Tue. Apr 21st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता अपमान करने का लाइसेंस नहीं

 

charlieकञ्चना झा , काठमाण्डू । १५ जानवरी । पूरा विश्व अभी शान्त सा हो गया है । इतनी शान्ति कि जैसे कुछ ही देर पहले भीषण तुफान आया हो । चारों तरफ निराशा ही निराशा । अनुभव तो नहीं है लेकिन बहुत सारे साहित्यकारों ने द्वितिय विश्व युद्ध के बाद की अवस्था को चित्रित करते समय  ऐसी ही शान्ति की चर्चा की है अपनी कृतियों में ।
निराशा का यह पल आया है पेरिस में हुए आतंकवादी आक्रमण के बाद  । विश्व के सुन्दर शहर फ्रान्स के राजधानी पेरिस स्थित व्यंग्य पत्रिका शार्ली हेब्डो के दफ्तर में आतंकवादी के समूह ने बुधवार को मौत का खेल खेला । और इस नरसंहार के बाद लगभग मानो विश्व थम सा गया है । हरेक बुधबार को प्रकाशित होनेवाली यह पत्रिका अपने कार्टूनों के कारण हमेशा चर्चा में रही है । बुधबार को शार्ली हेब्डो ने इस्लामिक उग्रवादी समूह इस्लामिक स्टेट के नेता का कार्टून ट्वीट किया था । और इस ट्वीट के थोडी ही देर बाद जो हुआ उससे सारी दुनिया स्तब्ध रह गयी । बन्दूक के दम पर कलम को तोड दिया गया । कार में आये दो आतंकवादी एके फोर्टी सेभेन राइफल से गोली दागते हुए शार्ली हेब्डो के दफ्तर में प्रवेश किया और अन्दर में जो जो मिला उसे ढेर करते गये । बन्दुकधारियों ने पत्रिका के सम्पादक चार्बो चारबोनियर सहित बारह लोगों को मौत के घाट उतार दिया । मरने वालों में ८ पत्रकार थे ।
गौरतलब बात यह है कि सुरक्षा के दृष्टीकोण से बहुत ही संवेदनशील माने जाने वाले पेरिस में आतंक का यह मंजर करीब १५ मिनट तक चला । लगातार पाँच मिनट तो आतंकवादियों ने गोली ही चलायी । और शार्ली हेब्डो की दफ्तर में नरसंहार मचाकर बाहर खडे काले रंग के रिनाल्ट कार से आसानी से फरार हो गये । और जाते जाते कुछ और लुटपाट और एक सुरक्षाकर्मी को भी मार गिराया । उधर दूसरी ओर दो आतंकवादियों ने मिलकर एक सुपर मार्केट में कुछ लोगों को बन्धक बना लिया । दो दिन के कसरत के बाद फ्रेन्च पुलिस ने तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया लेकिन इस बीच में और जानें चली गयी । इस आतंकी हमले में कुल १७ लोग मारे गये । एक महिला आतंकवादी अभी फरार है, जिसकी खोज हो रही है ।
एक पत्रिका पर हुई आतंकवादी हमले का विश्व के हरेक कोने से एक स्वर में भत्र्सना हुआ है । विश्व के कई शहरों  में हुए घटना में मारे गये लोगों का स्मरण करते हुए आतंकवादी आक्रमण के प्रति विरोध जाहिर किया है । लोगो ने अपने हाथों में जे स्वी शार्ली ( मै शार्ली हूँ) लिखे हुए प्लेकार्ड लेकर  अपना विरोध जताया ।
लेकिन अब सब कुछ शान्त हो गया है और शान्ति की इस दौर में लोग अपने अपने हिसाब से घटना का मन्थन करने में जुट गये है । आखिर क्या है पत्रकारिता ? पत्रकार तो समाज को सूचना देती है, समाज को जागृत बनाती है । एक नई बहस शुरु हो गई है , अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता को लेकर । अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता क्या  है ? क्या अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता की सीमा निर्धारण होनी चाहिए ? विश्व के हर प्रजातान्त्रिक राष्ट्र अपने नागरिकों को संविधान मार्फत अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता का अधिकार दे रखा है । हर नागरिक को अपने विचारों को निर्भिकतापूर्वक रखने का अधिकार देती है संविधान । किसी भी राष्ट्र में अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है और उल्लंघन करने वालों को सजा की व्यवस्था की गयी है ।
