Sat. Sep 19th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

नग्न सम्राट का नया वस्त्र और नेपाल की दिशा और दशा : डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ

 

डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ, काठमांडू। एक मुल्क में एक मूर्ख सम्राट था। वह फैशन को लेकर बहुत उत्सुक थे। वह अच्छे से अच्छे कपड़ों पर बहुत पैसा खर्च करता था। वह हमेशा दूसरों से ज्यादा खूबसूरत दिखने की चाहत रखती थी। शहर के लोग अक्सर उन्हें उनके फैंसी कपड़ों में देखकर आश्चर्यचकित रह जाते थे।

एक दिन साम्राज्य में दो चतुर ठग आते हैं। उन्होंने स्वयं को अद्भुत कपड़ा बुनने वाले बुनकर के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने सम्राट को आश्वस्त किया कि जो कपड़ा उन्होंने बुना है वह न केवल सुंदर है बल्कि उसमें अद्वितीय गुणवत्ता भी है। उन्होंने सम्राट से कहा कि केवल बुध्दिमान और योग्य लोग ही उनके बुने हुए कपड़े को देख सकते हैं।

इस विचार से आश्चर्यचकित होकर सम्राट ने ठगों को अपने महल में बुलाया। उन्होंने भव्य भाव-भंगिमाओं के साथ स्वयं को प्रस्तुत किया। सम्राट ने तुरंत उन्हें चमत्कारी वस्त्र प्रदर्शित करने के लिए नियुक्त किया और उन्हें कपड़े की बुनाई के लिए उतना सोना और रेशम प्रदान किया जितना उन्होंने अनुरोध किया था।

बुनकर खाली करघे पर केवल नकल कर रहे थे । दिन ब दिन सम्राट ने प्रगति की जाँच के लिए अपने विश्वस्त सलाहकारों को भेजा। हालाँकि उन्हें अली टैन में कुछ भी नज़र नहीं आया, उनमें से प्रत्येक ने मूर्ख नहीं दिखने की इच्छा रखते हुए सम्राट से कहा कि कपड़ा अद्भुत था।

एक दिन बादशाह स्वयं बुनकरों का काम देखने गये। यहां तक कि सम्राट ने भी उन्हें नंगे भूरे रंग में “काम” करते देखा था। हालांकि टैन खाली दिख रहा था, इस डर से कि उसे मूर्ख और अयोग्य कहा जाएगा, सम्राट ने भी प्रशंसा की कि कपड़े अच्छे थे, भले ही खाली करघे पर कोई कपड़ा नहीं था।

यह भी पढें   नेपाल–भारत व्यापार और पारगमन पर दो दिवसीय बैठक संपन्न, कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति

अंत में भव्य प्रदर्शन का दिन आ गया।  नगर के सभी लोग सम्राट को नये वस्त्रों में देखने के लिये उत्सुक होकर एकत्र हो गये। यद्यपि सम्राट सर्बांग नग्न थे वह शान से सड़क पर चलने लगा। सम्राट को यकीन था कि वह अपने नए कपड़ों में शानदार लग रहा था। यहाँ तक कि नगर के लोग भी मूर्ख दिखने से डर गए और अदृश्य वस्त्र की प्रशंसा करने लगे।

परन्तु फिर एक छोटा बच्चा चिल्लाया, ” सम्राट ने कुछ नहीं पहना है। सम्राट नंगा है!” बादशाह नंगे चल रहने कि बात भीड़ में एक कान और दो कानों का मैदान हो गए। सम्राट भी स्वयं को नग्न महसूस करने लगे। उस समय तक ठग सोनेचादी लेकर सीमा पार गायब हो चुके थे। नेपाल में वर्तमान मे सम्राट नही देश  और जनता नंगे  घूम रहे हैं। खाली करघों पर नकली कपड़े बुनने वाले नेपाल के नेता श्रीलंका के राजपक्षे भाईयों की तरह राज्य कि खजाना लुटकर भागने कि खतरा है।

नेपाल के वर्तमान राजनीतिक संदर्भ में ” नग्न सम्राट के कपड़े” की कहानी गहराई से गूंजती है। जो कई नागरिकों द्वारा अपने नेताओं के प्रति महसूस की गई हताशा और निराशा को दर्शाता है। यह कहानी वर्तमान परिस्थिति का सशक्त रूपक है जहां कई नेता कहानी के बदमाशों की तरह हैं केवल व्यक्तिगत लाभ और सत्ता पर ध्यान केंद्रित करते रहें।

