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नेपाल के राजा पृथ्वीनारायण शाह के लालमोहर भी हिन्दी में ही लिखा था : उपेन्द्र यादव

 

काठमांडू, फागुन १०, पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री उपेन्द्र यादव ने कहा है कि हिंदी का प्रमाण नेपाल के स्थापना काल से ही मिलता है । हमारी मातृभाषा जो भी हो लेकिन जब हम आपस मे मिलतें है तो हिंदी का ही प्रयोग करतें हैं ।

19 फ़रवरी को हिन्दी सम्मेलन सृजन सामारोहं में भारत के १४ राज्यों से आये विद्वानों को सम्बोधित करते हुये उन्होंने यह बात कही ।
उद्घाटन सत्र में प्रमुख अतिथि के रूप में श्री उपेन्द्र यादव ने २४ वाँ हिन्दी सम्मेलन की शुभकामना देते हुए कहा कि हिन्दी भाषा हम सबकी भाषा है । उन्होंने कहा कि नेपाल में जब राजा पृथ्वी नारायण शाह थे तो उनके लालमोहर भी हिन्दी में ही लिखा था । उन्होंने यह भी कहा कि भले ही हिन्दी को नेपाल में कानूनी स्थान नहीं मिला हो पर हिन्दी नेपाल की भी भाषा है । हिन्दी से नेपाली को कोई खतरा नहीं है बल्कि हिन्दी भाषा से नेपाली भाषा भी विकसित होती रही है ।
कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में पठन–पाठन से लेकर हरेक दिनचर्या में हिन्दी की महत्वपूर्ण योगदान है । कार्यक्रम में विभिन्न पुस्तकों के साथ– साथ हिमालिनी पत्रिका “बसन्त चौधरी विशेषांक“ का भी लोकार्पण किया गया ।

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२४ वाँ अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन, सृजन समारोह काठमांडू के क्रिस्टल पशुपति होटल में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व उप प्रधानमन्त्री तथा जसपा नेपाल के अध्यक्ष माननीय उपेन्द्र यादव थे । 
इसमे विशिष्ट अतिथि के रूपमे भीष्म उप्रेती तथा अतिथि के रूपमे डॉ सुनीता आचार्य, डॉ कृष्ण कुमार प्रजापति, डॉ मंगला रानी, श्री कृष्ण त्रिपाठी, श्री पुष्पज राय चमन तथा श्री प्रकाश प्रसाद उपाद्ध्याय थे । अध्यक्षता श्री अम्बिकादत्त ने की । डॉ सविता मोहन द्वारा स्वागत किया गया तथा विषय परिचय संस्था के मुख्य संयोजक डॉ जयप्रकाश मानस दिया।

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