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भारतीय दूतावास द्वारा लुम्बिनी में भारत-नेपाल सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन

 

काठमान्डू 8 दिसम्बर नेपाल में भारतीय दूतावास ने लुंबिनी विकास कोष और लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के सहयोग से २३ नवंबर मंसिर को लुंबिनी में भारत-नेपाल सांस्कृतिक महोत्सव के दूसरे संस्करण का आयोजन किया।
बौद्ध धर्म पर विशेष ध्यान देने के साथ, महोत्सव ने भारत और नेपाल दोनों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का जश्न मनाया। कार्यक्रम में लुंबिनी प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री कृष्ण बहादुर घर्तिमगर, लुंबिनी प्रदेश के माननीय उद्योग, पर्यटन और परिवहन मंत्री श्री प्रचंड विक्रम न्योपाने, लुंबिनी प्रदेश के माननीय सामाजिक विकास मंत्री श्री जन्मजेय तिमिल्सना, लुंबिनी विकास कोष के उपाध्यक्ष डॉ. ल्हारक्याल लामा और काठमांडू में भारतीय दूतावास के डिप्टी मिशन-प्रमुख श्री प्रसन्न श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया। कार्यक्रम में प्रदेश विधानसभा के सदस्यों, बुटवल उप-महानगरीय शहर के महापौर, रूपन्देही के मुख्य जिला अधिकारी, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के वरिष्ठ अधीक्षकों के साथ-साथ लुंबिनी विकास कोष, नागरिक समाज के सदस्यों और वरिष्ठ भिक्षुओं, परिषद और स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया।
महोत्सव में भारत और नेपाल दोनों के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रदर्शन के साथ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण श्रीमती शिखा शर्मा के नेतृत्व में भारत के आठ सदस्यीय दल द्वारा बौद्ध धर्म विषय पर आधारित कथक नृत्य की प्रस्तुति रही। प्रस्तुति को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), नई दिल्ली द्वारा समर्थित किया गया था। इसी कार्यक्रम में श्री स्वजन रघुवंशी एवं उनके समूह ने पारंपरिक नेपाली नृत्य भी प्रस्तुत किया।

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इस उत्सव के भाग के रूप में, लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय में “भारत और नेपाल की बौद्ध सांस्कृतिक विरासत” पर एक शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। संगोष्ठी में भारत और नेपाल के प्रसिद्ध बौद्ध विद्वानों ने भाग लिया। उन्होंने दोनों देशों की बौद्ध विरासत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर अपनी बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की।


इस सांस्कृतिक उत्सव का उद्देश्य लोगों के बीच संबंधों को गहरा करके और सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाकर भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने, अद्वितीय और घनिष्ठ संबंधों को मजबूत करना है। कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों पर जोर दिया गया।

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