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भारत के संसद में वक्‍फ संसोधन बिल, सुरक्षा के कड़े इंतजाम : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

 

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज । भारत की मोदी सरकार 2 अप्रैल को लोकसभा में वक्‍फ संसोधन बिल पेश करने जा रही है, जिसमे चर्चा के लिए 8 घण्टे का समय रखा गया है। चर्चा लंबी होगी जिसमे गहमा गहमी होगी, जिसका असर भारत के कई संवेदनशील जगहों पर पड़ सकता है जो शान्ति- सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।

इसके मद्देनजर भारत सरकार ने प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन और कैमरों से निगरानी की जाएगी। गश्त और पुलिस बल को बढ़ाया गया है। बॉर्डर पर किसी तरह की घुसपैठ पर निगरानी रखने की हिदायत दी गई है। अधिकारियों ने सतर्कता बनाए रखने के लिए कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर, चौकसी बनाए रखने और अराजकता फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ, सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।

कानून-व्यवस्था के दृष्टिगत यह समय संवेदनशील है, इसलिए  सतत सतर्क-सावधान रहते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के साथ कड़ाई करने के आदेश दिए गए है। सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं को लेकर अलर्ट रहने को कहा गया है। थाना, सर्किल, जिला, रेंज, जोन, मंडल स्तर पर तैनात वरिष्ठ अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के धर्मगुरुओं, समाज के अन्य प्रतिष्ठित जनों के साथ संवाद बनाने को कहा गया है। क्राउड मैनेजमेंट के लिए बेहतर व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य सहित सभी तरह की आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट मोड में रखा गया है।

क्या हैं वफ्फ ?

वक्फ का मतलब होता है कि किसी भी चीज को अल्लाह के लिए दे देना, जिसके बाद उस चीज पर उस इंसान और उसके परिवार का हक नहीं होता है। इस वक्त करीब 10 लाख एकड़ जमीन वक्फ के नाम पर है। इसमें वो भी जमीन शामिल हैं, जिन्‍हें छोड़कर आजादी के वक्त मुसलमान पाकिस्तान चले गए थे। साथ ही नवाबों और राजाओं आदि द्वारा इस्लाम के लिए जमीन को वक्‍फ किया गया है। इन जमीनों पर लखनऊ का ऐशबाग ईदगाह, बड़ा इमामबाड़ा समेत कई बड़ी मस्जिदें, कब्रिस्तान आदि बने हुए हैं। मुस्लिम समुदाय के जिन लोगों की कोई संतान नहीं होती, वो लोग भी ज्यादातर अपनी जमीन को वक्फ के नाम कर जाते हैं। जिसके बाद उस जमीन पर मस्जिद, मदरसा या कब्रिस्तान आदि बन सके और वो इंसानों के काम आ सके।

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भारत सरकार के अनुसार, देश में वक्फ की जमीन करीब 9.4 लाख एकड़ में है, जिसकी कीमत करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये है। इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वक्फ की जमीन भारत में है। भारत में रेलवे और आर्मी के बाद तीसरे नंबर पर वक्फ की जमीन है, जिसे वक्‍फ बोर्ड संभालता है। मोदी सरकार का तर्क है कि वक्फ संशोधन विधेयक वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों के समाधान को सशक्त करेगा, बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगा और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को लाभान्वित करेगा।

क्‍या लोकसभा में पास हो पाएगा वक्‍फ विधेयक?

वर्तमान में लोकसभा में 542 सदस्य हैं, जिसमें भाजपा के पास 240 सीटें हैं, जो इसे सबसे बड़ी पार्टी बनाती है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 293 सांसदों के साथ बहुमत है, जो किसी विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक 272 से कहीं अधिक है।

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वहीं विपक्षी कांग्रेस के 99 सांसदों और अन्य इंडिया ब्लॉक पार्टियों सहित विपक्ष के पास कुल 233 सदस्य हैं, जो बहुमत से कम है। इसके अलावा, आजाद समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियां और कई निर्दलीय भी हैं, ये पार्टियां ना ही एनडीए का हिस्सा हैं और ना ही इंडिया ब्लॉक में ये शामिल हैं।

क्‍या राज्‍यसभा में पास होगा वक्फ विधेयक ?

राज्यसभा में वर्तमान समय में 236 सदस्य हैं, जिनमें से 98 सीटें भाजपा के पास हैं। एनडीए गठबंधन के पास, 6 मनोनीत सदस्यों के साथ, जो आम तौर पर सरकार का समर्थन करते हैं, लगभग 121 सदस्य हैं, जो कानून पारित करने के लिए आवश्यक 119 से अधिक है। वहीं विपक्ष में 85 सदस्य हैं, जिनमें कांग्रेस, अन्य विपक्षी इंडिया ब्लॉक पार्टियां और वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी और एआईएडीएमके के सदस्य, कुछ छोटी पार्टियाँ और निर्दलीय शामिल हैं।

क्‍या हैं, वक्फ संशोधन विधेयक में नए संसोधन ?

गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी मिलेगी जगह:- राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में अब दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य होगा। पहले यह प्रावधान था कि ये सदस्य पदेन होंगे, लेकिन अब पदेन सदस्यों को इससे अलग कर दिया गया है।

महिला प्रतिनिधित्व:- वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 9 और 14 में संशोधन करके वक्फ बोर्ड की संरचना में महिला प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे लिंग विविधता सुनिश्चित हो सके।

सत्यापन प्रक्रियाओं में सुधार:- वक्फ संपत्तियों के दावों के लिए अनिवार्य सत्यापन प्रक्रियाओं को लागू किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध कब्जों को रोका जा सकेगा।

जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका:- वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए जिला मजिस्ट्रेटों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, जिससे प्रशासनिक निगरानी में सुधार होगा।

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वक्फ बोर्ड की शक्तियों में कमी:- वक्फ बोर्ड की अनियंत्रित शक्तियों को सीमित करने के लिए कुछ प्रावधानों को हटाया जाएगा, जिससे वे बिना आवश्यक जांच के किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित नहीं कर सकेंगे।

वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण:- वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए उनके डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाएगा।

बेहतर ऑडिट प्रणाली:- वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वक्फ संपत्तियों की ऑडिट प्रणाली में सुधार किए जाएंगे।

अवैध कब्जों की रोकथाम:- अवैध रूप से कब्जा की गई वक्फ संपत्तियों को वापस लेने के लिए कानूनी प्रणाली में सुधार किए जाएंगे।

वक्फ बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति:- राज्य सरकार को वक्फ बोर्ड के सभी सदस्यों को नामित करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार होगा।

वक्फ न्यायाधिकरण की शक्तियों में वृद्धि:- वक्फ न्यायाधिकरण की शक्तियों को बढ़ाया जाएगा, जिससे वक्फ से संबंधित विवादों का तेजी से निपटारा हो सके।

वक्फ संपत्तियों के अनधिकृत हस्तांतरण पर कड़ी कार्रवाई:- वक्फ संपत्तियों के अनधिकृत हस्तांतरण के लिए कड़ी सजा के प्रावधान किए जाएंगे।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति:- वक्फ बोर्ड के लिए वरिष्ठ स्तर के अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा।

वक्फ संपत्तियों के कंप्यूटरीकरण:- वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा, जिससे डेटा प्रबंधन में सुधार होगा।

वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव:- वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव करके इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिसमें विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया जाएगा।

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

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