चाहे विकसित राष्ट्र अमेरिका की बात करें या कुछ वर्ष पहले लोकतन्त्र स्थापना हुए नेपाल की , नागरिक को अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता दिया गया है । नेपाल के संविधान की बात कि जाय तो संविधान का धारा १२(३) नागरिक को  अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता प्रदान करती है । लेकिन इसी धारा में कुछ चीजे वर्जित भी किया गया है । संविधान में स्पष्ट रुप से कहा गया है देश की एकता, अखण्डता और सार्वभौसत्ता में खलल पहँुचाने की छुट नागरिक को नहीं । इसी तरह देश में रह रहे विभिन्न धर्म, जातजाति, समुदाय और भाषाभाषी के बीच की सहिष्णुता में खलल पहुँचाने की छुट किसी को नहीं दी गई है ।
फ्रान्स की बात करें तो वहाँ का लोकतन्त्र लगभग साढे दो सौ वर्ष पुराना है । लेकिन वहाँ की कुछ पत्रपत्रिका की बात करें तो बारम्बार दूसरे धर्मावलंबी के विश्वास को ठेस लगाने की कोशिस की है ।  सन २०११ में भी शार्ली हेब्डो का दफ्तर में आक्रमण हुआ था  । उस समय इस पत्रिका नें डेनमार्क में प्रकाशित इस्लाम धर्म को संस्थापक पैगम्बर मोहम्मद के कार्टून को पुनः प्रकाशित किया था । डेनमार्क में छपे उस कार्टून का विश्व के समस्त मुसलमान  ने एक स्वर में विरोध जताया था । विरोध प्रदर्शन के क्रम में कई लोगों की जानें भी चली गई थी । और इतने संवेदनशील विषय को पुनः प्रकाशित करने से पहले किसी भी पत्रिका को एक बार गंभीरता से सोचना चाहिए । पत्रिका की विक्री बढाने के लिए या सनसनी मचाने के लिए कुछ भी छाप देना पत्रकारिता नहीं हो सकती । शार्ली हेब्डो के दफ्तर में नर संहार मचानेवाले आतंकवादी यह कहते हुए बाहर निकले थे कि पैगम्बर को अपमान करनेवालों से बदला लिया ।
वैसे शक्तिशाली राष्ट्र इस मामले में हर हद पार कर जातें हैं । कुछ ही दिन पहले अमेरिका के एक बियर कम्पनी ने अपने बियर का नाम ही गाँधी बियर रख दिया । महिला मोडेल सर्वाङ नंगा होकर अपना संवेदनशील अंग को ओम नमः शिवाय लिखा गम्छी से छुपाते हए ¥याम्प पर उतर जाती है । गौतम बुद्ध की तसवीर अंकित तास छापते है तो कई बार हिन्दू देवी देवता का चित्र अंकित अंडर गार्मेन्टस बना देतें है । हो सकता है उन लोगों के संस्कार में देवीदेवता या मान्यजन का फोटो जुता , मोजा या अंडरवियर में छपवाना स्वीकार्य हों लेकिन हिन्दू, इस्लाम लगायत कई धर्मावलंबी ंके लिए यह अपमानजनक बात होती है । अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता दूसरों को अपमान करने का लाइसेन्स नहीं देती । एक पत्रिका को इस बात की परख होनी चाहिए । पत्रकार को तो समाज के प्रति जिम्मेवार होना चाहिए । शार्ली हेब्डो आक्रमण प्रकरण के बाद  अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता के लेकर एक बार फिर बहस शुरु हो गयी है और बहस परिणाममूलक होनी भी चाहिए ।
और खास कर नेपाल के परिपेक्ष्य में यह बहस तो और ज्यादा आवश्यक हो गया है । विक्रम संवत २०६३ में हुए जन आन्दोलन के बाद देश संघिय लोकताँत्रिक गणतन्त्र हो गया है । देश संविधान निर्माण के प्रत्रिया में आगे बढ रही है । हर लोग चाहते है कि उनकी अधिकार संविधान में सुनिश्चित हो । इसी तरह संघियता को लेकर काफी बहस चल रही है और बहस के कारण कई जगहों पर विवाद ने भी जन्म ले लिया है । खास कर मधेशी, जनजाति को लेकर विवाद बढ गया है । यहाँ के मीडिया में भी कुछ ऐसे लोगों का बर्चस्व है जो अल्पमत या राजनीतिक , आर्थिक और समाजिक रुप से पिछडे है उनकी बात नहीं बाहर आने देते । उनकी बात अगर रखी जाती है तो भी अपमानजनक तरीके से । दूसरी और सूचना और प्रविधि ने नेपाल समाज को बहुत तीव्र रुप में परिवर्तन कर रहा है । अधिकांश लोगों की पहुँच इन्टरनेट तक है और फेसबुक, ट्वीटर जैसे समाजिक सञ्जाल के कारण हर नागरिक पत्रकार बन चुकें है यहाँ । ऐसी अवस्था में अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता और शार्ली हेब्डो पर आक्रमण और भी ज्यादा सोचनिय हो गया है ।।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *