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बीरगंज में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर एक कार्यक्रम का आयोजन

 

बीरगंज (नेपाल), 23 अक्टूबर, 2024 । भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 03 अक्टूबर, 2024 को मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने को मंजूरी दे दी। शास्त्रीय भाषाएँ भारत की गहन और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की संरक्षक के रूप में काम करती हैं, जो प्रत्येक समुदाय के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मील के पत्थर का सार प्रस्तुत करती हैं। शास्त्रीय भाषा के रूप में भाषाओं को शामिल करने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण व्यापक सांस्कृतिक र शैक्षणिक प्रभाव पड़ेगा।

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इस संदर्भ में, भारत के महावाणिज्य दूतावास, बीरगंज ने मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने के उपलक्ष्य में 23 अक्टूबर, 2024 को वाणिज्य दूतावास परिसर में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में व्यापार, मीडिया, शिक्षा, नागरिक समाज आदि सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान शारदा कला केंद्र, रक्साैल तथा दिल्ली पब्लिक स्कूल, बीरगंज के विद्यार्थियों ने मराठी, असमिया और बंगाली भाषाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महावाणिज्यदूत श्री डी.एस. मीना ने अपने उद्घाटन भाषण में विभिन्न भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने और इसके महत्व पर संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। अन्य प्रमुख वक्ताओं श्री चंद्र किशोर झा, श्रीमती गीता कर्ण, श्री अशोक बैद ने भाषाओं की शास्त्रीय स्थिति पर अपने विचार साझा किए। श्री विक्षु मेधांकर स्थविर और श्री विक्षु महा मिलन ने भी बात की और पाली भाषा को भारत में शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि इससे इस प्राचीन भाषा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगा ।

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