आतंकवाद का शिकार हुए तमाम मासूम से प्यारे बच्चों अश्रूपूरित श्रद्घाजंलि
Rishabh Tyagi:आतंकी भाईजान जी,
अम्मी हमेशा कहा करती थीं कि बड़ों को इज्जत देनी चाहिए. नाम के आगे जी लगाकर ही बात करनी चाहिए. सलीका यही है. अम्मी अब्बा की हर बात याद है. मंगलवार को सुबह सोकर उठा तो सर्दी में स्कूल जाने का मन नहीं किया. पर अम्मी बोलीं कि स्कूल जाओगे तभी जिंदगी में कुछ बन पाओगे. अम्मी की बात ठीक भी निकली और पता है भाईजान, स्कूल पहुंचने के चंद पलों बाद मैं कुछ बन गया. अम्मी तुम भी सुनो, मैं लाश बन गया. अम्मी की बातों पर मेरा यकीन बढ़ाने के लिए नकाबपोश आतंकी भाईजान शुक्रिया. शुक्रिया मुझे लाश बनाने के लिए भाईजान.

अब मुझे सुबह उठना नहीं होगा. लेकिन भाईजान आप अम्मी को समझाओ न. अम्मी रो क्यों रही हैं. सुबह जब तैयार होकर मैं घर की चौखट को पार कर रहा था, तब तो अम्मी मुस्कुरा रही थीं, लेकिन अब. मुझे सोता देख अम्मी और अब्बा सब रो क्यों रहे हैं. पहले तो जब-जब मैं सोता था वो कभी आकर मेरा माथा चूमते तो कभी आंख चूमते. लेकिन आज, ये लगातार रो क्यों रहे हैं. अब समझा भाईजान, सब आपकी जल्दीबाजी की वजह से हो रहा है. क्या जरूरी था मेरी आंखों और चेहरे पर गोली मारना. देखो कितना खराब सा लग रहा है मेरा गुलाबी चेहरा. खून से सना और गोलियों के गड्ढों से फटा सा. छी, मुझे नहाना पड़ेगा अब इसे साफ करने के लिए. शायद इसी वजह से तो मेरी अम्मी जी मुझे आज चूम नहीं रही हैं. बस रो रही हैं वो भी मेरे चेहरे को न देखते हुए. क्या भाईजान, जाओ कट्टी. अम्मी की चुम्मी भी नसीब नहीं होने दी आपने.
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| किसी माँ ने सुबह बच्चे का… डब्बा तैयार किया होगा ! किसी बाप ने अपने लाल को.. खुलते स्कूल छोड़ दिया होगा !! किसे पता था वह .. अब लौटेगा नहीं कभी ! किसे पता था गोलियों से.. भून जायेंगे अरमान सभी !! बच्चो में रब है बसता.. उस रब से मेरी फ़रियाद है !! तालिबान यह कैसा तेरा … मजहब के नाम जिहाद है !! मेमनों की तरह बच्चे… मिमियाए जरूर होंगे ! खौफ से डर कर आँखों में आंसू आये जरूर होंगे !! तुतलाये शब्दों से रहम की… भीख भी तुझसे मांगी होगी ! अपने बचाव को हर सीमाये.. उसने दौड़ कर लांघी होगी !! मासूमो के आक्रन्द से भी न पिघले.. हिम्म्त की तेरे देनी दाद है ! हे आतंकी… यह कैसा तेरा … मजहब के नाम जिहाद है !! भारत से दुश्मनी निभाने… मोहरा बनाया उसने जिसे ! जिस साप को दूध पिलाया.. वही अब डस रहा उसे ! हे आतंक के जन्मदाता…. अब तो कुछ सबक ले ! यदि शरीर में दिल है .. तू थोड़ा सा तो सिसक ले ! आतंक के साये ने हिला दी.. पाकिस्तान की बुनियाद है ! तालिबान यह कैसा तेरा… मजहब के नाम जिहाद है !! कौन धर्म में हिंसा को.. जायज ठहराया गया है ! कुरान की किस आयत में .. यह शब्द भी पाया गया है !! कब तक तुम्हारा बच्चा.. इस तरह बेबस रहेगा ! मांग कर देखो हाथ… साथ हमारा बेशक रहेगा !! सबक बहुत मिल गया अब.. आतंक की खत्म करनी मियाद है ! तालिबान यह कैसा तेरा… मजहब के नाम जिहाद है ! आतंकवाद का शिकार हुए तमाम मासूम से प्यारे बच्चों अश्रूपूरित श्रद्घाजंलि |