धोखाधड़ी की संस्कृति

पिछले कई वर्षों में नेपाल को भारी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है। नेता अक्सर विकास की बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के बारे में बड़े वादे करते हैं । लेकिन ये शब्द अक्सर अधूरे रह जाते हैं। नागरिक अधूरी उम्मीदों के साथ मर रहे हैं। कई नेता अपने पद पर बने रहने और भ्रष्टाचार में लिप्त रहने में ही संतुष्ट हैं। गरीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल समस्याओं को हल करने पर ध्यान केंद्रित न करें। जैसे कहानी का सम्राट सच नहीं देख सका इसी तरह, कई नेता आम नागरिकों की वास्तविकताओं के संपर्क से बाहर हैं।

यह भी पढें   माताओं के लिए ६ महीने की मातृत्व छुट्टी का प्रस्ताव, पिताओं के लिए भी ४२ दिन की छुट्टी

प्रगति का भ्रम

राजनीतिक अभियान अक्सर जोरदार नारों और आकर्षक रैलियों के माध्यम से प्रस्तुत किये जाते हैं। ऐसे तामझाम प्रगति का भ्रम पैदा करते हैं। लेकिन सतह के नीचे जीवन यापन की उच्च लागत, अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाएं लोगों की संघर्षपूर्ण दिनचर्या को बढ़ाती हैं और अवसर की कमी बनी रहती है। ऊपर की कहानी के नागरिक सम्राट के सलाहकारों की तरह दरअसल, वे सवाल पूछने से झिझकते हैं.

वास्तविकता और जवाबदेही का आह्वान

अवाम मे जागरूकता शुरू हो चुकी है। विरोध प्रदर्शनों और नागरिक सहभागिता की हालिया लहरें वास्तविकता और जवाबदेही की बढ़ती मांग का संकेत देती हैं। नागरिक मौजूदा हालात को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। वे अपने नेताओं के पाखंड को चुनौती देने लगे हैं। कहानी में मासूम बच्चे की आवाज इसी जागरूकता की झलक देती है। यह नागरिकों को उस वास्तविकता से अवगत कराता है जो लंबे समय से चली आ रही धोखाधड़ी को प्रोत्साहित करती है और चुनौती देती है।

नये समाज का निर्माण

यह क्षण नेपाल के नागरिकों के लिए राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने का एक स्पष्ट आह्वान है। उन्हें अपने नेताओं से पारदर्शिता की मांग करनी चाहिए और उन नीतियों के लिए खड़ा होना चाहिए जो खोखले वादों पर सामाजिक कल्याण और वास्तविक विकास को प्राथमिकता देती हैं। अपने नेताओं को जवाबदेह ठहराने के लिए बुध्दिजीबीओं की आंदोलन और नागरिक समाज संगठन महत्वपूर्ण हैं।  ऐसी  आन्दोलन नागरिक जुड़ाव और भागीदारी की संस्कृति विकसित करता है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 16 सितंबर 2026 बुधवार शुभसंवत् :2083

सच्चे नेतृत्व को अपनाएं

सच्चा नेतृत्व सेवा , सत्यनिष्ठा और जवाबदेही के बारे में है । इसके लिए ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो प्रशासन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हों और वे अपने लोगों के कल्याण के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं को त्याग दें। मूल्यों पर कायम रहना सभ्य समाज एक ईमानदार व्यक्ति का निर्माण कर सकता है। राजनीतिक माहौल जो लोगों की जरूरतों को पूरा करता है।

निष्कर्ष

ऊपर वर्णित सम्राट के नए कपड़ों की कहानी भी मूर्खता की कहानी है। यह नेपाल के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। यह  कहानी निगरानी सहभागिता है और सत्य की निरंतर खोज के महत्व पर जोर देता है। नेताओं द्वारा बुने गए भ्रमों से नागरिक अवगत हो रहे हैं। उच्च मूल्यों वाले मानकों की मांग स्वच्छ राजनीतिक चरित्र के लिए लोगों की आवाजें उठने लगी हैं। सभ्य समाज के स्तंभ भ्रम को तोड़ने और वास्तविकता को स्वीकार करने और जिम्मेदारी लेने के सिध्दांत हैं। यह असंभव नहीं है कि सामूहिक प्रयास अंततः नेपाल को एक मजबूत और दृढ़ प्रणाली की ओर ले जाएंगे जो लोगों की आवाज सुनती है।

(vidhukayasta@gmail.com) 

डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ
पत्रकार, लेखक और मीडिया शिक्षक हैं।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com