पहली बार नेपाल का मिलिट्री बैंड भारतीय थल सेना दिवस का हिस्सा होगा.
भारत और नेपाल के बीच सैन्य रिश्तों का एक लंबा इतिहास है. पहली बार नेपाल का मिलिट्री बैंड भारतीय थल सेना दिवस का हिस्सा होगा. अभी तक के थलसेना दिवस के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ है. किसी दूसरे देश की सेना ने अभी तक हिस्सा नहीं लिया है. ऐसा पहली बार हो रहा है. 33 सदसीय नेपाली मिलिट्री बैंड दोस्ती की धुन बजाते हुए भारतीय थलसेना के साथ कदमताल करेंगे. थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी को सल्यूट करेंगे. शुक्रवार को नेपाली सेना का दल भारत पहुंचा है और 15 जनवरी को पुणें में आयोजित होने वाले थलसेना दिवस समारोह का हिस्सा बनेगा.
पहले कोरोना और फिर अग्निपथ योजना के तहत नेपाल में होने वाली भारतीय सेना की भर्ती बंद है. 2019 के बाद से भारतीय गुरखा रेजिमेंट में एक भी नेपाली गुरखा शामिल नहीं हुआ. चीन नेपाली गुरखा को अपनी फौज में शामिल करने की इच्छा रखता है. लेकिन नेपाल ने अब तक चीन की सेना की सेना में शामिल हाेने के लिए अपने लोगों को इजाजत नहीं दी. कइर् तल्खी के बाद भीनेपाल की भारत के बीच सैन्य रिश्तों में कोई तलखी नहीं आई है. पिछले महीने में दोनों देशों के सेना प्रमुख एक दूसरे के देशों का दौरा भी कर चुकें हैं. पहले भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेपाल का दौरा किया. 15 दिन के अंदर नेपाल के सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल भारत के दौरे पर आए. प्रथा के मुताबिक भारतीय सेना प्रमुख को नेपाल के राष्ट्रपति ने नेपाल आर्मी के जनरल की मानद उपाधि से नवाजा तो नेपाली सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सेना के जनरल की मानद उपाधी से नवाजा.
भारत और नेपाल की सेना के बीच बटालियन स्तर की मिलिट्री ट्रेनिंग सूर्य किरण का 18वां संस्करण नेपाल में जारी है. भारत की तरफ से खास तौर पर गुरखा रेजिंमेंट की बटालियन को भेजा गया है. दोनों देश अपने सैन्य संस्थाओं में एक दूसरे के सैनिकों को मिलिट्री कोर्स भी करवाते हैं. पिछले साल ही भारत में नेपाल सेना के 300 से ज्यादा सैनिकों को ट्रेनिंग दी गई. अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में दोनों देश अहम साझेदार हैं. सेना के बीच रिश्ते पहले जैसे ही मजबूत है.

