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जनकपुर में नेपाल हिन्दी प्रतिष्ठान द्वारा ‘विश्व हिन्दी दिवस’ मनाया गया, हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने की मांग

 

विश्व भाषा हिन्दी के विकास और समृद्धि के लिए सबो को ध्यान देना आवश्यक हैं
लोकमत प्रतिनिधि, जनकपुरधाम । विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर महामना राजेश्वर नेपालीद्वारा स्थापित नेपाल हिन्दी प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित समारोह में प्रमुख अतिथि प्रा.डा.आशा सिन्हा ने कहा नेपाल मे हिन्दी का एक हजार वर्ष पुरानी परंपरा हैं और हिन्दी नेपाल और भारत के सांस्कृतिक सम्वन्ध को और अधिक मजबुत और सुदृढ बनाया र्हैं ।
समारोह में विशिष्ठ अतिथि जनकपुरधाम उपमहानगर पालिका वडा नं. २३ के वडाध्यष राघवेन्द्र साह ने कहा सत्र साल में लोकतन्त्र की हत्या के बाद घोर राष्ट्रवाद के नाम पर एक भाषा एवं वेष की नीति अपना कर पठन–पाठन का माध्यम हिन्दी को समाप्त कर नेपाली अपनाए जाने के कारण देश में अनिश्चितता लाया गया ।
जबकि २०१४ साल में नेपाली को राष्ट्रभाषा घोषित करने से पूर्व हिन्दी माध्यम से सम्पूर्ण नेपाल में पठन पाठन किया जाता था और हिन्दी राष्ट्र भाषा बनाए जाने के लिए सम्पूर्ण देश में आन्दोलन हुआ था । उन्होने आगे कहा १९७५ की जनवरी १०–१२ को नागपुर में प्रथम और १९७६ में मरिशस से द्वितीय विश्व हिन्दी सम्मेलन हुआ था । और विश्व हिंदी सम्मेलन में नेपाल से कोई भी सरकारी प्रतिनिधि नहीं भेजा गया । व्यक्तिगत रुप से नेपाल से रामचन्द्र मिश्र भाग लिया । धर्मयुग में रामचन्द्र मिश्र द्वारा लिखित ‘नेपाल में हिन्दी की दुर्दशा’ नामक आलेख प्रकाशित किया गया ।  इस आलेख को पुनः श्री राजेश्वर नेपाली जी द्वारा द्वारा प्रकाशन करने और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया । नेपाल में हिन्दी लेखन की बहुत पुरानी परंपरा हैं । दांग के राजा रतनसेन का दंगीशरण साढे ६ सौ वर्ष पूर्व हुआ था ,जानकी मन्दिर के आदि महन्थ सूरकिशोर दास का मिथिला विलास तीन सौ वर्ष पुराना हैं और उन दिनों से यहां हिन्दी लेखन की परंपरा हैं । हिन्दी भाषाको काम काज की भाषा वनाने के लिए विग तीन दसक लगातार १९ वार महामना राजेश्वर नेपाली ने नेपाल राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलनों का आयोजन नेपाल और भारत के साहित्य,संगित लागत अन्य विद्या मे आवद्ध साहित्यकारों को सम्मानित कर हिन्दी को विकास के लिए जीवन के अन्तिम समय तक कलम चलाते रहे ।
अतः हम सभी मिलकर इस के विकास और समृद्धि के लिए काम करें ।
पत्रकार श्रीनारायण साह ने कहा भाषाविद प्रा.योगेन्द्र प्रसाद यादव ने ६ वर्ष पूर्व राजेश्वर नेपाली द्वारा काठमाण्डू में आयोजित बारहवां नेपाल राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में बडे ही प्रष्ट शब्द मे कहा था नेपाल में हिन्दी सम्झने पढने और बोलने बालो की संख्या ८० प्रतिशत है । अतः बास्तविकता से हमलोग दूर नहीं भागे और मधेश और देश को जोडने बाली हिन्दी को कामकाज की भाषा बनाया जाना जाहिए ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता युगलकिशोर लाल ने कहा २०३० साल मे राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागु होेने से पूर्व तक एस.एल.सी.परीक्षा हिन्दी के माध्यम से होता था । मै चार दसक से अधिक समय तक हिन्दी का पठन पाठन कराते रहा और वहां पर कभी तीन सौ छात्र होता था किन्तु जब हिन्दी को लोक सेवा से हटा दिया गया तो फिर लोग पढेंगे क्यो ? और आज श्रून्यता आगया हैं हरेक पार्टी के नेता ग्राम मे मत लेनेके लिए हिन्दी मे बोलते है परन्तु मान्यता देने मे संकीर्णता क्यों ?
वरिष्ठ साहित्यकार चन्द्रशेखर राय चमन ने कहा हिन्दी ऋषि मुनियों की भाषा रही है । सम्पूर्ण देश को जोडने बाली हिन्दी को संबैधानिक मान्यता प्रदान कर विकास किाय जाना चाहिए ।
जनकनन्दनी शरण ने कहा हिन्दी साधुसन्तो की भाषा रही है और यहां वह लम्वी परंपरा हैं ,इसका विकास अतिआवश्यक हैं ।
ई.चन्देश्वर रौनियार ने कहा हिन्दी अब विश्व भाषा बन चुकी हैं ।
अजय झा ने कहा हिन्दी का विकास आवश्यक हैं ।
काव्य पाठ
विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह मे वरिष्ठ अधिवक्ता कवि युगकिशोर लाल,चन्द्रशेखर राय चमन,मनोज कुमार सिंह प्रेमेश,अजयकुमार झा, कैलाश प्रसाद,जनकनन्दनी शरण द्वारा काव्य पाठ किया गया ।

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