यक्रम में रख रही है उससे यही लगता है कि बहुत जल्द इन पंक्तियों को लोग बोलने लगेंगे। शायद इसे ही नारे के रुप में प्रयोग करने लगेंगे । क्योंकि जिस तरह से देश के कथित नेतागण बार बार अपनी कुर्सी को बचाने के लिए सत्ता परिवर्तन कर रही है उससे यही लगता है कि उसे अपनी जनता का जरा सा भी ख्याल नहीं है । जनता उग्र हो रही है । जनता आक्रोश में है, जनता खुलकर विरोध कर रही है मगर सरकार में शामिल लोग, कार्यकर्ता और नेता इसे देश की परम्परा, सभ्यता और संस्कृति से जोड़ रही है । जनता की पीड़ा को बढ़ा रही है ।

भादव १० गते की बात है जब सुदूरपश्चिम का मुख्य त्यौहार गौरा पर्व के अवसर पर टुँडिखेल में हो रहे कार्यक्रम में कुछ युवाओं ने विरोध भरे शब्दों का प्रयोग किया, नारे लगाए तो प्रधानमंत्री ओली और कांग्रेस सभापति शेर बहादुर देउवा ने इन युवाओं के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की ।
गौरा पर्व के अवसर पर हर साल एक कार्यक्रम टुँडिखेल में मनाए जाने की परम्परा रही है । जहाँ देश के प्रधानमंत्री से लेकर प्रायः सभी दल के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति रहती है । तो इस बार भी कुछ इसी तरह का माहौल था टुडिखेल में जहाँ नेताओं के साथ हजारों की संख्या में दर्शक भी थे । प्रधानमंत्री के साथ ही कार्यक्रम में नेपाली कांग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउवा, पर्यटन मन्त्री बद्री पाण्डे, वन मन्त्री ऐनबहादुर शाही, उद्योग मन्त्री दामोदर भण्डारी भी उपस्थित थे । सभी एक दूसरे को पर्व की शुभकामना दे रहे थे कि अचानक से दर्शक दीर्घा में से प्रधानमंत्री ओली के साथ ही बाकी नेताओं के खिलाफ नारे लगने शुरु हो गए ।

वो लोग नारा लगा रहे थे कि ओली तुम्हारे कारण सभी दुख पा रहे हैं । साथ ही मारो पत्थर, पत्थर मारो,केपी ओली, देश छोड़’ कहकर नारे लगा रहे थे । वैसे सामाजिक संजाल में ये वीडियों वायरल हो रहा है । वैसे तो सभी नेताओं के खिलाफ नारे लगाए जा रहे थे लेकिन प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ नाम लेकर नारे लग रहे थे । जो लोग नारेबाजी कर रहे थे वो अंतिम पंक्ति के लोग थे और मंच से दूर थे । इसलिए कोई दिखाई नहीं दे रहा था केवल नारे की आवाज आ रही थी । ये युवा है हमारे देश के और बहुत जानकारी रखते हैं कि जिसके विरुद्ध वे बोल रहे हैं वो क्या कर सकते हैं । लेकिन फिर भी उन्होंने अपना विरोध जताया । ये युवा बहुत अच्छी तरह समझ रहे होंगे कि ये सरकार है देश की सरकार । जो कुछ भी कर सकती है अपनी सत्ता और कुर्सी बचाने के लिए । लेकिन इतना सुनने के बाद भी हमारे नेता नहीं समझ पाते कि उनके सामने ही लोग उनके खिलाफ नारा लगा रहे हैं तो ये असंतुष्टि है उनकी सरकार से । वो खुश नहीं है सरकार से या उन नेताओं से जिन्हें उन्होंने अपने लिए चुना था ।
अब प्रधानमंत्री ने इसे किस तरह लिया ? तो उन्होंने कहा कि –नई पीढ़ी अपनी परम्परा,संस्कृति अनुसार सभ्यता और शालीनता खो रही है या भूल गई है । उन्होंने कहा कि बहुत आश्चर्य हो रहा है मुझे कि नई पीढ़ी अपनी परम्परा और संस्कृति अनुसार सभ्यता और शालीनता खो रही है । उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में जो अकर्मण्यता दिख रही है उसे नेपालीपन नहीं कहा जा सकता है । उन्होंने यह भी कहा कि कुछ शक्तियां हैं जो हर कार्यक्रम में आते ही हैं खलल डालने के लिए । कार्यक्रम में बदमाशी करने के लिए ।
ओली ने कहा कि मैं आश्चर्य चकित हूँ कि नई पीढ़ी हमारी सभ्यता,शालीनता,या हमारी मर्यादा क्या है ? यह भूलती जा रही है । इस तरह की घटनाएं बहुत से जगहों पर देखने को मिल रही हैै कि कार्यक्रम किसी का होता है और दूसरे उसमें आकर खलल डाल देते हैं । मैं आग्रह करना चाहता हूँ कि ये नेपालीपन नहीं है, ये नेपाली संस्कृति नहीं है । इसी तरह जब कांग्रेस सभापति देउवा भाषण कर रहे थे तो पीछे बैठे दर्शक दीर्घा में लोग हँस रहे थे और दर्शकदीर्घा से हुटिङ की जा रही थी ।
इस घटना के तुरंत बाद पुलिस और सरकार ने एक्शन लिया । कार्यक्रम के वीडियों फुटेजों को स्क्रिनिङ करके देखा और खोज लिया उन युवाओं को जो दर्शक दीर्घा में नारा लगा रहे थे उन सभी युवाओं दूसरे ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया । नाराबाजी करने के आरोप में कंचनपुर के दीपक सिंहठगुन्ना,सुर्खेत के गोपीराज जैसी और अछाम के रामबहादुर को गिरफ्तार किया गया ।
अब बात सदन में उठने लगी कि इन युवाओं को जल्द से जल्द रिहा किया जाए । राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद हरि ढकाल ने संसद में इस बात को उठाया और मांग की कि गौरा पर्व के अवसर में काठमांडू के टुँडिखेल में आयोजित कार्यक्रम में हो–हल्ला करने के आरोप में गिरफ्तार हुए युवाओं को रिहा किया जाए । सोमवार को यह कार्यक्रम किया गया । मंगलवार को युवाओं को गिरफ्तार किया गया और बुधवार को सदन में बात रखी गई । हरि ढकाल ने प्रतिनिधि सभा की बैठक में बोलते हुए कहा कि –युवाओं के विरोध को अराजक शैली में गिरफ्तार करना गलत है । सरकार को युवाओं की विरोधपूर्ण बात भी सुननी होगी । उन्हें विरोध की बोली सुननी चाहिए । उन्होंने सदन में कहा कि यदि युवाओं ने अपनी बात को रखा है तो राज्य को सुनने की धैर्यता रखनी होगी । सच तो यह है कि युवाओं ने सिंहदरबार में बैठने वालों को खबरदार किया है कि अब भी संभल जाओं कि जनता आती है ।

और शुक्रवार को देश के गुहमंत्री रमेश लेखक ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि गौरा पर्व के अवसर पर युवाओं को विरोध नहीं करना चाहिए । ये हमारी संस्कृति नहीं है । किसी पर्व त्यौहार के समय धैर्यता रखनी होती है । ये अराजकता है जिसे सहन नहीं किया जाएगा । उन्होंने कहा कि नागरिक को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है लेकिन सोच समझ कर , जगह देखकर अपनी बात रखनी चाहिए और पर्व के समय पर इस तरह की हरकत नहीं करनी चाहिए क्योंकि वो जगह नहीं थी जहाँ विरोध किया जाए । सड़क पर भी जब लोग आंदोलन करते हैं तो विचार करते हैं सामने वालें की भावनाओं का ।
लेकिन ये नेतागण नहीं समझ रहे हैं कि जनता में असंतुष्टि है, आक्रेश है । आप त्यौहार मनाने आए हैं और जनता आपके विरुद्ध नारा लगा रही है तो इसका मतलब समझे । आप जनता के लिए मतलब नहीं रख रहे हैं । यह बात मानने को नेता समझने को तैयार नहीं है । या फिर समझकर भी नासमझ बन रहे हैं ।
जनता बीच चौक चौराहे पर आपसे खुलकर कह रही है कि आप जैसे नेताओं के कारण जनता को दुख भोगना पर रहा है । आप जो ये ख्याली पुलाव पका रहे हैं अब जनता नहीं मानेगी । आप पहले कहते थे लोग हंसकर सह लेते थे कि चलो अभी भी नेपाल सीख रहा है लेकिन अब नहीं । आप जोकर नहीं है जो किसी भी मंच से हंसकर बात को टाल देते हैं । कुछ दिन पहले भी एक कार्यक्रम में इसी तरह की हंसी ठिठोली की गई थी । आप अपना ये हसने हंसाने का चलन छोड़े । गंभीर बनें । इतने काम है काम करके दिखाने ये एक दूस्रे पर तंज कसना कम करें । जनता कभी माफ नहीं करेगी कि वो ५० साल पीछे जाए ।
देश के प्रधानमंत्री हैं आप क्या कर रहे हैं ? प्रत्येक दिन हादसे हो रहे हैं, बस दुर्घटनाएं हो रही है और सरकार का ध्यान न जाने किस ओर है ? प्राकृतिक आपदा से कोई लड़ नहीं सकता है लेकिन हम कुछ योजना बना सकते हैं । हजारो की संख्या में लोग विदेश जा रहे हैं आप कहाँ है ? विमान स्थल पर जो युवा युवती अपने छोटे – छोटे बच्चों को रोता बिलखता छोड़कर जा रहे हैं क्या सरकार नहीं देख रही है । विद्यार्थी जो अपने देश में पढ़ना नहीं चाहते , एक होड़ सी लगी रहती है विदेश में पढ़ने की । क्यों नहीं बनाए जा रही है अच्छी शिक्षा नीति ताकि रोका जा सके आज के युवाओं को अपने ही देश में । इन सब बातों से भाग रही सरकार के प्रति लोगों में आक्रोश है । लोगों में राजनीति के प्रति आस्था नहीं रह गई है । लोगों में इतना आक्रोश है कि सामाजिक संजाल में लोग खुलकर लिख रहे हैं
जिस दिन जनता अपने पर आ जाएगी उस दिन इन सभी को लाठी और बंदूक से मारेगी । सामाजिक संजाल में लोगों ने लिखा ओली देउवा जैसे भ्रष्ट नेता और भ्रष्ट प्रणाली के ही कारण युवाओं आक्रोस है तो किसी ने लिखा कि ४ –५ बार प्रधानमंत्री बनकर केवल देश को लुटने का काम कर रहे हैं । आने वाले समय में नेपाल बंगलादेश बन सकता हैं । नेतागण होश करो ।
किसी ने लिखा कि नेता अपनी मूर्खता को नेपालीपन से नहीं जोड़े ।
किसी ने लिखा यह इस देश का दुर्भाग्य है कि इस देश में जनता है ही नहीं सभी कार्यकर्ता हैं । आप किस किस का मुँह बंद करेंगे ? जागरुकता आने भर की देरी है । जितना प्रेम ये नेता दिखाते हैं देश के प्रति उससे कई गुणा ज्यादा प्रेम यहाँ के नागरिकों को है अपने देश से । वो देश के लिए मरना भी जानते हंै और मारना भी ।


