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टकराव रोकने की रणनीति: काठमांडू में गणतंत्रवादियों और राजावादियों के प्रदर्शन पर कड़ी सुरक्षा

 

काठमांडू में शुक्रवार को गणतंत्रवादी और राजावादी समूहों द्वारा एक ही दिन प्रदर्शन किए जाने की योजना के चलते सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने दोनों पक्षों को आमने-सामने आने से रोकने के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई है।

अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति

काठमांडू के मुख्य जिला अधिकारी ऋषिराम तिवारी के अनुसार, समाजवादी मोर्चा (गणतंत्रवादी) को प्रदर्शनीमार्ग में और राजावादी समूह को तीनकुने में सभा करने की अनुमति दी गई है। प्रशासन का उद्देश्य दोनों समूहों के बीच टकराव को रोकना है।

इस सुरक्षा चुनौती पर चर्चा के लिए 10 चैत को केंद्रीय सुरक्षा समिति की बैठक हुई, जिसमें गृह मंत्री रमेश लेखक, गृह सचिव, रक्षा सचिव, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, नेपाल पुलिस महानिरीक्षक दीपक थापा, सशस्त्र पुलिस महानिरीक्षक राजू अर्याल और खुफिया विभाग के महानिदेशक समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

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कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

काठमांडू घाटी पुलिस कार्यालय रानीपोखरी के प्रमुख एआईजी टेक बहादुर तामांग के अनुसार, शुक्रवार के लिए 2,500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे और आवश्यकता अनुसार संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, सादा कपड़ों में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया जाएगा ताकि घुसपैठियों की पहचान की जा सके।

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सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता डीआईजी कुमार न्यौपाने के अनुसार, 50 प्लाटून (लगभग 1,750 जवान) सशस्त्र पुलिस बल को भी तैनात किया जाएगा। खुफिया ब्यूरो ने भी संभावित सुरक्षा खतरों का विश्लेषण किया है और उसी आधार पर सुरक्षा रणनीति तैयार की गई है।

एसईई परीक्षा का ध्यान

चूंकि शुक्रवार को एसईई परीक्षा भी हो रही है, इसलिए प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे सुबह 11 बजे के बाद ही रैली निकालें ताकि परीक्षाओं पर असर न पड़े और यातायात जाम न हो।

राजावादी समूह पर विशेष निगरानी

राजावादी समूह की निगरानी बढ़ा दी गई है, खासकर दुर्गा प्रसाईं के नेतृत्व वाले समूह पर। 25 फागुन को पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह के स्वागत के दौरान काठमांडू में राजावादी समूह की गतिविधियों को देखते हुए इस बार सुरक्षा बल ज्यादा सतर्क है।

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पूर्व डीआईजी माधव थापा के अनुसार, समाजवादी मोर्चा मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था का समर्थन करता है, इसलिए उनसे कोई बड़ी सुरक्षा चुनौती नहीं है। लेकिन राजावादी समूह व्यवस्था परिवर्तन की मांग कर रहा है, जिससे सुरक्षा खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण, प्रशासन ने प्रसाईं समूह की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने का फैसला किया है।

राजावादियों को रिंगरोड के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं

प्रशासन ने रणनीति बनाई है कि राजावादी समूह को रिंगरोड (चक्रपथ) के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, जबकि समाजवादी मोर्चा की रैली रिंगरोड के भीतर ही आयोजित होगी। इससे दोनों पक्षों के टकराव की संभावना को समाप्त किया जा सकेगा।

राजावादी प्रदर्शनकारियों के लिए विभिन्न रूट निर्धारित किए गए हैं:

  • भक्तपुर से कोटेश्वर होते हुए तीनकुने
  • जोरपाटी, बौद्ध, चाबहिल से होते हुए तीनकुने
  • गोंगबु, सामाखुशी से चाबहिल होते हुए तीनकुने
  • कलंकी से बल्खु, सातदोबाटो, कोटेश्वर होते हुए तीनकुने
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वहीं, समाजवादी मोर्चा की रैली भृकुटीमण्डप में समाप्त होगी।

प्रसाईं को बल्खु में प्रदर्शन की अनुमति नहीं

गत वर्ष प्रसाईं समूह को बल्खु में प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, जो सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर गलती मानी गई थी। बल्खु क्षेत्र में मारवाड़ी समुदाय की अधिक संख्या है, और प्रसाईं ने मारवाड़ी समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए थे। इस बार प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें बल्खु में सभा करने की अनुमति नहीं दी है और उनकी सभा तीनकुने में तय की गई है।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रशासन की रणनीति सफल रही, तो किसी भी प्रकार की झड़प और हिंसा को रोका जा सकेगा।

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