सांसद साह के प्रश्नों का जबाव देना प्रधानमंत्री नहीं समझा जरुरी ..जबाव के बदले प्रतिप्रश्न
काठमांडू, फागुन ४ – रविवार प्रतिनिधिसभा में प्रधानमंत्री के साथ प्रश्नोत्तर कार्यक्रम था । जिसमें दस सांसदों द्वारा प्रश्न पूछे गए थे । अन्तिम प्रश्नकर्ता थे – आम जनता पार्टी (आजपा) के अध्यक्ष प्रभु साह । लेकिन संसद् में उन्हें अपने प्रश्न का जबाव नहीं मिला । प्रश्न पूछने का जब समय आया तो साह ने अपने प्रश्न रखें । सभामुख ने जबाव देने को कहा भी लेकिन प्रधानमंत्री ओली ने उन प्रश्नो का जबाब देना आवश्यक नहीं है कहते हुए उल्टे साह से ही प्रतिप्रश्न किये ।
साह के प्रश्न से प्रधानमंत्री ओली नाराज हुए और साह द्वारा प्रधानमंत्री से पूछे गए आठ प्रश्नों के उत्तर की शुरुआत में ही उन्होंने कहा – ये उनके प्रश्न नहीं हैं, बल्कि उनके मन में भरी नफरत है । संसद जैसे गरिमामय स्थान पर ऐसी भाषा का प्रयोग करने से आपको क्या लाभ हुआ ? क्या यह कहने लायक है ? ओली ने पूछा कि –क्या मैं मैनपावर कंपनी का आदमी हूं ? आपने जो ये ७० लाख कहा है क्या वे सभी इस ८ महीनों में गए हैं ? ओली ने प्रश्नकर्ता सांसद साह से पूछा – क्या मेरे सरकार में आने के आठ महीने बाद ऐसा हुआ ? आपने कहा कि ८ महीनों में ७० लाख लोग विदेश चले गए ? प्रधानमंत्री ने यहाँ तक कह दिया कि –उन्होंने जो प्रश्न किए हैं, उनका उत्तर देना आवश्यक नहीं है ।
साह द्वारा पूछे गए प्रश्न इस तरह के थे
१) कितने नेपाली नागरिकता छोड़कर विदेशी बन चुके हैं ? उनकी पैतृक संपत्ति कितनी थी और अभी किस स्थिति में है? उन अवैध संपत्तियों को राज्य की जिम्मेदारी में लाने के लिए आपने क्या किया? जब खुलेआम अवैध रूप से संपत्ति विदेश जा रही है, तो आप इसे रोकने में असमर्थ क्यों हैं ? क्या हमें आपको सक्षम कहना चाहिए या अक्षम प्रधानमंत्री?
२)लगभग ७० लाख से अधिक नेपाली युवा विदेशी रोजगार में है। उनकी मेहनत की कमाई से हर साल ४० खरब से अधिक रेमिटेंस आना चाहिए । लेकिन इस साल की रिपोर्ट के अनुसार केवल १३–१४ खरब ही आने की संभावना है । सवाल यह है कि नेपाली युवाओं द्वारा विदेश में मेहनत से कमाया गया पैसा नेपाल में क्यों नहीं आ रहा ? क्या नेपाली युवा भ्रष्टाचारियों का काला धन सफेद करने के लिए विदेश में मर रहे है ?
३) विदेशी रोजगार में जाने वाले नेपाली मजदूरों को वहां ट्रेड यूनियन का अधिकार नहीं मिलता । आपने इस तरह का श्रम समझौता क्यों किया ? २१वीं सदी में नेपाली मजदूरों को दासता और अमानवीय जीवन की ओर धकेलने से आपको क्या लाभ हुआ ?
४) नेपाल में जीडीपी और राजस्व के अनुपात को देखते हुए सरकार जीडीपी का लगभग एक–तिहाई राजस्व वसूलती है । ५७ खरब की जीडीपी वाले देश में केंद्र सरकार १४ खरब से अधिक राजस्व, प्रदेश सरकार २ खरब, और स्थानीय सरकार ३ खरब राजस्व वसूलने का लक्ष्य रखती है। इसे कर आतंक नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे, प्रधानमंत्री जी? क्या यह कर प्रणाली हमारी अर्थव्यवस्था को सही दिशा में ले जाएगी?
अपने पाँचवें प्रश्न के रुप में उन्होंने प्रधानमंत्री के भारत यात्रा को लेकर किया था ।
५)आपने सार्वजनिक रूप से कहा था कि आप भारत यात्रा पर जाने वाले हैं। यह बताइए कि कब जाने हैं ? जब निमंत्रण ही नहीं आया था तो आपने क्यों कहा कि जाने वाला हूँ ? क्या इससे देश की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुँची? इस प्रश्न को स्पष्ट करें प्रधानमंत्री जी ।
६) यह सरकार दो–तिहाई बहुमत की थी, मजबूत थी। लेकिन खुद द्वारा लाया गया अध्यादेश पारित कराने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं होने से सरकार संकट में दिख रही है। सत्ता में साथ दे रहे दलों ने अध्यादेश को अस्वीकार करने का फैसला कर लिया, तो अब किस नैतिकता के आधार पर आप प्रधानमंत्री पद पर बने रह सकते हैं ?
इससे पहले भी सांसद साह ने प्रधानमंत्री के पद पर बने रहने को लेकर प्रश्न किया था ।
७) संघीय राजधानी से जुड़े सभी राजमार्ग बदहाल हैं । आप खुद एक बार इन सड़कों से यात्रा क्यों नहीं करते? वर्तमान में इन सड़कों पर यात्रा करने से लोगों के शरीर के अंग हिल जाते हैं, दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है । इस क्षति की जिम्मेदारी कौन लेगा?
८) आवासहीनों को घर बनाने के लिए ‘सुरक्षित आवास’ योजना के तहत मात्र ७५,००० रुपये दिए जाते हैं । आज के दौर में ७५,००० रुपये में घर बन सकता है? जब यह संभव नहीं है, तो गरीब दलितों के साथ मजाक क्यों किया गया ?

